तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और निशांत कुमार (नीतीश कुमार के बेटे) बिहार की युवा पीढ़ी के प्रमुख चेहरे हैं। तीनों ही पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं, लेकिन लालू और पासवान के बेटे से निशांत की रणनीति (स्ट्रेटजी) और तरीका काफी अलग है। लालू, पासवान और कुशवाहा के बेटों की लॉंचिंग सीधे मंत्री, विधायक-सांसद बनने से हुई। वहीं, नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने डिप्टी CM पोस्ट ठुकराकर संगठन की राह पकड़ी है। निशांत के आगे की स्ट्रेटजी क्या है। लालू, पासवान, कुशवाहा के बेटे से कैसे अलग हैं। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। नीतीश कुमार के बेटे की स्ट्रेटजी जानिए… लेट से राजनीति में आए निशांत कुमार की रणनीति लालू, रामविलास और उपेंद्र कुशवाहा के बेटों से अलग और सतर्क है। इसे ऐसे समझिए… 1. कम प्रोजेक्शन, ज्यादा ग्राउंड वर्क निशांत कुमार ने डिप्टी CM का पद ठुकरा दिया है। वह अभी भी JDU के सामान्य कार्यकर्ता की भांति काम कर रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के बेटे के कारण पार्टी में उनको स्पेशल ट्रीटमेंट जरूर मिल रहा है। निशांत की कोशिश है कि वह बयानबाजी छोड़कर ग्राउंड पर ज्यादा दिखें। इसी कारण 8 मार्च को पार्टी में शामिल होने के बाद लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। उनसे पार्टी का कामकाज समझ रहे हैं। साथ ही पिता नीतीश कुमार की उपलब्धियां (सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था) गिना रहे हैं और लालू-राबड़ी काल की याद दिला रहे हैं। निशांत कुमार की यही स्ट्रेटजी लालू यादव के बेटे तेजस्वी, रामविलास पासवान के बेटे चिराग और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश से अलग करती है। 2. अखिलेश यादव की तरह राज्य घूमेंगे, फिर लेंगे बड़ा पद नीतीश कुमार पूरी राजनीति परिवारवाद के खिलाफ करते रहे हैं। वह आज भी अपने हर भाषण में एक लाइन जरूर बोलते हैं- ‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी, वो हटे तो पत्नी को CM बना दिया। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए किया।’ अब परिस्थिति बदल गई है। नीतीश कुमार के बेटे राजनीति में आ गए हैं। उनकी आलोचना हो रही है। इसी आलोचना और नैतिकता के कारण निशांत डिप्टी CM नहीं बने। इसलिए निशांत खुद को ‘मेरिट’ और ‘डेवलपमेंट’ पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं। वे हर बयान में कहते हैं-पिता का विकास कार्य आगे बढ़ाएंगे। आज भी उन्होंने इसे दोहराया। 3. निशांत के लिए बनी टीम, अनुभवी नेताओं का साथ पार्टी में शामिल होने के बाद निशांत कुमार को सपोर्ट करने के लिए 14 लोगों की एक टीम बनी है। वह टीम उनकी रणनीति बनाएगी। साथ ही समय-समय पर निशांत पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं ललन सिंह, संजय झा जैसे अनुभवी नेताओं से भी मिल रहे हैं। इस वक्त निशांत को डिप्टी CM बनने से ज्यादा जरूरी यह साबित करना है कि वे पिता की तरह जन-जन के नेता बन सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार से ज्यादा पार्टी के संगठन और लोगों से मिलना होगा। नई स्ट्रेटजी से निशांत को 3 बड़े फायदे तेजस्वी यादव, चिराग पासवान और निशांत कुमार (नीतीश कुमार के बेटे) बिहार की युवा पीढ़ी के प्रमुख चेहरे हैं। तीनों ही पिता की राजनीतिक विरासत संभाल रहे हैं, लेकिन लालू और पासवान के बेटे से निशांत की रणनीति (स्ट्रेटजी) और तरीका काफी अलग है। लालू, पासवान और कुशवाहा के बेटों की लॉंचिंग सीधे मंत्री, विधायक-सांसद बनने से हुई। वहीं, नीतीश कुमार के बेटे निशांत ने डिप्टी CM पोस्ट ठुकराकर संगठन की राह पकड़ी है। निशांत के आगे की स्ट्रेटजी क्या है। लालू, पासवान, कुशवाहा के बेटे से कैसे अलग हैं। जानेंगे, आज के एक्सप्लेनर बूझे की नाहीं में…। नीतीश कुमार के बेटे की स्ट्रेटजी जानिए… लेट से राजनीति में आए निशांत कुमार की रणनीति लालू, रामविलास और उपेंद्र कुशवाहा के बेटों से अलग और सतर्क है। इसे ऐसे समझिए… 1. कम प्रोजेक्शन, ज्यादा ग्राउंड वर्क निशांत कुमार ने डिप्टी CM का पद ठुकरा दिया है। वह अभी भी JDU के सामान्य कार्यकर्ता की भांति काम कर रहे हैं। हालांकि, नीतीश कुमार के बेटे के कारण पार्टी में उनको स्पेशल ट्रीटमेंट जरूर मिल रहा है। निशांत की कोशिश है कि वह बयानबाजी छोड़कर ग्राउंड पर ज्यादा दिखें। इसी कारण 8 मार्च को पार्टी में शामिल होने के बाद लगातार नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। उनसे पार्टी का कामकाज समझ रहे हैं। साथ ही पिता नीतीश कुमार की उपलब्धियां (सड़क, बिजली, कानून-व्यवस्था) गिना रहे हैं और लालू-राबड़ी काल की याद दिला रहे हैं। निशांत कुमार की यही स्ट्रेटजी लालू यादव के बेटे तेजस्वी, रामविलास पासवान के बेटे चिराग और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश से अलग करती है। 2. अखिलेश यादव की तरह राज्य घूमेंगे, फिर लेंगे बड़ा पद नीतीश कुमार पूरी राजनीति परिवारवाद के खिलाफ करते रहे हैं। वह आज भी अपने हर भाषण में एक लाइन जरूर बोलते हैं- ‘2005 से पहले बिहार में कुछ था जी, वो हटे तो पत्नी को CM बना दिया। उन्होंने सिर्फ अपने परिवार वालों के लिए किया।’ अब परिस्थिति बदल गई है। नीतीश कुमार के बेटे राजनीति में आ गए हैं। उनकी आलोचना हो रही है। इसी आलोचना और नैतिकता के कारण निशांत डिप्टी CM नहीं बने। इसलिए निशांत खुद को ‘मेरिट’ और ‘डेवलपमेंट’ पर प्रोजेक्ट कर रहे हैं। वे हर बयान में कहते हैं-पिता का विकास कार्य आगे बढ़ाएंगे। आज भी उन्होंने इसे दोहराया। 3. निशांत के लिए बनी टीम, अनुभवी नेताओं का साथ पार्टी में शामिल होने के बाद निशांत कुमार को सपोर्ट करने के लिए 14 लोगों की एक टीम बनी है। वह टीम उनकी रणनीति बनाएगी। साथ ही समय-समय पर निशांत पार्टी के सबसे सीनियर नेताओं ललन सिंह, संजय झा जैसे अनुभवी नेताओं से भी मिल रहे हैं। इस वक्त निशांत को डिप्टी CM बनने से ज्यादा जरूरी यह साबित करना है कि वे पिता की तरह जन-जन के नेता बन सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार से ज्यादा पार्टी के संगठन और लोगों से मिलना होगा। नई स्ट्रेटजी से निशांत को 3 बड़े फायदे


