राज्य में तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी चिह्नित 16,775 में से केवल 1,252 आंगनबाड़ी केंद्र ही सक्षम आंगनबाड़ी केंद्र के रूप में विकसित हो सके हैं। 15वें वित्त आयोग की इस योजना की मूल अवधि समाप्त हो चुकी है, लेकिन राशि लैप्स होने से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने राज्य के आग्रह पर छह महीने का अतिरिक्त विस्तार (मार्च तक) देने की सहमति दी है। पूर्व में भी इसे छह महीने का विस्तार दिया जा चुका था। ‘मिशन सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0′ के तहत इन केंद्रों को स्मार्ट और मॉडल केंद्रों के रूप में अपग्रेड किया जाना था। इस कार्य के लिए केंद्र सरकार ने झारखंड को लगभग ₹100 करोड़ उपलब्ध कराए थे, जिनमें से अब तक मात्र ₹30 करोड़ ही खर्च हो पाए हैं। विभाग द्वारा जिला स्तर पर फंड रिलीज कर भौतिक संरचना (सिविल वर्क, पेयजल और शौचालय) दुरुस्त की जा रही है। कई जिलों में भवन निर्माण व विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो चुका है, जबकि शेष में टेंडर और अपग्रेडेशन की प्रक्रिया जारी है। पोषण 2.0 के तहत टेक होम राशन (टीएचआर) के रूप में माइक्रो-न्यूट्रिएंट फोर्टिफाइड और एनर्जी डेंस फूड का वितरण जारी रखा गया है। क्यों हुई देरी : टेंडर निष्पादन में देरी, प्रशासनिक शिथिलता और विभागों के बीच सुस्त समन्वय के कारण समय पर खरीदारी और निर्माण नहीं हो सका। असर क्या : केंद्र सरकार द्वारा मार्च तक समय मिलने से ₹70 करोड़ की राशि लैप्स होने से बच जाएगी, लेकिन तय समय पर बच्चों को स्मार्ट सुविधाएं नहीं मिल पाईं। विभिन्न प्रकार के खेल सामग्रियों की खरीद भी अधूरी है। आगे क्या : महिला एवं बाल विकास विभाग आगामी मार्च तक सभी लंबित टेंडरों को पूरा कर एलईडी टीवी, खिलौने और आरओ की स्थापना करेगा। पोषण वाटिका और आरओ लगने के बाद बच्चों को स्थानीय स्तर पर स्वच्छ पानी व ताजा सब्जियां मिलेंगी। अभी क्या हो रहा मामले में झारखंड सरकार की शिथिलता समझ से परे : अन्नपूर्णा केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि राज्य सरकार की शिथिलता समझ से परे है। 100 करोड़ रुपए का फंड मिलने के बावजूद मात्र 1,252 केंद्रों का सक्षम बनना बेहद निराशाजनक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हमेशा फंड की कमी का रोना रोती है, लेकिन यह स्थिति दर्शाती है कि उसे बच्चों के भविष्य की परवाह नहीं है। यह अवधि विस्तार सिर्फ इसलिए दिया गया है ताकि राज्य तय समय में काम पूरा कर सके।

