अक्षय तृतीया पर सोमवार को भी पतंगबाजी का जोश चरम पर था। शहर में छतों पर युवाओं और परिवारों ने पतंगबाजी का आनंद लिया। इस दौरान चायनीज मांझे सहित विभिन्न प्रकार के हादसों में घायल होकर 42 लोग पीबीएम हॉस्पिटल पहुंचे। राहत की बात ये रही कि किसी के भी गंभीर चोट नहीं थी। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पीबीएम हॉस्पिटल में ट्रोमा सेंटर के मेडिकल ऑफिसर इंचार्ज डॉ. लवलीन कपिल ने बताया कि सोमवार को 42 लोग जख्मी होकर पहुंचे। सभी को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। इनमें से काफी लोग मांझे से कटे हुए थे। कट गहराई तक नहीं होने के कारण चायनीज मांझे से कटने की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि कई लोगों का कहना था कि चायनीज मांझा उन्हें चीरते हुए निकल गया। इसके अलावा काफी युवा और बच्चे पतंगबाजी के दौरान छत से गिरने पर या सड़क पर पतंग लूटने के दौरान चोटिल हुए हैं। गौरतलब है कि प्रतिबंधित चायनीज मांझे के कारण देशनोक पुल पर 8 साल के मासूम विराट की मौत हो गई थी। उसके बाद चायनीज मांझे को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन ने काफी सख्ती बरती। मांझा बेचने पर तीन लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। उसके बाद भी रविवार को करीब 150 लोग मांझे से कट कर चोटिल हुए थे। लोगों ने सतर्कता बरती, जिससे चोट गंभीर नहीं लगी।


