Iran Oil Infrastructure Crisis: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो ईरान का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर गंभीर संकट में आ सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान के पास अब लगभग तीन दिन का समय बचा है, जिसके बाद उसका तेल सप्लाई सिस्टम ठप पड़ सकता है।
ट्रंप ने क्या कहा?
फॉक्स चैनल को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ईरान की तेल पाइपलाइनों और सप्लाई सिस्टम पर दबाव तेजी से बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, अगर तेल का प्रवाह रुक जाता है और उसे टैंकरों या जहाजों के जरिए बाहर नहीं निकाला जा पाता तो पाइपलाइनों के भीतर दबाव बढ़कर उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में सिस्टम को दोबारा चालू करना बेहद मुश्किल हो जाता है और अगर शुरू भी किया जाए, तो उसकी क्षमता पहले जैसी नहीं रहती।
50% क्षमता तक गिर सकता है उत्पादन
ट्रंप के अनुसार, अगर ईरान का ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रभावित होता है तो उसे पूरी तरह बहाल करना आसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि दोबारा चालू होने की स्थिति में भी उत्पादन क्षमता लगभग 50 फीसदी तक ही सीमित रह सकती है। इसका सीधा असर ईरान की अर्थव्यवस्था और वैश्विक तेल बाजार दोनों पर पड़ सकता है।
नाकेबंदी और सप्लाई चेन पर असर
रिपोर्ट्स के मुताबिक, समुद्री नाकेबंदी और जहाजों की कमी के कारण ईरान के लिए तेल निर्यात करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे हालात में पाइपलाइनों में जमा हो रहा तेल सिस्टम पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। यही वजह है कि ट्रंप ने इसे एक संभावित तकनीकी संकट बताया है, जो अगले कुछ दिनों में गंभीर रूप ले सकता है।
ईरान का सख्त संदेश: दबाव और धमकी में नहीं होगी बातचीत
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका को साफ संदेश दिया है कि वह दबाव या धमकी के तहत किसी भी तरह की बातचीत के लिए तैयार नहीं है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के साथ बातचीत में उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा अमेरिका की ओर से की जा रही शत्रुतापूर्ण कार्रवाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक आर्थिक और सैन्य दबाव खत्म नहीं होता, तब तक किसी भी तरह की बातचीत आगे नहीं बढ़ सकती।
बातचीत क्यों अटकी हुई है?
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशें फिलहाल ठहराव में हैं। ईरान ने समुद्री नाकेबंदी और अन्य प्रतिबंधों को हटाने की मांग की है, जबकि अमेरिका की ओर से अभी तक कोई ठोस संकेत नहीं मिला है। हाल ही में प्रस्तावित उच्च स्तरीय बातचीत भी सफल नहीं हो पाई, जिससे तनाव और बढ़ गया है।


