झांसी में मरीज की छुट्टी के लिए बुलानी पड़ी पुलिस:परिजन बोले-एंबुलेंस ड्राइवर मेडिकल की जगह प्राइवेट हॉस्पिटल ले गया, सही इलाज नहीं मिलने से हुई मौत

झांसी में मरीज की छुट्टी के लिए बुलानी पड़ी पुलिस:परिजन बोले-एंबुलेंस ड्राइवर मेडिकल की जगह प्राइवेट हॉस्पिटल ले गया, सही इलाज नहीं मिलने से हुई मौत

झांसी में एंबुलेंस चालक की कथित मनमानी और स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का खामियाजा 22 वर्षीय युवक को जान देकर चुकाना पड़ा। परिजनों का आरोप है कि मेडिकल कॉलेज रेफर किए गए युवक को एंबुलेंस चालक निजी अस्पताल ले गया, जहां इलाज के नाम पर पैसे वसूले गए। बाद में मेडिकल कॉलेज में भी भर्ती न मिलने पर युवक की मौत हो गई। मामला नवाबाद थाना क्षेत्र का है। महरौनी थाना क्षेत्र के छापचौल गांव निवासी हरिश्चंद्र (22) पुत्र घनश्याम 2 जून को कार से टीकमगढ़ जाते समय ट्रक की टक्कर में गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसके बड़े भाई रवि के मुताबिक, घायल अवस्था में उसे पहले टीकमगढ़ जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी गंभीर हालत देखते हुए झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। रवि का आरोप है कि रेफरल के बाद जिस एंबुलेंस से वे झांसी पहुंचे, उसका चालक उन्हें मेडिकल कॉलेज ले जाने के बजाय आरटीओ कार्यालय के पास स्थित एक निजी अस्पताल में ले गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने मरीज के ठीक होने का भरोसा दिलाते हुए इलाज शुरू किया और पहले ही 20 हजार रुपये जमा करा लिए। परिजनों का कहना है कि छह दिन के इलाज के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने उनसे करीब 1.35 लाख रुपये वसूल लिए। सोमवार को अस्पताल की ओर से बताया गया कि मरीज की हालत बेहद गंभीर है और उसे मेडिकल कॉलेज या किसी बड़े अस्पताल में ले जाना होगा। साथ ही डिस्चार्ज के लिए 60 हजार रुपये और जमा करने की मांग की गई। डिस्चार्ज को लेकर हुआ विवाद, पुलिस बुलानी पड़ी
रवि का आरोप है कि जब उन्हें लगा कि अस्पताल इलाज से ज्यादा पैसे वसूलने पर ध्यान दे रहा है, तो उन्होंने अतिरिक्त रकम देने से इनकार कर दिया। इस बात को लेकर अस्पताल प्रबंधन और परिजनों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद परिजनों ने मंडी चौकी पुलिस से शिकायत की।
शिकायत मिलने पर चौकी प्रभारी अस्पताल पहुंचे। परिजनों के अनुसार, पुलिस की मौजूदगी में 25 हजार रुपये जमा करने पर मरीज को डिस्चार्ज करने की सहमति बनी। हालांकि पुलिस के जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन ने फिर 60 हजार रुपये जमा कराने की मांग शुरू कर दी। परिजनों ने दोबारा पुलिस बुलायी, जिसके बाद मरीज को डिस्चार्ज किया गया। मेडिकल कॉलेज में भर्ती नहीं करने का आरोप परिजनों का आरोप है कि निजी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वे हरिश्चंद्र को लेकर झांसी मेडिकल कॉलेज पहुंचे, लेकिन वहां वेंटिलेटर और बेड उपलब्ध न होने का हवाला देकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया।
रवि के अनुसार, करीब दो घंटे तक परिवार के लोग डॉक्टरों और कर्मचारियों से भर्ती करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन मरीज को भर्ती नहीं किया गया। अस्पताल के गेट पर टूटीं सांसें परिजनों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती न मिलने के बाद वे हरिश्चंद्र को वापस किसी निजी अस्पताल में ले जाने की तैयारी कर रहे थे। इसी दौरान मेडिकल कॉलेज परिसर में ही उसकी हालत और बिगड़ गई तथा उसने दम तोड़ दिया। युवक की मौत के बाद परिवार ने एंबुलेंस चालक, निजी अस्पताल प्रबंधन और मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। पोस्टमॉर्टम के लिए भी करना पड़ा इंतजार मृतक के भाई रवि ने आरोप लगाया कि मौत के बाद पोस्टमॉर्टम कराने के लिए भी उन्हें करीब छह घंटे तक भटकना पड़ा। उनका कहना है कि शव को लेकर वे एंबुलेंस में इधर-उधर घूमते रहे और डायल-112 पर मदद मांगने के बाद ही पुलिस ने हस्तक्षेप कर शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया।

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