Nava Raipur Public Toilet Issue: अरबों का विकास, फिर भी गूगल नहीं खोज पा रहा पब्लिक टॉयलेट, नवा रायपुर की सच्चाई आई सामने

Nava Raipur Public Toilet Issue: अरबों का विकास, फिर भी गूगल नहीं खोज पा रहा पब्लिक टॉयलेट, नवा रायपुर की सच्चाई आई सामने

रायपुर@ अजय रघुवंशी। Public Toilet Crisis in Nava Raipur: चौड़ी सड़कें, भव्य सरकारी भवन, आधुनिक पार्क वाले नवा रायपुर में गूगल मैप भी पब्लिक टॉयलेट नहीं ढूंढ पा रहा है। मंत्रालय और सरकारी दफ्तरों के भीतर कर्मचारियों के लिए सुविधाएं तो मौजूद हैं, लेकिन आम आदमी, पर्यटकों, महिलाओं और बच्चों के लिए सेंट्रल पार्क, झांझ जलाशय, स्टेडियम समेत अधिकांश सार्वजनिक स्थलों पर व्यवस्था नहीं है। बड़े आयोजनों के दौरान यह समस्या और गंभीर हो जाती है।

गूगल भी नहीं खोज पा रहा पब्लिक टॉयलेट

राजधानी में जहां महिलाओं के लिए पिंक टॉयलेट जैसी सुविधाएं विकसित की गई हैं, वहीं नवा रायपुर में जिम्मेदार अधिकारी कम फुटफॉल का हवाला देकर इस जरूरत को भी नजरअंदाज कर रहे हैं। स्मार्ट सिटी के तमाम दावों के बीच सार्वजनिक शौचालयों की कमी अब नवा रायपुर की सबसे बड़ी बुनियादी खामियों में शामिल हो गई है। नवा रायपुर में अरबों रुपए का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया गया है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि सार्वजनिक शौचालय ढूंढना किसी चुनौती से कम नहीं है।

जंगल सफारी, जलाशय, सेंट्रल पार्क में उमड़ती है भीड़

सेंट्रल पार्क, झांझ जलाशय, स्टेडियम, जंगल सफारी के आसपास के कई क्षेत्रों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर लोगों को शौचालय की सुविधा आसानी से उपलब्ध नहीं होने से काफी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। आमतौर पर यहां सालभर लोगों की भीड़ उमड़ती है।

एयरपोर्ट में एक टॉयलेट ढूंढ पाया गूगल

स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चारों तरफ सर्च करने के बाद गूगल, एयरपोर्ट परिसर में ही पब्लिक टॉयलेट खोज पाता है। यह सुविधा भी मुख्य रूप से एयरपोर्ट आने-जाने वाले यात्रियों के लिए है, लेकिन नवा रायपुर घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए यह सुविधा भी किसी काम की नहीं है।

नवा रायपुर में जन सुविधा केंद्र प्रस्तावित है। यहां पब्लिक टॉयलेट बनाया जाएगा। सरकारी दफ्तरों में सुविधाएं हैं। – चंदन कुमार, सीईओ, एनआरडीए

शौचालय की तलाश में भटकती है जनता

नवा रायपुर को आधुनिक और स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित किया गया है, लेकिन सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की कमी इसकी बड़ी खामियों में से एक बनकर सामने आई है। सेंट्रल पार्क, झांझ जलाशय, जंगल सफारी और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर आने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अरबों रुपये के इंफ्रास्ट्रक्चर के बावजूद यदि आम नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है। अब जरूरत है कि संबंधित एजेंसियां इस समस्या का जल्द समाधान करें, ताकि नवा रायपुर वास्तव में नागरिकों के लिए सुविधाजनक और समावेशी शहर बन सके।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *