‘पापा अच्छे हैं… समाज के दबाव में किया अंतिम संस्कार’:लव मैरिज पर परिवार ने पुतला बनाकर किया दाह-संस्कार, बेटी बोली- 8 साल से अफेयर था

‘पापा अच्छे हैं… समाज के दबाव में किया अंतिम संस्कार’:लव मैरिज पर परिवार ने पुतला बनाकर किया दाह-संस्कार, बेटी बोली- 8 साल से अफेयर था

‘मैं अपनी मर्जी से अपना घर छोड़कर आई हूं। समाज वालों की वजह से मेरे घर के लोग मेरा दाह संस्कार किया है। समाज के दबाव में कह रहे हैं कि लड़की-लड़का जहां मिलेंगे, वहीं मार देंगे।’ मड़वन प्रखंड के एक गांव की रहने वाली 20 साल की युवती ने सोमवार को ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दरअसल, रविवार को युवती के पिता ने उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया था। युवती ने 8 साल तक चले अफेयर के बाद एक महीने पहले प्रेमी से लव मैरिज की है। लव मैरिज से नाराज युवती के परिवार ने जिंदा बेटी को मृत मानकर विधिवत उसका दाह संस्कार कर दिया। इस दौरान गांव के लोग भी मौजद थे। परिवार के लोगों ने बकायदा अर्थी सजाई, उस पर युवती की तस्वीर रखी। फिर परिवार और गांव के लोगों ने अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट लेकर पहुंचे। फिलहाल, युवती अपने पति के साथ जिले से बाहर रह रही है। युवती का कहना है कि मेरे परिवार के सदस्यों ने कहा है कि तुम दोनों को जहां देखेंगे, वहीं तुम दोनों की हत्या कर देंगे, इसलिए हम छिपकर रह रहे हैं। युवती की प्रेम कहानी क्या है? आखिर युवती के परिजन अपनी बेटी की लव मैरिज पर क्यों नाराज हैं? मामले को लेकर पुलिस का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले युवती की अंतिम संस्कार की तस्वीरें देखिए अब जानिए युवती की प्रेम कहानी 20 साल की युवती ने बताया कि 8 साल से मेरा अफेयर चल रहा था। मैंने अपने अफेयर के बारे में घर में कई बार बात की। प्रेमी से शादी करने की इच्छा जताई, लेकिन घरवालों ने इनकार कर दिया। 6 अप्रैल को मैं अपने प्रेमी के साथ अपने घर से निकल गई। अब मैं अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूं। 6 अप्रैल को मैं घर से निकली। इसके बाद मेरे पिता ने 8 अप्रैल को ‎करजा थाने में अपहरण की‎ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पिता ने थाने में दिए आवेदन में आरोप लगाया था कि मुझे घर के आगे से किडनैप किया गया। आवेदन में यह भी कहा गया है कि मैं घर के दरवाजे पर खड़ी थी, तभी बाइक सवार दो लोग आए और उठाकर ले गए। युवती ने कहा कि मेरे पिता ने झूठा केस किया है। मेरे प्रेमी के परिवार ने उनके साथ गाली-गलौज भी नहीं किया है। मैने 10 अप्रैल को पटना में कोर्ट मैरिज की। वहीं, युवती के पिता की ओर से दर्ज कराई गई FIR के बाद पुलिस ने नवविवाहित जोड़े को बरामद किया था और लड़की का कोर्ट में बयान भी दर्ज कराया था। कोर्ट में युवती ने कहा- मैंने अपनी मर्जी से शादी की करजा थाना की पुलिस ने युवती को कोर्ट में पेश किया तो उसने जज के सामने खुद को बालिग बताई और कहा कि मैंने अपनी मर्जी भागी है। कोर्ट में प्रेमी के साथ शादी कर ली है। मैं अपने पति के साथ ही रहूंगी। युवती के बयान के बाद पुलिस ने युवती को उसके पति के साथ जाने दिया था। अब जानिए युवती के घरवालों ने क्यों किया अंतिम संस्कार युवती की ओर से कोर्ट में दिए गए बयान की सूचना उसके परिजनों को मिली। इसके बाद वो आक्रोशित हो गए। इसके साथ ही समाज