पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। लखनऊ में अब पेट्रोल 97.53 रुपए प्रति लीटर में मिलेगा। डीजल की कीमत 90.81 रुपए प्रति लीटर हो गई है। बढ़ती हुई कीमतों को लेकर बहुत सारे लोग जागरूक नहीं थे पेट्रोल टंकी पर पहली बार जब उन्हें बढ़ती हुई कीमतों का पता चला उनका कहना था कि बार-बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने से बजट बिगड़ जाता है। ‘पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से बजट बिगड़ा’ पेट्रोल टंकी पर तेल डलवाने आई रीता ने कहा कि पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से बजट बिगड़ जाता है । तेल का दाम बढ़ने से हर चीज में समस्या हो रही है , महंगाई बढ़ रही है । महंगाई सिर्फ एक सेक्टर में नहीं है खानपान से लेकर बच्चों की पढ़ाई दवाई कपड़े सब महंगा हो रहा है। इतनी महंगाई हो चुकी है कि बजट बिल्कुल बिगड़ चुका है। बस जैसे तैसे घर खींच तान कर हम लोग चला रहे हैं। इतनी महंगाई में सेविंग बिल्कुल खत्म हो चुकी है। ‘सेविंग जीरो हुई’ रीता ने कहा कि हर दिन दाम बढ़ रहे हैं तो सेविंग कहां से होगी। दूध के दाम बढ़े , सिलेंडर के दाम बढ़े और अब पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ गए । गैस की परेशानी की वजह से घर में खाना बनना मुश्किल हो गया है लाइन लगा और समय बर्बाद करना महंगाई का सामना करना यही सब बचा है। सरकार को बढ़ती हुई महंगाई पर ध्यान देना चाहिए । गवर्नमेंट सेक्टर में नौकरी मिल नहीं रही है और प्राइवेट सेक्टर में छोटी-मोटी नौकरी से हम लोगों का घर चल पाना मुश्किल हो रहा प्राइवेट सेक्टर में जो सैलरी मिल रही है उससे बहुत मुश्किल है मैनेज कर पान। ‘A to Z सिस्टम खराब है’ कोई वैकेंसी नहीं है अच्छी एजुकेशन की व्यवस्था नहीं है सारा सिस्टम A to Z सब खराब है। सबसे अधिक एजुकेशन और मेडिकल की लाइन खराब है यही सबसे अधिक महंगी भी है। अस्पताल में जितना भी पैसा लेकर जाएं कम है। एक जांच X Ray करवाइए हजार रुपए लग जाता है । छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई में 20 से ₹40 हजार खर्च हो रहे हैं। बस जिंदगी घसीटा जा रहा है सरकार के बारे में हम लोग क्या कहें वह तो अपने में मस्त है। जनता के बारे में कोई सरकार नही सोचती कोई भी सरकार आए जनता के बारे में नहीं सोचती सब अपने लिए कर रहे हैं। पब्लिक के बारे में एक प्रतिशत भी सरकार को चिंता नहीं है। प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि ईंधन कम खर्च करो तो क्या हम लोग सड़क पर पैदल तोड़ना शुरू कर दें। जिसको 25 किलोमीटर कम करने जाना है तो वह कैसे जाएगा फिर सरकार और उनके लोगों को भी अपना आराम और सुविधा कम करना चाहिए। सरकारी कार्यक्रम और रैली में जो करोड़ों रुपए खर्च हो रहा है पहले उसको कम करना चाहिए । जब इलेक्शन आता है तब इतना खर्चा होता है क्यों नहीं सोचती सरकार। सर भोज हम लोगों पर ही क्यों डाला जा रहा।


