MLA चंद्रशेखर ने महिला बिल को बताया ‘पुरुषवादी एजेंडा’:कहा-विपक्ष की एकजुटता से भाजपा के मंसूबे फेल; PWD दफ्तर की घटना पर टिप्पणी से इन्कार

MLA चंद्रशेखर ने महिला बिल को बताया ‘पुरुषवादी एजेंडा’:कहा-विपक्ष की एकजुटता से भाजपा के मंसूबे फेल; PWD दफ्तर की घटना पर टिप्पणी से इन्कार

कांग्रेस विधायक चंद्रशेखर ने महिला आरक्षण बिल को लेकर भाजपा पर निशाना साधा है। मंडी में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस बिल के बहाने अपना “पुरुषवादी एजेंडा” लागू करना चाहती थी। हालांकि, विपक्ष की एकजुटता के कारण भाजपा अपने मंसूबों में कामयाब नहीं हो पाई। चंद्रशेखर ने बताया कि महिला आरक्षण का पहला संशोधन 1996 में ही आ गया था। उस समय भाजपा ने ओबीसी को शामिल करने का मुद्दा उठाकर इसे बाधित किया था। उन्होंने जनसंख्या आधारित व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। विधायक ने कहा कि 2021 में कोरोना महामारी के कारण जनगणना नहीं हो पाई थी, जबकि देश में बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियान चला था। ऐसे में जनसंख्या के आधार पर बिल लागू करना व्यावहारिक नहीं था। जनसंख्या के आधार पर सीटें बंटने से यूपी को फायदा चंद्रशेखर ने तर्क दिया कि यदि सीटों का बंटवारा जनसंख्या के आधार पर होता, तो उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों को सर्वाधिक लाभ मिलता। वहीं, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के राज्यों को नुकसान उठाना पड़ता। इससे देश के सात राज्यों पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता था। चुनावी लाभ लेना चाहती है भाजपा विधायक चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि भाजपा का वास्तविक उद्देश्य महिला सशक्तिकरण नहीं, बल्कि चुनावी लाभ प्राप्त करना था। चार राज्यों में विधानसभा चुनावों के बीच इस बिल को संसद में लाना इसी रणनीति का हिस्सा था।उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित ढांचे में पुरुष सांसदों की संख्या अधिक बढ़ती दिख रही थी, जिससे महिलाओं को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाता। चंद्रशेखर ने कांग्रेस के योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने 74वें संविधान संशोधन के जरिए पंचायतों और नगर निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण देकर महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में पहले ही ठोस कदम उठाए थे। इसके विपरीत, भाजपा ने बिना सर्वदलीय बैठक बुलाए और विपक्ष को विश्वास में लिए बिना यह बिल पेश किया। विधायक ने कहा कि यह भाजपा की नीयत पर सवाल खड़े करता है। पीडब्ल्यूडी कार्यालय की घटना पर टिप्पणी से इन्कार धर्मपुर पीडब्ल्यूडी कार्यालय की घटना पर टिप्पणी करने से विधायक ने इन्कार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि विभाग में पहले भी अनियमितताओं के मुद्दे उठाए जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में तैनात एक अधिकारी ने लगभग 110 करोड़ रुपये की देनदारी छोड़ी थी, जिसका बोझ अब सरकार पर है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *