नागौर. बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को पोषण तथा प्रारंभिक शिक्षा सेवाएं देने वाली जिले की आंगनबाड़ी व्यवस्था अब भी बुनियादी सुविधाओं के संकट से जूझ रही है। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिले की 1550 आंगनबाड़ी केंद्रों में से 243 केंद्रों पर आज भी स्थायी बिजली कनेक्शन नहीं है, जबकि 1085 केंद्र ऐसे हैं, जिनके पास स्वयं का भवन नहीं है और वह किराये, स्कूल, पंचायत, सामुदायिक अथवा अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे हैं।
बिजली से वंचित सैकड़ों केंद्र
विभागीय आंकड़ों के अनुसार जिले के 1550 आंगनबाड़ी केंद्रों में से केवल 1307 केंद्रों पर स्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध है। शेष 243 केंद्र अब भी इस बुनियादी सुविधा से वंचित हैं। भेरूंदा परियोजना के 121 में से 91, डेगाना के 185 में से 143, जायल के 241 में से 197 तथा खींवसर के 191 में से 156 केंद्रों पर ही स्थायी बिजली कनेक्शन उपलब्ध है। हालांकि नागौर परियोजना में 248 में से 235 और रियां में 116 में से 114 केंद्रों तक बिजली कनेक्शन पहुंच चुका है।
सिर्फ 465 केंद्रों के पास अपना भवन
महिला बाल विकास विभाग की ओर से संचालित आंगनबाड़ी केन्द्रों में कइयों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। कारण कि जिले के 1550 केंद्रों में से केवल 465 केंद्र स्वयं के भवनों में संचालित हो रहे हैं, लेकिन इसके विपरीत 360 केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। सबसे अधिक 560 केंद्र स्कूल परिसरों में संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 90 केंद्र सामुदायिक भवनों, 11 पंचायत भवनों तथा 64 अन्य सरकारी भवनों में संचालित किए जा रहे हैं।
शौचालय सुविधा भी पूरी नहीं
आंकड़े बताते हैं कि जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में कार्यशील शौचालय की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। 1550 केंद्रों में से केवल 1092 केंद्रों में ही कार्यशील शौचालय हैं। इसका मतलब है कि 458 केंद्र ऐसे हैं, जहां यह सुविधा उपलब्ध नहीं है या उपयोग की स्थिति में नहीं है। बच्चों और महिलाओं से जुड़े केंद्रों में यह स्थिति चिंता का विषय मानी जा रही है।
सुविधाओं की कमी के बीच संचालित हो रही सेवाएं
आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से पोषण आहार वितरण, टीकाकरण, स्वास्थ्य निगरानी, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और प्री-स्कूल शिक्षा जैसी महत्वपूर्ण सेवाएं दी जाती हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में केंद्रों का बिना बिजली, बिना स्वयं के भवन और बिना कार्यशील शौचालय के संचालित होना व्यवस्था को संचालित करना मुश्किल होता जा रहा है।
सरकारी नीयत पर लगा सवालिया निशान
सरकार आंगनबाड़ी सेवाओं को मजबूत बनाने पर लगातार जोर दे रही है, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि अभी भी बुनियादी सुविधाओं का अंतर बना हुआ है। जबकि सरकार आंगनबाड़ी केन्द्रों को सुविधाओं से सज्जित करने का दावा करती हे, लेकिन हकीकत हालात यह है कि ज्यादातर आंगनबाड़ी केन्द्रों के न तो खुद के भवन है, और न ही बिजली या अन्य मूलभूत सुविधाएं। इससे सरकारी नीयत का अंदाजा खुद-ब-खुद लगाया जा सकता है।
फैक्ट फाइल
कुल आंगनबाड़ी केंद्र : 1550
स्थायी बिजली कनेक्शन वाले केंद्र : 1307
बिना स्थायी बिजली कनेक्शन वाले केंद्र : 243
स्वयं के भवन वाले केंद्र : 465
किराये के भवनों में संचालित केंद्र : 360
स्कूल परिसरों में संचालित केंद्र : 560
कार्यशील शौचालय वाले केंद्र : 1092
कार्यशील शौचालय से वंचित केंद्र : 458
इनका कहना है…
आंगनबाड़ी केन्द्रों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धतता कराए जाने के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। यही वजह रही कि कई आंगनबाड़ी केन्द्रों में गत वर्षों के दौरान सुविधाओं का इजाफा हुआ है। जो बचे हैं, उनमें भी मूलभूत सुविधाओं के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
दुर्गासिंह उदावत, उपनिदेशक, महिला एवं बाल विकास विभाग नागौर
नागौर. शारदापुरम क्षेत्र में स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र की तस्वीर बता रही सुविधाओं की स्थिति


