PM-SHRI Schools : प्राध्यापकों के पदस्थापन पर राजस्थान के शिक्षा विभाग का दोहरा मापदंड, शैक्षिक महासंघ ने जताई आपत्ति

PM-SHRI Schools : प्राध्यापकों के पदस्थापन पर राजस्थान के शिक्षा विभाग का दोहरा मापदंड, शैक्षिक महासंघ ने जताई आपत्ति

PM-SHRI Schools : राजस्थान के शिक्षा विभाग में इन दिनों पीएमश्री विद्यालयों में प्राध्यापकों के पदस्थापन को लेकर गहरा असंतोष पनप रहा है। राज्य सरकार और शिक्षा निदेशालय एक ओर जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक ही पद के लिए पदस्थापन के दो अलग-अलग मापदंडों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए है।

जानकारी के अनुसार शिक्षा निदेशालय की ओर से 28 अप्रेल 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, सामान्य विद्यालयों से पीएम श्री स्कूलों में आने वाले प्राध्यापकों के लिए कई शर्तें रखी है। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि पदोन्नति के जरिए काउंसलिंग से आने वाले शिक्षकों के लिए इन शर्तों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

विज्ञप्ति के अनुसार कक्षा 10वीं से लेकर स्नातकोत्तर और बीएड तक हर स्तर पर न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक अनिवार्य, संबंधित विषय में पिछले 5 वर्षों का बोर्ड परीक्षा परिणाम 100 प्रतिशत जरूरी रखा हैं। दूसरी तरफ, हाल ही में 12,141 प्राध्यापकों की पदोन्नति के बाद जारी काउंसलिंग प्रक्रिया में पीएमश्री स्कूलों की रिक्तियां भी शामिल की गई हैं।

कोई बाध्यता नहीं

यहां काउंसलिंग के जरिए पदस्थापन पाने वालों के लिए न तो स्वयं के विद्यार्थी जीवन के 10वीं से लेकर स्नातक, स्नोतकोत्तर व बीएड में न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्णता की बाध्यता है और न ही लगातार विगत 5 वर्षों तक पढ़ाए गए विषय का शत-प्रतिशत परिणाम की शर्त हैं।

काउंसलिंग का टाइम फ्रेम

06 से 08 मई 2026 – विद्यालयों का चयन और ऑप्शन लॉक करना।
11 मई 2026 – एनआईसी और शाला दर्पण द्वारा रिजल्ट/रिपोर्ट तैयार करना।
12 मई 2026 – पदस्थापन आदेश जारी होना।

शैक्षिक महासंघ ने उठाए सवाल

अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, राजस्थान के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. ऋषिन चौबीसा ने कहा पीएम श्री विद्यालयों में चयन के लिए अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड न्यायसंगत नहीं हैं। एक तरफ नव-चयनित व्याख्याताओं को सीधे पात्र माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अनुभवी शिक्षकों से 5 साल का 100 प्रतिशत रिजल्ट मांगा जा रहा है।

व्यक्तिगत शैक्षणिक योग्यता में 60 प्रतिशत की शर्त भी उचित नहीं है। चयन के मापदंड निर्विवाद और समान होने चाहिए।

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