के लोगों ने भी इस शादी का विरोध किया। गांव के लोगों ने युवती के परिवार का ‘सामाजिक बहिष्कार’ कर दिया। पंचायत ‎स्तर पर कथित तौर पर ये नियम‎ बना दिया गया कि गांव का कोई ‎व्यक्ति उस परिवार से मेल-जोल,‎ खान-पान या सामाजिक संबंध नहीं‎ रखेगा। इतना ही नहीं, जो भी ‎व्यक्ति उस परिवार से संबंध ‎रखेगा, उसके खिलाफ भी ‎सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। समाज में दोबारा शामिल होने के लिए पंचायत ने एक शर्त रखी और कहा कि परिवार अपनी बेटी को हमेशा के लिए मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दें, तभी उन्हें समान में वापस शामिल किया जाएगा। समाज के दबाव में परिजन ने युवती का अंतिम संस्कार किया‎ सामाजिक बहिष्कार से डरे से युवती के परिजन ने रविवार को पंचायत की शर्त को मान लिया। परिजनों ने अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाया। उसे अर्थी पर लिटाया और पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ गांव में उसकी शव यात्रा निकाली। श्मशान घाट ले जाकर मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार किया गया। स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सामाजिक दबाव और बहिष्कार खत्म करने के लिए परिवार ने यह कदम उठाया है। अब खबर के बारे में कानूनी जानकारों की राय जानिए कानूनी जानकारों के अनुसार, भारत ‎के संविधान में प्रत्येक बालिग ‎को अपनी पसंद से शादी ‎करने और जीवनसाथी चुनने का‎ अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट भी‎ कई मामलों में ये स्पष्ट कर चुका‎ है कि बालिग युवक-युवती अपनी ‎इच्छा से विवाह कर सकते हैं। ‎किसी भी तरह का सामाजिक दबाव ‎या धमकी गैरकानूनी माना जा ‎सकता है। विशेषज्ञों का मानना है ‎कि सामाजिक बहिष्कार जैसी‎ परंपराएं व्यक्ति की गरिमा और‎ मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।‎ ‘मैं अपनी मर्जी से अपना घर छोड़कर आई हूं। समाज वालों की वजह से मेरे घर के लोग मेरा दाह संस्कार किया है। समाज के दबाव में कह रहे हैं कि लड़की-लड़का जहां मिलेंगे, वहीं मार देंगे।’ मड़वन प्रखंड के एक गांव की रहने वाली 20 साल की युवती ने सोमवार को ये बातें दैनिक भास्कर से बातचीत में कही। दरअसल, रविवार को युवती के पिता ने उसका पुतला बनाकर अंतिम संस्कार कर दिया था। युवती ने 8 साल तक चले अफेयर के बाद एक महीने पहले प्रेमी से लव मैरिज की है। लव मैरिज से नाराज युवती के परिवार ने जिंदा बेटी को मृत मानकर विधिवत उसका दाह संस्कार कर दिया। इस दौरान गांव के लोग भी मौजद थे। परिवार के लोगों ने बकायदा अर्थी सजाई, उस पर युवती की तस्वीर रखी। फिर परिवार और गांव के लोगों ने अर्थी को कंधा दिया और श्मशान घाट लेकर पहुंचे। फिलहाल, युवती अपने पति के साथ जिले से बाहर रह रही है। युवती का कहना है कि मेरे परिवार के सदस्यों ने कहा है कि तुम दोनों को जहां देखेंगे, वहीं तुम दोनों की हत्या कर देंगे, इसलिए हम छिपकर रह रहे हैं। युवती की प्रेम कहानी क्या है? आखिर युवती के परिजन अपनी बेटी की लव मैरिज पर क्यों नाराज हैं? मामले को लेकर पुलिस का क्या कहना है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट। सबसे पहले युवती की अंतिम संस्कार की तस्वीरें देखिए अब जानिए युवती की प्रेम कहानी 20 साल की युवती ने बताया कि 8 साल से मेरा अफेयर चल रहा था। मैंने अपने अफेयर के बारे में घर में कई बार बात की। प्रेमी से शादी करने की इच्छा जताई, लेकिन घरवालों ने इनकार कर दिया। 