Lucknow Crime: बेटी की लाश लेकर चुपचाप निकल पड़े लोग, लखनऊ में खुला दर्दनाक राज

Lucknow Crime: बेटी की लाश लेकर चुपचाप निकल पड़े लोग, लखनऊ में खुला दर्दनाक राज

Lucknow Secretariat Minor Girl Death: राजधानी लखनऊ के वीआईपी इलाके गोमती नगर में एक बेहद चौंकाने वाली और रहस्यमय घटना ने पूरे शहर को हिला दिया है। सचिवालय के पास खड़ी एक इनोवा क्रिस्टा कार में 16 वर्षीय नाबालिग लड़की का शव मिलने से सनसनी फैल गई। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि एक एनजीओ संचालक और उसके सहयोगी कथित तौर पर शव को चुपचाप हरिद्वार ले जाकर अंतिम संस्कार करने की तैयारी में थे।


 Lucknow Crime: गोमती नगर में संदिग्ध मौत से सनसनी, आत्महत्या या साजिश, पुलिस हर एंगल से कर रही जांच

मृतका की पहचान पारुल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से कुशीनगर की रहने वाली थी। वह पिछले करीब दो वर्षों से लखनऊ के विशाल खंड स्थित एक एनजीओ में रहकर पढ़ाई कर रही थी। पुलिस ने जब संदिग्ध हालात में खड़ी इनोवा गाड़ी को रोका और पूछताछ शुरू की, तो मामला और भी उलझता चला गया। एनजीओ संचालक ने दावा किया कि पारुल ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है।

आधी रात पुलिस थाने पहुंची सूचना

घटना का खुलासा 28 और 29 मई की दरम्यानी रात करीब 12:30 बजे हुआ। गोमती नगर निवासी रितेश रंजन चौबे पुलिस थाने पहुंचे और अधिकारियों को सूचना दी कि उनका ड्राइवर अभिषेक सक्सेना बेहद परेशान है और उसकी नाबालिग बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। ड्राइवर अभिषेक सक्सेना, जो कुशीनगर का रहने वाला बताया जा रहा है, ने रितेश को जानकारी दी थी कि उसकी बेटी पारुल लखनऊ में एक एनजीओ हॉस्टल में रहकर पढ़ाई कर रही थी, जहां उसकी अचानक मौत हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।

सचिवालय के पास खड़ी मिली इनोवा

पुलिस ने जब एनजीओ संचालक से संपर्क किया तो कुछ ही देर बाद वह अपने सहयोगियों के साथ सचिवालय के पास खड़ी इनोवा क्रिस्टा गाड़ी के साथ सामने आया। पुलिस अधिकारियों ने जब गाड़ी की तलाशी ली तो अंदर नाबालिग लड़की पारुल का शव रखा मिला। शव को जिस तरह गाड़ी में रखा गया था, उसने पुलिस के संदेह को और गहरा कर दिया। पुलिस ने तुरंत शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया और मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ शुरू कर दी।

NGO संचालक ने सुनाई आत्महत्या की कहानी

एनजीओ संचालक ने पुलिस को बताया कि पारुल पिछले दो वर्षों से उनकी संस्था में रह रही थी और पढ़ाई कर रही थी। उनके अनुसार 28 मई की शाम रोज की तरह संस्था में पूजा-पाठ हो रहा था। जब काफी देर तक पारुल नीचे नहीं आई, तो संस्था के लोग उसे देखने ऊपर गए। बताया गया कि पारुल जिस कमरे में थी, उसका बाथरूम अंदर से बंद था। काफी देर तक आवाज देने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद दरवाजा तोड़ा गया।एनजीओ स्टाफ का दावा है कि अंदर पारुल का शव फंदे से लटका मिला। इसके बाद शव को नीचे उतारा गया और पारुल के पिता अभिषेक को सूचना दी गई। डॉ. त्रिवेदी का कहना है कि पिता से बातचीत के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए हरिद्वार ले जाया जा रहा था।

पुलिस को क्यों हो रहा शक

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि यदि लड़की ने आत्महत्या की थी, तो स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई। पुलिस सूत्रों का कहना है कि किसी भी संदिग्ध मौत या आत्महत्या की स्थिति में कानूनन पुलिस को सूचना देना और पंचनामा व पोस्टमार्टम कराना जरूरी होता है। लेकिन यहां एनजीओ संचालक और उसके लोग शव को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के सीधे हरिद्वार ले जाने की तैयारी में थे। यही बात पुलिस के शक की सबसे बड़ी वजह बन रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि पुलिस को समय पर सूचना नहीं मिलती तो संभवतः शव का अंतिम संस्कार कर दिया जाता और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य खत्म हो सकते थे।

मां की मौत के बाद NGO में रह रही थी पारुल

जांच में सामने आया है कि पारुल की मां की कोरोना काल में मौत हो गई थी। इसके बाद से वह इसी एनजीओ के हॉस्टल में रह रही थी और पढ़ाई कर रही थी। पिता अभिषेक सक्सेना कथित तौर पर एनजीओ संचालक के संपर्क में थे और संस्था से जुड़े कार्यों में भी सहयोग करते थे। अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि पारुल की मानसिक स्थिति कैसी थी और क्या वह किसी दबाव में थी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। यदि शरीर पर किसी प्रकार के संघर्ष या चोट के निशान मिलते हैं तो मामला और गंभीर हो सकता है। पुलिस कॉल डिटेल, सीसीटीवी फुटेज और एनजीओ परिसर में मौजूद लोगों से पूछताछ भी कर रही है।

NGO की भूमिका भी जांच के घेरे में

इस घटना के बाद संबंधित एनजीओ की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि संस्था में रहने वाले बच्चों की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कैसी थी। इसके अलावा यह भी जांच की जा रही है कि क्या पहले भी संस्था में किसी प्रकार की शिकायत सामने आई थी या नहीं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच बेहद गंभीरता से की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। 

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