Manpreet Singh Hockey World Cup में भारत का 51 साल पुराना खिताबी सूखा खत्म करना चाहते हैं

Manpreet Singh Hockey World Cup में भारत का 51 साल पुराना खिताबी सूखा खत्म करना चाहते हैं

अपने संभावत: आखिरी हॉकी विश्व कप अभियान की तैयारी कर रहे अनुभवी भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने कहा कि वह इसे यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारत को 51 साल बाद पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। दो बार ओलंपिक पदक विजेता टीम के सदस्य रहे मनप्रीत चौथे विश्व कप में खेलेंगे। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत 1975 की अपनी एकमात्र खिताबी सफलता में एक और विश्व कप जीत जोड़ने की कोशिश कर रहा है।मनप्रीत ने ‘जियोस्टार’ से कहा, ‘‘यह विश्व कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि यह मेरा चौथा विश्व कप है। हमने लगातार दो ओलंपिक पदक जीते हैं लेकिन विश्व कप का पदक अब भी नहीं है। हर खिलाड़ी दोनों पदक जीतने का सपना देखता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह आखिरी विश्व कप हो सकता है इसलिए मैं इसी सोच के साथ इसमें उतर रहा हूं।मैं वह हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हूं जो हम अब तक नहीं कर सके हैं। हमें भावनात्मक रूप से संतुलित रहना होगा, अपनी भूमिकाओं पर कायम रहना होगा और अनुशासन के साथ खेलना होगा। यही हमें जीत का सबसे अच्छा मौका देगा।’’
बेल्जियम और नीदरलैंड 15 से 30 अगस्त तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे।मनप्रीत ने कहा, “टीम में खिताब जीतने के लिए अनुभव और प्रतिभा दोनों हैं। हमने अच्छी तैयारी की है और हमारा आत्मविश्वास ऊंचा है। हमने ओलंपिक पदक जीते हैं और अब विश्व कप में भी खिताब जीतने का समय है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि हम विश्व कप के फाइनल में पहुंचेंगे।टीम पूरे विश्वास के साथ खेल रही है और हर प्रशिक्षण सत्र में शत प्रतिशत दे रही है।’’
भारत को पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान के साथ रखा गया है। वह शनिवार को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। मनप्रीत ने यह भी कहा कि भारत चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान सहित अपने प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होगा।उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहे पाकिस्तान के खिलाफ खेलें या किसी अन्य टीम के, हम अपनी रणनीति पर कायम रहते हैं। हम प्रतिद्वंद्वी के नाम या उसकी प्रतिष्ठा में नहीं उलझते।’’
मनप्रीत ने कहा, ‘‘हॉकी टीम खेल है और अगर कोई एक खिलाड़ी अकेले सब कुछ करने की कोशिश करता है तो इससे टीम को नुकसान हो सकता है। हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना होगा और एक इकाई के रूप में खेलना होगा। 

अपने संभावत: आखिरी हॉकी विश्व कप अभियान की तैयारी कर रहे अनुभवी भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने कहा कि वह इसे यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारत को 51 साल बाद पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। दो बार ओलंपिक पदक विजेता टीम के सदस्य रहे मनप्रीत चौथे विश्व कप में खेलेंगे। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत 1975 की अपनी एकमात्र खिताबी सफलता में एक और विश्व कप जीत जोड़ने की कोशिश कर रहा है।

मनप्रीत ने ‘जियोस्टार’ से कहा, ‘‘यह विश्व कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि यह मेरा चौथा विश्व कप है। हमने लगातार दो ओलंपिक पदक जीते हैं लेकिन विश्व कप का पदक अब भी नहीं है। हर खिलाड़ी दोनों पदक जीतने का सपना देखता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह आखिरी विश्व कप हो सकता है इसलिए मैं इसी सोच के साथ इसमें उतर रहा हूं।

मैं वह हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हूं जो हम अब तक नहीं कर सके हैं। हमें भावनात्मक रूप से संतुलित रहना होगा, अपनी भूमिकाओं पर कायम रहना होगा और अनुशासन के साथ खेलना होगा। यही हमें जीत का सबसे अच्छा मौका देगा।’’
बेल्जियम और नीदरलैंड 15 से 30 अगस्त तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे।

मनप्रीत ने कहा, “टीम में खिताब जीतने के लिए अनुभव और प्रतिभा दोनों हैं। हमने अच्छी तैयारी की है और हमारा आत्मविश्वास ऊंचा है। हमने ओलंपिक पदक जीते हैं और अब विश्व कप में भी खिताब जीतने का समय है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे भरोसा है कि हम विश्व कप के फाइनल में पहुंचेंगे।

टीम पूरे विश्वास के साथ खेल रही है और हर प्रशिक्षण सत्र में शत प्रतिशत दे रही है।’’
भारत को पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान के साथ रखा गया है। वह शनिवार को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। मनप्रीत ने यह भी कहा कि भारत चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान सहित अपने प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहे पाकिस्तान के खिलाफ खेलें या किसी अन्य टीम के, हम अपनी रणनीति पर कायम रहते हैं। हम प्रतिद्वंद्वी के नाम या उसकी प्रतिष्ठा में नहीं उलझते।’’
मनप्रीत ने कहा, ‘‘हॉकी टीम खेल है और अगर कोई एक खिलाड़ी अकेले सब कुछ करने की कोशिश करता है तो इससे टीम को नुकसान हो सकता है। हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना होगा और एक इकाई के रूप में खेलना होगा।

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