राजधानी के सरकारी सिस्टम की रफ्तार किस कदर धीमी है, इसकी बानगी सोमवार को रवींद्र भवन में नजर आई। यहां बहादुरी और सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया। पुरस्कार स्वरूप अपने हाथों से रिवॉल्वर और 12 बोर की बंदूकें दीं। लेकिन, ये पुरस्कार सिर्फ फोटो सेशन तक सीमित रहे। अधिकारी और पुलिसकर्मी ये हथियार सिर्फ साथ नहीं ले जा सके। वजह- पांच महीने से इनकी फाइल कलेक्ट्रेट में घूम रही है। यह लापरवाही तब, जबकि पुलिस मुख्यालय से बाकयदा इन पुलिसकर्मियों के लिए फाइल चली, बताया कि मुख्यमंत्री 11 मई को इन पुलिसकर्मियों को सम्मान स्वरूप हथियार भेंट करें। इसके बावजूद ज्यादातर के लाइसेंस जारी नहीं हुए। समारोह में प्रतीकात्मक रूप से रिवॉल्वर और बंदूकें लेने के बाद इन्हें शस्त्रागार में जमा कराना पड़ा। नियमों के मुताबिक बिना लाइसेंस कोई भी व्यक्ति हथियार अपने पास नहीं रख सकता। इसलिए सभी रिवॉल्वर और बंदूकें सातवीं बटालियन में सुरक्षित रखवाई गई हैं। लाइसेंस जारी होने के बाद ही पुलिसकर्मियों को हथियार सौंपे जाएंगे। 101 अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने डीजीपी कैलाश मकवाणा के साथ प्रदेश पुलिस के 101 अधिकारी-कर्मचारियों को 2019-20 और 2020-21 के दौरान किए उत्कृष्ट कार्यों के लिए सोमवार को सम्मानित किया गया। मंच पर स्पेशल डीजी आदर्श कटियार, एडीजी चंचल शेखर और आईजी रुचिवर्धन मिश्र भी मौजूद थे। इनमें 7 को परम विशिष्ट श्रेणी में रिवॉल्वर, 8 को अति विशिष्ट श्रेणी में 12 बोर बंदूक और 86 पुलिसकर्मियों को विशिष्ट श्रेणी में 50-50 हजार रुपए का पुरस्कार दिया गया। सरकार ने 2013 में पूर्व आईपीएस और बीएसएफ के संस्थापक महानिदेशक केएफ रुस्तमजी के नाम पर यह अलंकरण शुरू किया था।


