36 घंटे से घर से बाहर नहीं निकले नीतीश:सुबह उठे, चाय पी, लेकिन कोई मिलने नहीं आया; CM पद छोड़ने के बाद नीतीश की दिनचर्या

36 घंटे से घर से बाहर नहीं निकले नीतीश:सुबह उठे, चाय पी, लेकिन कोई मिलने नहीं आया; CM पद छोड़ने के बाद नीतीश की दिनचर्या

पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहली सुबह रोज की तरह ही शुरू हुई। सुबह नींद खुली, अखबार सामने था, एक अणे मार्ग का वही परिचित आवास भी था, लेकिन फिर भी सब कुछ बदला-बदला सा था। कल तक सुबह होते ही जिस दरवाजे पर सत्ता की हलचल शुरू हो जाती थी, जहां नेताओं और अधिकारियों की आवाजाही लगी रहती थी, वहां गुरुवार की सुबह अजीब सा सन्नाटा पसरा था। जो लोग हर सुबह निर्देश लेने पहुंचते थे, वे अब नए मुख्यमंत्री के दरबार 5 देशरत्न मार्ग में थे। आज नीतीश कुमार की भूमिका बदल चुकी थी। 20 साल तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहा यह आवास पहली बार इतना शांत दिख रहा था। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए कि पूर्व मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार की पहली सुबह कैसी रही, क्या बदला और क्या पहले जैसा ही बना रहा। शपथ के बाद सीधे आवास लौटे, 36 घंटे तक बाहर नहीं निकले मंगलवार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद बुधवार सुबह 10.40 में नीतीश कुमार लोक भवन पहुंचे। 10.57 बजे सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद करीब 11:20 बजे वह सीधे एक अणे मार्ग स्थित अपने आवास लौट गए। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह सीमित रखा और अगले 36 घंटे तक बाहर नहीं निकले। मुख्यमंत्री रहते हुए जहां उनकी दिनचर्या लगातार बैठकों, अधिकारियों से मुलाकात और प्रशासनिक गतिविधियों से भरी रहती थी। वहीं, पद छोड़ने के बाद पहली बार एक अणे मार्ग शांत नजर आया। गुरुवार को भी पूरे दिन वो अपने आवास से बाहर नहीं निकले। शाम में सम्राट चौधरी पहुंचे, सुबह सिर्फ दो करीबी नेता मिले नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद बुधवार शाम करीब 6 बजे सम्राट चौधरी शिष्टाचार मुलाकात के लिए एक अणे मार्ग पहुंचे। यहां उनकी नीतीश कुमार से करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। सत्ता ट्रांसफर के बाद यह पहली औपचारिक मुलाकात थी, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार और सम्मान के तौर पर देखा गया। गुरुवार सुबह सिर्फ डिप्टी CM विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव ही नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने कुछ देर बातचीत की और फिर लौट गए। इसके अलावा उनके आवास पर कोई बड़ी राजनीतिक हलचल नजर नहीं आई। मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश से मिलने जहां एक अणे मार्ग पर सुबह से ही मंत्री, विधायक और अधिकारियों की आवाजाही शुरू हो जाती थी, वहां गुरुवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ। गुरुवार सुबह उन्होंने घर के सदस्यों के साथ वॉकिंग की और कमरे में चले गए। दिन के बीच-बीच में कैंपस में टहलते दिखे। अधिकारी नए मुख्यमंत्री के स्वागत और नई व्यवस्था में व्यस्त रहे सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी मशीनरी का पूरा फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर है। बुधवार शाम से ही अधिकारी नए मुख्यमंत्री के आवास, सुरक्षा, बैठकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने में जुट गए। जो अधिकारी पहले सुबह एक अणे मार्ग पहुंचते थे, वे अब 5 देशरत्न मार्ग पर सक्रिय दिखे। यह प्रशासनिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है कि जैसे ही नया मुख्यमंत्री पद संभालता है, पूरी सरकारी मशीनरी उनके अनुसार काम करने लगती है। इसी वजह से नीतीश कुमार के आवास पर प्रशासनिक हलचल लगभग समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री वाला प्रोटोकॉल खत्म, सुरक्षा दायरा भी बदला मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पहले ही नीतीश कुमार को Z+ सुरक्षा मिल चुकी थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद के साथ मिलने वाला विशेष प्रोटोकॉल समाप्त हो गया। पहले उनकी सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी SSG के जवान लगे रहते थे। उनके आवास से निकलते ही सड़कें खाली कराई जाती थीं और पूरा सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल गई। सीएम पद छोड़ने के बाद जो जवान और अधिकारी पहले नीतीश की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहते थे, वे अब नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सुरक्षा