6 अप्रैल को मैं अपने प्रेमी के साथ अपने घर से निकल गई। अब मैं अपने पति के साथ ही रहना चाहती हूं। 6 अप्रैल को मैं घर से निकली। इसके बाद मेरे पिता ने 8 अप्रैल को ‎करजा थाने में अपहरण की‎ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पिता ने थाने में दिए आवेदन में आरोप लगाया था कि मुझे घर के आगे से किडनैप किया गया। आवेदन में यह भी कहा गया है कि मैं घर के दरवाजे पर खड़ी थी, तभी बाइक सवार दो लोग आए और उठाकर ले गए। युवती ने कहा कि मेरे पिता ने झूठा केस किया है। मेरे प्रेमी के परिवार ने उनके साथ गाली-गलौज भी नहीं किया है। मैने 10 अप्रैल को पटना में कोर्ट मैरिज की। वहीं, युवती के पिता की ओर से दर्ज कराई गई FIR के बाद पुलिस ने नवविवाहित जोड़े को बरामद किया था और लड़की का कोर्ट में बयान भी दर्ज कराया था। कोर्ट में युवती ने कहा- मैंने अपनी मर्जी से शादी की करजा थाना की पुलिस ने युवती को कोर्ट में पेश किया तो उसने जज के सामने खुद को बालिग बताई और कहा कि मैंने अपनी मर्जी भागी है। कोर्ट में प्रेमी के साथ शादी कर ली है। मैं अपने पति के साथ ही रहूंगी। युवती के बयान के बाद पुलिस ने युवती को उसके पति के साथ जाने दिया था। अब जानिए युवती के घरवालों ने क्यों किया अंतिम संस्कार युवती की ओर से कोर्ट में दिए गए बयान की सूचना उसके परिजनों को मिली। इसके बाद वो आक्रोशित हो गए। इसके साथ ही समाज के लोगों ने भी इस शादी का विरोध किया। गांव के लोगों ने युवती के परिवार का ‘सामाजिक बहिष्कार’ कर दिया। पंचायत ‎स्तर पर कथित तौर पर ये नियम‎ बना दिया गया कि गांव का कोई ‎व्यक्ति उस परिवार से मेल-जोल,‎ खान-पान या सामाजिक संबंध नहीं‎ रखेगा। इतना ही नहीं, जो भी ‎व्यक्ति उस परिवार से संबंध ‎रखेगा, उसके खिलाफ भी ‎सामाजिक कार्रवाई की जाएगी। समाज में दोबारा शामिल होने के लिए पंचायत ने एक शर्त रखी और कहा कि परिवार अपनी बेटी को हमेशा के लिए मृत मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दें, तभी उन्हें समान में वापस शामिल किया जाएगा। समाज के दबाव में परिजन ने युवती का अंतिम संस्कार किया‎ सामाजिक बहिष्कार से डरे से युवती के परिजन ने रविवार को पंचायत की शर्त को मान लिया। परिजनों ने अपनी जीवित बेटी का पुतला बनाया। उसे अर्थी पर लिटाया और पूरे हिंदू रीति-रिवाज के साथ गांव में उसकी शव यात्रा निकाली। श्मशान घाट ले जाकर मंत्रोच्चारण के बीच पुतले का दाह संस्कार किया गया। स्थानीय मुखिया विकास कुमार सिंह ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि सामाजिक दबाव और बहिष्कार खत्म करने के लिए परिवार ने यह कदम उठाया है। अब खबर के बारे में कानूनी जानकारों की राय जानिए कानूनी जानकारों के अनुसार, भारत ‎के संविधान में प्रत्येक बालिग ‎को अपनी पसंद से शादी ‎करने और जीवनसाथी चुनने का‎ अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट भी‎ कई मामलों में ये स्पष्ट कर चुका‎ है कि बालिग युवक-युवती अपनी ‎इच्छा से विवाह कर सकते हैं। ‎किसी भी तरह का सामाजिक दबाव ‎या धमकी गैरकानूनी माना जा ‎सकता है। विशेषज्ञों का मानना है ‎कि सामाजिक बहिष्कार जैसी‎ परंपराएं व्यक्ति की गरिमा और‎ मौलिक अधिकारों के खिलाफ हैं।‎  

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