झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच कर रही भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने तत्कालीन उत्पाद सचिव और उनके करीबी कारोबारी विनय कुमार सिंह के गठजोड़ को लेकर विशेष अदालत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी ने अदालत को बताया कि तत्कालीन उत्पाद सचिव के काले धन को सफेद करने में कारोबारी विनय सिंह ने मुख्य मददगार की भूमिका निभाई थी। एसीबी के अनुसार, पूरे मामले की गहन जांच जारी है। एसीबी ने विशेष अदालत में सुनवाई के दौरान वित्तीय आंकड़ों का ब्योरा पेश करते हुए बताया कि तत्कालीन उत्पाद सचिव ने अपने सेवाकाल के दौरान ज्ञात वैध स्रोतों से करीब 2.20 करोड़ रुपए अर्जित किए थे। इसके विपरीत, इस अवधि में उनका कुल खर्च और विभिन्न मदों में किया गया निवेश 3.47 करोड़ रुपए पाया गया। यह उनकी वैध आय से करीब 53% अधिक है। जांच एजेंसी का आरोप है कि आय से अधिक इस अवैध कमाई को वैध शक्ल देने (लेयरिंग) के लिए शेल कंपनियों, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल फर्मों का एक संजाल तैयार किया गया था, जिसका ताना-बाना विनय सिंह व उनकी कंपनियों के जरिए बुना गया था। तत्कालीन सचिव के काले धन को सफेद करने में मददगार थे विनय सिंह जांच में यह भी सामने आया कि विनय कुमार सिंह व उनकी पत्नी स्निग्धा सिंह की कंपनी मेसर्स नेक्स्टजेन सॉल्यूशन टेक्नोलॉजी ने तत्कालीन उत्पाद सचिव की पत्नी को साल 2019 से 2023 के बीच हर माह 1.50 लाख रु. का भुगतान किया। इस तरह उन्हें कुल 73 लाख रु. ट्रांसफर किए। पूछताछ के दौरान विनय सिंह ने खरीदी गई आठ चल संपत्तियों की बात तो स्वीकार की, लेकिन वैध दस्तावेज जांच एजेंसी को नहीं सौंपे हैं। एक ही दिन तीन करोड़ की निकासी, दक्षिण भारत तक जुड़े तार एसीबी द्वारा अदालत को दी गई जानकारी के अनुसार, पूछताछ में यह तथ्य भी उजागर हुआ है कि विनय सिंह और उनके परिजनों की कई विदेश यात्राओं का पूरा पैकेज तत्कालीन सचिव के साले की कंपनी द्वारा प्लान और मैनेज किया गया था। इन विदेश यात्राओं में खर्च की गई भारी-भरकम राशि के वास्तविक स्रोत की जानकारी विनय सिंह ने जांच एजेंसी से छिपा कर रखी है। इसके अलावा, अल्बर्ट एक्का चौक स्थित एक्सिस बैंक की मेन रोड शाखा में मौजूद विनय सिंह के खाते से 12 जनवरी 2023 को एक ही दिन में 3 करोड़ रुपए की बड़ी रकम की निकासी की गई थी। एसीबी ने अदालत को बताया कि झारखंड में अवैध तरीके से कमाए गए धन को दक्षिण भारत के राज्यों में खपाए जाने का प्रबल संदेह है। विनय सिंह और उनकी कंपनियों द्वारा म्यूचुअल फंड, बॉन्ड, शेयर और अचल संपत्तियों में किए गए निवेश का विस्तृत ब्योरा जुटाने के लिए तेलंगाना और तमिलनाडु सरकार को आधिकारिक पत्र भेजे गए हैं। वहीं, केस डायरी में दर्ज गवाह दीपक कुमार उर्फ भोलू के बयान के मुताबिक, तत्कालीन सचिव और नेक्स्टजेन कंपनी ने कोलकाता स्थित मेसर्स चेतन डील मार्क प्राइवेट लिमिटेड जैसी शेल कंपनियों में भी भारी निवेश किया था। समय पर चार्जशीट नहीं… डिफॉल्ट बेल पर बाहर आ गए सभी आरोपी शराब घोटाला मामले में एसीबी ने करीब डेढ़ दर्जन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। एसीबी ने 20 मई 2025 को प्राथमिकी दर्ज कर इस बड़े घोटाले की जांच शुरू की थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि केस दर्ज होने के इतने लंबे समय बाद भी आज तक एसीबी एक भी आरोपी के विरुद्ध अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल नहीं कर सकी। इसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला। सभी आरोपियों को एक-एक कर अदालत से डिफॉल्ट बेल मिलती चली गई और वर्तमान में सभी जेल से बाहर हैं। वहीं, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इस पूरे मामले में अपनी जांच काफी तेज कर दी है।

