MP News: मध्य प्रदेश में रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों पर कार्रवाई का सिलसिला लगातार जारी है। लगभग हर दूसरे दिन कहीं न कहीं लोकायुक्त (Lokayukta Action) रिश्वतखोर अधिकारी-कर्मचारियों को रिश्वत (Bribe) लेते हुए रंगेहाथों पकड़ रही है लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोर बाज आते नजर नहीं आ रहे हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले का है जहां नगर पालिका की स्थापना शाखा में पदस्थ बाबू को लोकायुक्त ग्वालियर की टीम ने 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथों पकड़ा है।
निलंबित एआरआई से मांगी 60000 रुपये रिश्वत
शिवपुरी नगर पालिका के निलंबित एआरआई हरिवल्लभ चंदौरिया ने लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में नगर पालिका शिवपुरी की पदस्थापना शाखा में पदस्थ बाबू भगवान लाल करोलिया के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आवेदक निलंबित एएरआई ने बताया था कि 14 नवंबर 2025 को उसे सीएमओ ने बिना किसी नोटिस के निलंबित कर दिया था। वो महीनों से नगर पालिका के अलग-अलग बाबूओं के चक्कर काट रहा था और इसी दौरान 16 अप्रैल को बाबू भगवान लाल करोलिया ने उससे बहाली के एवज में सीएमओ के नाम पर 60 हजार रुपये रिश्वत की मांग की। रिश्वत की पहली किस्त के तौर पर 20 हजार रुपये उसी दिन बाबू ने उससे ले लिए।
लोकायुक्त ने रंगेहाथों पकड़ा
पहली किस्त में 20 हजार रुपये देने के बाद निलंबित एआरआई हरिवल्लभ चंदौरिया ने लोकायुक्त कार्यालय ग्वालियर में शिकायत दर्ज कराई। लोकायुक्त टीम ने शिकायत की जांच की और शिकायत सही पाए जाने पर शनिवार को आवेदक निलंबित एआरआई को रिश्वतखोर बाबू भगवान लाल करोलिया के पास रिश्वत की रकम देने के लिए भेजा। रिश्वत की रकम देने के लिए बाबू ने आवेदक को अपने घर पर बुलाया और जैसे ही घर के आंगन में रिश्वत के 40 हजार रुपये लिए तो लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगेहाथों पकड़ लिया।
ऑडियो टेप में सीएमओ का भी नाम
लोकायुक्त ग्वालियर के निरीक्षक और दल प्रभारी बलराम सिंह ने बताया कि 16 अप्रैल को शिकायत दर्ज की गई थी और आज ट्रैप कार्रवाई में आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। सबूत के तौर पर जो ऑडियो टेप आवेदक ने दिया था उसमें सीएमओ इशांक धाकड़ को पैसे देने की बात रिकॉर्ड है। फिलहाल भगवान लाल करोलिया को आरोपी बनाया गया है, जबकि ऑडियो की जांच और पुष्टि के बाद सीएमओ का नाम भी एफआईआर में जोड़ा जा सकता है। वहीं इस मामले पर सीएमओ इशांक धाकड़ का कहना है कि स्थापना बाबू भगवान लाल के खिलाफ रिश्वत मांगे जाने की शिकायतें उन्हें मिली थीं जिसके कारण उसे 16 अप्रैल को ही पद से हटाकर दूसरे बाबू को नियुक्त किया गया है। सीएमओ ने अपने ऊपर लगे रिश्वत मांगने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है।