में लगाए गए हैं। नीतीश कुमार के पास Z+ सुरक्षा तो है, लेकिन मुख्यमंत्री जैसी प्राथमिकता अब नहीं रही। दिनचर्या वही रही, लेकिन जिम्मेदारियां पूरी तरह बदल गई नीतीश कुमार की पहचान एक अनुशासित नेता के रूप में रही है। वह हमेशा समय पर उठते हैं, सुबह अखबार पढ़ते हैं और व्यवस्थित तरीके से दिन की शुरुआत करते हैं। गुरुवार को भी उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं दिखा। सुबह की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन अब उनके सामने सरकारी फाइलें नहीं थीं और न ही अधिकारियों के साथ बैठकों का शेड्यूल। मुख्यमंत्री रहते हुए सुबह का हर घंटा प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भरा होता था। फैसले लेने होते थे, विभागीय रिपोर्ट देखनी होती थी और नेताओं से मुलाकात करनी होती थी। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बनते ही यह दबाव खत्म हो गया। दिनचर्या वही रही, लेकिन जिम्मेदारियों का भार कम हो गया। दिल्ली भी नहीं गए नीतीश कुमार नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 16-18 अप्रैल 2026 को संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सभी सांसदों को अनिवार्य रूप से सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। हालांकि, नीतीश कुमार इससे दूर रहे। वह दिल्ली के लिए रवाना नहीं हुए। जबकि जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत तमाम सांसद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। 10 अप्रैल को नीतीश कुमार ने ली थी शपथ राज्यसभा सांसद के रूप में नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को शपथ ली थी। उन्हें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इस मौके पर बिहार NDA के कई नेता मौजूद रहे। साथ ही केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, जेपी नड्डा और अर्जुन राम मेघवाल भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। नीतीश कुमार ने बनाया खास रिकॉर्ड राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वे अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद- चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। इससे पहले वे लोकसभा सांसद, विधायक और विधान पार्षद के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहली सुबह रोज की तरह ही शुरू हुई। सुबह नींद खुली, अखबार सामने था, एक अणे मार्ग का वही परिचित आवास भी था, लेकिन फिर भी सब कुछ बदला-बदला सा था। कल तक सुबह होते ही जिस दरवाजे पर सत्ता की हलचल शुरू हो जाती थी, जहां नेताओं और अधिकारियों की आवाजाही लगी रहती थी, वहां गुरुवार की सुबह अजीब सा सन्नाटा पसरा था। जो लोग हर सुबह निर्देश लेने पहुंचते थे, वे अब नए मुख्यमंत्री के दरबार 5 देशरत्न मार्ग में थे। आज नीतीश कुमार की भूमिका बदल चुकी थी। 20 साल तक बिहार की सत्ता का केंद्र रहा यह आवास पहली बार इतना शांत दिख रहा था। दैनिक भास्कर की खास रिपोर्ट में पढ़िए कि पूर्व मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार की पहली सुबह कैसी रही, क्या बदला और क्या पहले जैसा ही बना रहा। शपथ के बाद सीधे आवास लौटे, 36 घंटे तक बाहर नहीं निकले मंगलवार को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद बुधवार सुबह 10.40 में नीतीश कुमार लोक भवन पहुंचे। 10.57 बजे सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ ग्रहण के बाद करीब 11:20 बजे वह सीधे एक अणे मार्ग स्थित अपने आवास लौट गए। इसके बाद उन्होंने खुद को पूरी तरह सीमित रखा और अगले 36 घंटे तक बाहर नहीं निकले। मुख्यमंत्री रहते हुए जहां उनकी दिनचर्या लगातार बैठकों, अधिकारियों से मुलाकात और प्रशासनिक गतिविधियों से भरी रहती थी। वहीं, पद छोड़ने के बाद पहली बार एक अणे मार्ग शांत नजर आया। गुरुवार को भी पूरे दिन वो अपने आवास से बाहर नहीं निकले। शाम में सम्राट चौधरी पहुंचे, सुबह सिर्फ दो करीबी नेता मिले नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के बाद बुधवार शाम करीब 6 बजे सम्राट चौधरी शिष्टाचार मुलाकात के लिए एक अणे मार्ग पहुंचे। यहां उनकी नीतीश कुमार से करीब 10 मिनट तक बातचीत हुई। सत्ता ट्रांसफर के बाद यह पहली औपचारिक मुलाकात थी, जिसे राजनीतिक शिष्टाचार और सम्मान के तौर पर देखा गया। गुरुवार सुबह सिर्फ डिप्टी CM विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र यादव ही नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं ने कुछ देर बातचीत की और फिर लौट गए। इसके अलावा उनके आवास पर कोई बड़ी राजनीतिक हलचल नजर नहीं आई। मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश से मिलने जहां एक अणे मार्ग पर सुबह से ही मंत्री, विधायक और अधिकारियों की आवाजाही शुरू हो जाती थी, वहां गुरुवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ। गुरुवार सुबह उन्होंने घर के सदस्यों के साथ वॉकिंग की और कमरे में चले गए। दिन के बीच-बीच में कैंपस में टहलते दिखे। अधिकारी नए मुख्यमंत्री के स्वागत और नई व्यवस्था में व्यस्त रहे सत्ता परिवर्तन के बाद सरकारी मशीनरी का पूरा फोकस मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर है। बुधवार शाम से ही अधिकारी नए मुख्यमंत्री के आवास, सुरक्षा, बैठकों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभालने में जुट गए। जो अधिकारी पहले सुबह एक अणे मार्ग पहुंचते थे, वे अब 5 देशरत्न मार्ग पर सक्रिय दिखे। यह प्रशासनिक व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है कि जैसे ही नया मुख्यमंत्री पद संभालता है, पूरी सरकारी मशीनरी उनके अनुसार काम करने लगती है। इसी वजह से नीतीश कुमार के आवास पर प्रशासनिक हलचल लगभग समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री वाला प्रोटोकॉल खत्म, सुरक्षा दायरा भी बदला मुख्यमंत्री पद छोड़ने से पहले ही नीतीश कुमार को Z+ सुरक्षा मिल चुकी थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद के साथ मिलने वाला विशेष प्रोटोकॉल समाप्त हो गया। पहले उनकी सुरक्षा में बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी SSG के जवान लगे रहते थे। उनके आवास से निकलते ही सड़कें खाली कराई जाती थीं और पूरा सुरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता था, लेकिन अब यह व्यवस्था बदल गई। सीएम पद छोड़ने के बाद जो जवान और अधिकारी पहले नीतीश की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहते थे, वे अब नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सुरक्षा में लगाए गए हैं। नीतीश कुमार के पास Z+ सुरक्षा तो है, लेकिन मुख्यमंत्री जैसी प्राथमिकता अब नहीं रही। दिनचर्या वही रही, लेकिन जिम्मेदारियां पूरी तरह बदल गई नीतीश कुमार की पहचान एक अनुशासित नेता के रूप में रही है। वह हमेशा समय पर उठते हैं, सुबह अखबार पढ़ते हैं और व्यवस्थित तरीके से दिन की शुरुआत करते हैं। गुरुवार को भी उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं दिखा। सुबह की शुरुआत सामान्य रही, लेकिन अब उनके सामने सरकारी फाइलें नहीं थीं और न ही अधिकारियों के साथ बैठकों का शेड्यूल। मुख्यमंत्री रहते हुए सुबह का हर घंटा प्रशासनिक जिम्मेदारियों से भरा होता था। फैसले लेने होते थे, विभागीय रिपोर्ट देखनी होती थी और नेताओं से मुलाकात करनी होती थी। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री बनते ही यह दबाव खत्म हो गया। दिनचर्या वही रही, लेकिन जिम्मेदारियों का भार कम हो गया। दिल्ली भी नहीं गए नीतीश कुमार नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने 16-18 अप्रैल 2026 को संसद के विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के लिए अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए तीन लाइन का व्हिप जारी किया है। पार्टी ने सभी सांसदों को अनिवार्य रूप से सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। हालांकि, नीतीश कुमार इससे दूर रहे। वह दिल्ली के लिए रवाना नहीं हुए। जबकि जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा समेत तमाम सांसद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। 10 अप्रैल को नीतीश कुमार ने ली थी शपथ राज्यसभा सांसद के रूप में नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को शपथ ली थी। उन्हें उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई थी। इस मौके पर बिहार NDA के कई नेता मौजूद रहे। साथ ही केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण, जेपी नड्डा और अर्जुन राम मेघवाल भी शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए थे। नीतीश कुमार ने बनाया खास रिकॉर्ड राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करने के साथ ही नीतीश कुमार ने भारतीय राजनीति में एक खास रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। वे अब देश के उन चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने लोकसभा, राज्यसभा, बिहार विधानसभा और बिहार विधान परिषद- चारों सदनों की सदस्यता हासिल की है। नीतीश कुमार पहली बार राज्यसभा पहुंचे हैं। इससे पहले वे लोकसभा सांसद, विधायक और विधान पार्षद के रूप में अपनी भूमिका निभा चुके हैं।  

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *