कैमूर में अप्रैल के मध्य में ही भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है। दोपहर होते-होते तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। आसमान से बरसती आग और गर्म हवाओं (लू) ने जनजीवन को प्रभावित किया है, जिससे सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। गर्मी का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर देखा जा रहा है। दोपहर में स्कूल से छुट्टी होने के बाद उन्हें चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यक कार्यों से बाहर निकलने वाले लोग भी धूप से बचने के लिए अपने सिर को तौलिए, दुपट्टे या टोपी से ढककर चल रहे हैं। इस झुलसा देने वाली गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडे और प्राकृतिक पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। शहर के चौक-चौराहों पर स्थित ठेलों और दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। बिहार की पारंपरिक शान माने जाने वाले सत्तू के शरबत के ठेलों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ रही है। लोग इसे पेट की ठंडक और लू से बचाव का प्रभावी उपाय मान रहे हैं। इसके अलावा, गन्ने का ताजा रस और कच्चे आम का ठंडा पन्ना भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। राहगीर और दिहाड़ी मजदूर चिलचिलाती धूप से बचने के लिए पेड़ों की छांव और सार्वजनिक स्थलों पर बने शेड की तलाश करते दिख रहे हैं। मौसम विभाग और स्थानीय चिकित्सकों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने को कहा गया है। यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। कैमूर में अप्रैल के मध्य में ही भीषण गर्मी का प्रकोप शुरू हो गया है। दोपहर होते-होते तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच रहा है। आसमान से बरसती आग और गर्म हवाओं (लू) ने जनजीवन को प्रभावित किया है, जिससे सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। गर्मी का सबसे अधिक असर स्कूली बच्चों पर देखा जा रहा है। दोपहर में स्कूल से छुट्टी होने के बाद उन्हें चिलचिलाती धूप का सामना करना पड़ रहा है। आवश्यक कार्यों से बाहर निकलने वाले लोग भी धूप से बचने के लिए अपने सिर को तौलिए, दुपट्टे या टोपी से ढककर चल रहे हैं। इस झुलसा देने वाली गर्मी से राहत पाने के लिए लोग ठंडे और प्राकृतिक पेय पदार्थों का सहारा ले रहे हैं। शहर के चौक-चौराहों पर स्थित ठेलों और दुकानों पर लोगों की भारी भीड़ देखी जा रही है। बिहार की पारंपरिक शान माने जाने वाले सत्तू के शरबत के ठेलों पर सुबह से ही भीड़ उमड़ रही है। लोग इसे पेट की ठंडक और लू से बचाव का प्रभावी उपाय मान रहे हैं। इसके अलावा, गन्ने का ताजा रस और कच्चे आम का ठंडा पन्ना भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। राहगीर और दिहाड़ी मजदूर चिलचिलाती धूप से बचने के लिए पेड़ों की छांव और सार्वजनिक स्थलों पर बने शेड की तलाश करते दिख रहे हैं। मौसम विभाग और स्थानीय चिकित्सकों ने लोगों को दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने की सलाह दी है। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करने को कहा गया है। यदि मौजूदा स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ने की संभावना है, जिससे लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।


