Trump Slams US Court System: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर देश की न्यायिक व्यवस्था पर निशाना साधा है। टैरिफ नीति और कैनेडी सेंटर से जुड़े मामलों में कानूनी झटके मिलने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी कोर्ट सिस्टम को ‘फिक्स’ और ‘रिग्ड’ करार दिया है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए कहा कि अमेरिका की अदालत प्रणाली भी राजनीति की तरह फिक्स है। उन्होंने दावा किया कि देश की जनता इस सच्चाई को जानती है और इसी वजह से उन्हें भारी समर्थन मिला है।
कोर्ट के फैसलों से नाराज ट्रंप
ट्रंप की नाराजगी हाल ही में आए दो प्रमुख कानूनी फैसलों के बाद सामने आई है। पहला मामला कैनेडी सेंटर से जुड़ा है, जहां एक संघीय जज ने ट्रंप के नाम को संस्थान से जोड़ने और गर्मियों में प्रस्तावित अस्थायी बंदी की योजना पर रोक लगा दी।
दूसरा मामला ट्रंप की व्यापक टैरिफ नीति से जुड़ा है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में फैसला सुनाते हुए उनकी कई प्रमुख टैरिफ योजनाओं को निरस्त कर दिया था। अदालत का मानना था कि ये कदम राष्ट्रपति को संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों की सीमा से बाहर थे।
जज पर लगाया पक्षपात का आरोप
ट्रंप ने अमेरिकी जिला न्यायाधीश क्रिस्टोफर कूपर पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि जज की पत्नी एमी जेफ्रेस डेमोक्रेटिक खेमे से जुड़ी हुई हैं और उनके राजनीतिक विरोधियों के करीबी लोगों का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
ट्रंप ने कहा कि ऐसे हालात में उनके साथ निष्पक्ष व्यवहार संभव नहीं है। उन्होंने जज पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) का आरोप भी लगाया।
टैरिफ मामले को लेकर भी जताई नाराजगी
ट्रंप ने कहा कि अदालत के फैसले की वजह से अमेरिका को बड़ी आर्थिक कीमत चुकानी पड़ रही है। उन्होंने दावा किया कि टैरिफ मामले में हार के कारण सरकार को अरबों डॉलर वापस करने पड़ रहे हैं।
हालांकि अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी (CBP) के अनुसार अदालत के आदेश के बाद प्रभावित आयातकों और ब्रोकरों को शुल्क वापसी की प्रक्रिया जारी है।
दूसरे कार्यकाल में लगातार न्यायपालिका पर हमलावर
अपने दूसरे कार्यकाल के दौरान ट्रंप कई बार ऐसे न्यायिक फैसलों की आलोचना कर चुके हैं जो उनकी नीतियों के खिलाफ गए हैं। उन्होंने कई संघीय न्यायाधीशों और यहां तक कि रूढ़िवादी झुकाव वाले सुप्रीम कोर्ट के जजों पर भी सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हैं।
ताजा बयान के बाद अमेरिका में न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच तनाव को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।


