सुपौल पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार:बोले-वैश्य समाज को केंद्रीय OBC सूची में प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग तेज, दिल्ली में उठेगा मुद्दा

सुपौल पहुंचे विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार:बोले-वैश्य समाज को केंद्रीय OBC सूची में प्रतिनिधित्व दिलाने की मांग तेज, दिल्ली में उठेगा मुद्दा

सुपौल के सिमराही बाजार स्थित एक होटल परिसर में रविवार को अखिल सिंदुरिया बनिया, कथबनिया एवं कैथल वैश्य महासभा के तत्वावधान में पांचवां स्थापना दिवस सह राष्ट्रीय महासम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, मंत्री शिला मंडल व सुपौल सांसद दिलेश्वर कामैत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर हजारों लोगों की उपस्थिति ने समाज की एकता और संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया। महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य समाज सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना तथा समाज को एक मजबूत संगठनात्मक सूत्र में बांधना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि स्थापना दिवस केवल किसी संगठन के गठन का उत्सव नहीं, बल्कि उसके इतिहास, संघर्ष, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी होता है। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और समाज सेवा की महत्वपूर्ण शक्ति रहा है तथा इस समाज ने ईमानदारी, परिश्रम, उद्यमिता और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और संगठनात्मक मजबूती से संभव है। डॉ. प्रेम कुमार ने सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत विविधताओं का देश है और सभी वर्गों के बीच प्रेम, सम्मान और सहयोग का वातावरण ही देश को मजबूत बनाता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, तकनीक और नवाचार को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान युग ज्ञान आधारित है और जो समाज शिक्षा में आगे रहेगा, वही भविष्य में नेतृत्व करेगा। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को भी समाज के विकास के लिए अनिवार्य बताया। सम्मेलन के दौरान महासभा की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में कथबनिया एवं कैथल वैश्य जाति को केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में सिंदुरिया बनिया जाति के साथ शामिल कराने हेतु राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुशंसा पत्र भेजने की मांग की गई। महासभा का कहना है कि तीनों समुदाय मूलतः एक ही जाति के विभिन्न उपनाम हैं और इनके बीच पारंपरिक सामाजिक एवं वैवाहिक संबंध मौजूद हैं। बिहार में तीनों समुदाय अत्यंत पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल हैं, जबकि केंद्रीय ओबीसी सूची में केवल सिंदुरिया बनिया का नाम दर्ज है।
इस मुद्दे पर बोलते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और जल्द ही प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के समक्ष समाज की मांग रखेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कथबनिया और कैथल वैश्य समुदाय को भी केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल कराने का प्रयास सफल होगा। उन्होंने समाज को जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व दिलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
महासम्मेलन की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार दास ने की। कार्यक्रम के संरक्षक बिरेंद्र दास तथा संयोजक अभिनंदन दास थे। सम्मेलन में समाज की एकता, शिक्षा, संगठन और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। सुपौल के सिमराही बाजार स्थित एक होटल परिसर में रविवार को अखिल सिंदुरिया बनिया, कथबनिया एवं कैथल वैश्य महासभा के तत्वावधान में पांचवां स्थापना दिवस सह राष्ट्रीय महासम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, मंत्री शिला मंडल व सुपौल सांसद दिलेश्वर कामैत ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा झारखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा सहित कई राज्यों से बड़ी संख्या में समाज के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम स्थल पर हजारों लोगों की उपस्थिति ने समाज की एकता और संगठनात्मक शक्ति का प्रदर्शन किया। महासभा के पदाधिकारियों ने बताया कि सम्मेलन का उद्देश्य समाज सेवा, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना तथा समाज को एक मजबूत संगठनात्मक सूत्र में बांधना है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि स्थापना दिवस केवल किसी संगठन के गठन का उत्सव नहीं, बल्कि उसके इतिहास, संघर्ष, उपलब्धियों और भविष्य की दिशा तय करने का अवसर भी होता है। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और समाज सेवा की महत्वपूर्ण शक्ति रहा है तथा इस समाज ने ईमानदारी, परिश्रम, उद्यमिता और सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति केवल आर्थिक विकास से नहीं, बल्कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, नैतिक मूल्यों और संगठनात्मक मजबूती से संभव है। डॉ. प्रेम कुमार ने सामाजिक समरसता को राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए कहा कि भारत विविधताओं का देश है और सभी वर्गों के बीच प्रेम, सम्मान और सहयोग का वातावरण ही देश को मजबूत बनाता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा, तकनीक और नवाचार को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि वर्तमान युग ज्ञान आधारित है और जो समाज शिक्षा में आगे रहेगा, वही भविष्य में नेतृत्व करेगा। उन्होंने महिलाओं की भागीदारी को भी समाज के विकास के लिए अनिवार्य बताया। सम्मेलन के दौरान महासभा की ओर से मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। ज्ञापन में कथबनिया एवं कैथल वैश्य जाति को केंद्र सरकार की ओबीसी सूची में सिंदुरिया बनिया जाति के साथ शामिल कराने हेतु राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को अनुशंसा पत्र भेजने की मांग की गई। महासभा का कहना है कि तीनों समुदाय मूलतः एक ही जाति के विभिन्न उपनाम हैं और इनके बीच पारंपरिक सामाजिक एवं वैवाहिक संबंध मौजूद हैं। बिहार में तीनों समुदाय अत्यंत पिछड़ा वर्ग की श्रेणी में शामिल हैं, जबकि केंद्रीय ओबीसी सूची में केवल सिंदुरिया बनिया का नाम दर्ज है।
इस मुद्दे पर बोलते हुए डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि इस संबंध में प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और जल्द ही प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर केंद्र सरकार के समक्ष समाज की मांग रखेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि कथबनिया और कैथल वैश्य समुदाय को भी केंद्रीय ओबीसी सूची में शामिल कराने का प्रयास सफल होगा। उन्होंने समाज को जनसंख्या के अनुपात में राजनीतिक भागीदारी और प्रतिनिधित्व दिलाने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
महासम्मेलन की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद कुमार दास ने की। कार्यक्रम के संरक्षक बिरेंद्र दास तथा संयोजक अभिनंदन दास थे। सम्मेलन में समाज की एकता, शिक्षा, संगठन और अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।  

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