मानसून की दस्तक के साथ ही शहर में यात्रियों और मजदूरों की परेशानियां फिर सामने आने लगी हैं। शहर के कई प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर बारिश और तेज धूप से बचाव के लिए शेड की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को खुले आसमान के नीचे खड़ा रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। खासकर मजदूर चौराहे और मामा-भांजा चौराहे पर हालात अधिक चिंताजनक हैं, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं।
राजस्थान पत्रिका टीम ने गुरुवार को शहर के विभिन्न स्थानों का जायजा लिया। बस स्टैंड पर यात्रियों के लिए पहले की तुलना में बेहतर व्यवस्थाएं नजर आईं। यहां बारिश के दौरान जलभराव वाले स्थान पर डीपीसी का कार्य किया गया है तथा बिजली और पानी की सुविधा भी उपलब्ध है। वहीं अस्पताल चौराहे पर भी यात्रियों के लिए शेड बना हुआ मिला। लेकिन मजदूर चौराहे पर बड़ी संख्या में श्रमिक धूप में खड़े दिखाई दिए। यहां न तो बैठने की व्यवस्था है और न ही बारिश से बचने के लिए कोई स्थायी शेड। श्रमिकों ने बताया कि वे वर्षों से इसी तरह खुले में खड़े होकर काम मिलने का इंतजार करते हैं। पीने के पानी की सुविधा भी नहीं होने से उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।
कोई इंतजाम नहीं
मामा-भांजा चौराहे की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग बसों का इंतजार करते हैं, लेकिन बारिश और तेज धूप से बचने के लिए कोई शेड नहीं है। ऐसे में यात्रियों, विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
रटलाई निवासी मजदूर जगदीश बैरवा ने बताया कि वे पिछले आठ वर्षों से मजदूर चौराहे पर काम की तलाश में आते हैं, लेकिन आज तक यहां कोई मूलभूत सुविधा विकसित नहीं की गई। वहीं प्रेमचंद मेहरा ने कहा कि मजदूरों को साफ पेयजल तक उपलब्ध नहीं है और उन्हें हर मौसम में खुले में खड़े रहने की मजबूरी झेलनी पड़ती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर परिषद को जनहित से जुड़े इस मुद्दे पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। मजदूर चौराहे, मामा-भांजा चौराहे सहित अन्य प्रमुख स्थानों पर मजबूत शेड का निर्माण और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि लोगों को राहत मिल सके।
प्रस्ताव है-
यात्रियों व मजदूरों को बिना शेड के बहुत दिक्कत होती है। मजदूर और मामा भांजा चौराहा पर शेड बनाने के लिए इन स्थानों का सर्वे करवाएंगे। दोनों जगह शेड लगाने का प्रयास करेंगे।


