बावड़ी की सीढ़ियों में बनाई मानव श्रंखला, जल संरक्षण के नारों के साथ किया श्रमदान
विभिन्न संगठनों की भागीदारी और उत्साह से सराबोर दिखी बावड़ी
जयपुर. मानसागर झील के सामने स्थित परशुराम द्वारा बावड़ी शनिवार सुबह जल संरक्षण के संकल्प और श्रमदान के उत्साह से जीवंत हो उठी। सुबह 6.30 बजे से ही यहां श्रमवीरों का पहुंचना शुरू हो गया। किसी के हाथ में झाडू थी तो कोई तगारियां लेकर सफाई में जुटा दिखाई दिया। परिसर में “जल है तो कल है”, “पानी बचाओ, जीवन बचाओ” और बिन पानी सब सून’ जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही। मौका था पत्रिका के अमृतं जलम् अभियान के तहत लगातार दूसरे शनिवार को आयोजित श्रमदान कार्यक्रम का, जिसमें विभिन्न संगठनों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।”
श्रमवीरों ने करीब एक घंटे तक बावड़ी परिसर में और चारों ओर सफाई अभियान चलाया। इस दौरान लंबे समय से जमा काई, मिट्टी, मलवा और गंदगी को मानव श्रृंखला बनाकर बाहर निकाला गया। श्रमदान के बाद ऐसा लगा मानो ऐतिहासिक बावड़ी फिर से संवर उठी हो। वर्क राजस्थान चेप्टर की टीम भी अभियान में शामिल हुई। टीम हेड लईक हसन के नेतृत्व में सीढ़ियां उतरकर पानी के भीतर की गंदगी निकाली गई। डॉ. तस्लीम खान ने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की साझा भागीदारी से ही इस दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।

परिसर में लगी शाखा, फिर श्रमदान में जुटे
कार्यक्रम शुरू होने से एक घंटा पूर्व परिसर में संघ की पाउंड्रिक पार्क शाखा के सदस्य पहुंच गए। स्वयंसेवकों ने पहले नियमित शाखा गतिविधियां आयोजित कीं, जिसके बाद सभी अनुशासित तरीके से श्रमदान में जुट गए। कतारबद्ध होकर सभी ने बावड़ी परिसर की सफाई की और जल संरक्षण का संदेश दिया। शाखा प्रमुख सुधीर गुप्ता ने कहा कि पत्रिका का अमृतं जलम् अभियान केवल पानी बचाने का संदेश नहीं दे रहा, बल्कि शहर की प्राचीन धरोहरों को सहेजने की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है।
श्रमदान में जोश व उत्साह के साथ लिया हिस्सा
इस दौरान तहसीलदार घनश्याम सिंह देवल, लेखराज सैनी, पूर्व पार्षद भूपेंन्द्र मीणा, मनीष सोनी, राकेश अमरसरिया, मुकेश शर्मा, बृजेश अग्रवाल, कन्हैयालाल कोली, एडवोकेट कमलेश, ताराचंद, निसार पठान, मिंहाज मंसूरी, मोहम्मद फरजान, हनीफ खान, हिदायत रसूल और डॉ. मलीका समेत अन्य श्रमवीरों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया।



