प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय विष्णुपुर में शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और युवाओं में नैतिक मूल्यों का संचार के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। माया कौशल्या फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी में इंटर्नशिप कर रहे स्नातक सेमेस्टर-5 के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. गौतम कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। युवाओं को प्रेरित करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान हासिल कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन के वास्तविक संघर्षों में सफल होने के लिए व्यवहार कुशलता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी कि डिग्रियां। समाज में तेजी से बढ़ती संवेदनहीनता और व्यावहारिक गिरावट खतरनाक है। व्यवहार और सोच को बेहतर बनाकर समाज को नई सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। शिक्षा व्यक्ति को सही दिशा देती है कहा कि पृथ्वी पर जन्म लेने वाले हर मनुष्य के लिए शिक्षा अपरिहार्य है, क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति को सही सोच, विवेक और सही दिशा देती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ सीधा और जीवंत संवाद किया। विद्यार्थियों से शिक्षा और समाज से जुड़े कई सवाल-जवाब किए। जिसमें सभी ने उत्साह से भाग लिया। इंटर्नशिप से आती है सामाजिक जिम्मेदारी- रौशन कुमार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए माया कौशल्या फाउंडेशन के सचिव रौशन कुमार ने विद्यार्थियों के जीवन में इंटर्नशिप के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थियों को केवल एक औपचारिकता नहीं निभानी चाहिए बल्कि इसे एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, सामाजिक समझ और पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सीख मिलती है, जो भविष्य में उन्हें एक कुशल शिक्षक और आदर्श नागरिक बनाएगी। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. गौतम कुमार को पौधा और अंगवस्त्र से सम्मानित कर किया गया। संचालन गौरव पाठक ने किया। प्राथमिक शिक्षक शिक्षा महाविद्यालय विष्णुपुर में शिक्षा के गिरते स्तर को सुधारने और युवाओं में नैतिक मूल्यों का संचार के उद्देश्य से संगोष्ठी का आयोजन किया गया। माया कौशल्या फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित संगोष्ठी में इंटर्नशिप कर रहे स्नातक सेमेस्टर-5 के छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित प्रख्यात शिक्षाविद डॉ. गौतम कुमार ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को व्यावहारिक शिक्षा, सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। युवाओं को प्रेरित करते हुए डॉ. गौतम ने कहा कि वर्तमान समय में केवल किताबी ज्ञान हासिल कर लेना ही पर्याप्त नहीं है। जीवन के वास्तविक संघर्षों में सफल होने के लिए व्यवहार कुशलता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच भी उतनी ही आवश्यक है, जितनी कि डिग्रियां। समाज में तेजी से बढ़ती संवेदनहीनता और व्यावहारिक गिरावट खतरनाक है। व्यवहार और सोच को बेहतर बनाकर समाज को नई सकारात्मक दिशा दे सकते हैं। शिक्षा व्यक्ति को सही दिशा देती है कहा कि पृथ्वी पर जन्म लेने वाले हर मनुष्य के लिए शिक्षा अपरिहार्य है, क्योंकि शिक्षा ही व्यक्ति को सही सोच, विवेक और सही दिशा देती है। उन्होंने छात्र-छात्राओं के साथ सीधा और जीवंत संवाद किया। विद्यार्थियों से शिक्षा और समाज से जुड़े कई सवाल-जवाब किए। जिसमें सभी ने उत्साह से भाग लिया। इंटर्नशिप से आती है सामाजिक जिम्मेदारी- रौशन कुमार संगोष्ठी को संबोधित करते हुए माया कौशल्या फाउंडेशन के सचिव रौशन कुमार ने विद्यार्थियों के जीवन में इंटर्नशिप के महत्व पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में इंटर्नशिप करने वाले विद्यार्थियों को केवल एक औपचारिकता नहीं निभानी चाहिए बल्कि इसे एक अवसर के रूप में देखना चाहिए। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव, सामाजिक समझ और पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य करने की सीख मिलती है, जो भविष्य में उन्हें एक कुशल शिक्षक और आदर्श नागरिक बनाएगी। कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. गौतम कुमार को पौधा और अंगवस्त्र से सम्मानित कर किया गया। संचालन गौरव पाठक ने किया।


