LPG-PNG New Rules: महंगाई के झटकों के बीच राजस्थान के लाखों उपभोक्ताओं को राहत, जानें क्या हैं रसोई गैस कनेक्शन के नए नियम?

LPG-PNG New Rules: महंगाई के झटकों के बीच राजस्थान के लाखों उपभोक्ताओं को राहत, जानें क्या हैं रसोई गैस कनेक्शन के नए नियम?

राजस्थान के शहरी इलाकों में रहने वाले गैस उपभोक्ताओं के लिए केंद्र सरकार की तरफ से एक बेहद सुखद और राहत भरी बड़ी खबर आई है। दरअसल 25 मई 2026 को भारत सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण का विनियमन) संशोधन आदेश, 2026’ की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस नए संशोधन का सीधा और सबसे बड़ा फायदा राजस्थान के उन लाखों परिवारों को मिलने जा रहा है जो तेजी से बढ़ती पाइपलाइन गैस यानी पीएनजी (PNG) की तरफ शिफ्ट हो रहे हैं, लेकिन भविष्य में ट्रांसफर होने या घर बदलने के डर से अपना पुराना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करने से कतराते थे।

अब तक का नियम यह था कि यदि आपके घर में पीएनजी (पाइप वाली गैस) का कनेक्शन आ जाता था, तो सरकारी तेल कंपनियों के नियमों के मुताबिक आपको अपना पुराना एलपीजी गैस सिलेंडर और कनेक्शन सरेंडर करना पड़ता था। लेकिन केंद्र सरकार ने इस जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरी तरह बदलते हुए उपभोक्ताओं को ‘ट्रांसफर वाउचर’ (Transfer Voucher) का एक ऐसा बेहतरीन विकल्प दे दिया है, जिसने उपभोक्ताओं को यह आजादी दे दी है कि उनका गैस कनेक्शन उनके साथ-साथ देश और राज्य के किसी भी कोने में बिना किसी अड़चन के सफर कर सकेगा।

जानिए क्या कहता है नया LPG Control Order 2026?

पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी किए गए इस नए संशोधित आदेश के तहत अब पीएनजी कनेक्शन धारक उपभोक्ताओं के पास मुख्य रूप से दो बड़े और बेहद लचीले विकल्प मौजूद रहेंगे।

30 दिनों के भीतर कनेक्शन समाप्त करने की छूट: नया पीएनजी कनेक्शन मिलने के 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता यदि चाहे, तो स्वेच्छा से अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन को पूरी तरह समाप्त यानी टर्मिनेट करने के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए उस पर कोई दबाव या पेनाल्टी नहीं लगाई जाएगी।

भविष्य के लिए ‘ट्रांसफर वाउचर’ : यदि उपभोक्ता को लगता है कि उसकी नौकरी ट्रांसफरेबल है या वह भविष्य में किसी ऐसे इलाके में जा सकता है जहाँ पाइपलाइन नहीं है, तो वह गैस एजेंसी से एक विशेष ‘ट्रांसफर वाउचर’ ले सकता है। यह वाउचर इस बात की कानूनी गारंटी होगा कि भविष्य में किसी भी नॉन-पीएनजी क्षेत्र (Non-PNG Area) में जाने पर उसे बिना किसी नए झंझट या अतिरिक्त पैसे के तुरंत एलपीजी गैस सिलेंडर और रेगुलेटर वापस सौंप दिया जाएगा।

जयपुर से जैसलमेर तक, क्या और कितना होगा असर?

राजस्थान की एक भौगोलिक और सामाजिक बनावट ऐसी है जहां यह नियम एक बहुत बड़ा गेमचेंजर साबित होने वाला है। राजस्थान में एक तरफ जयपुर, जोधपुर, भिवाड़ी और कोटा जैसे मेट्रो और औद्योगिक शहर हैं जहां पीएनजी नेटवर्क तेजी से बिछ रहा है, वहीं दूसरी तरफ थार के रेगिस्तानी इलाके और सुदूर गांव हैं जहां अभी पीएनजी इंफ्रास्ट्रक्चर पहुंचने में सालों का वक्त लगेगा।

अवैध रीफिलिंग पर लगेगी लगाम !

इस ऐतिहासिक संशोधन के बाद राजस्थान के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने भी इसका स्वागत किया है। जयपुर स्थित सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि इस नियम से राज्य में घरेलू गैस सिलेंडरों की अवैध रीफिलिंग और ब्लैक मार्केटिंग पर बहुत बड़ी लगाम लगेगी।

अधिकारियों के मुताबिक, पहले जब लोग पीएनजी कनेक्शन लेते थे, तो वे अपने पुराने एलपीजी सिलेंडर को कागजों पर सरेंडर करने के बजाय अपने किसी परिचित को दे देते थे या ब्लैक में बेच देते थे। क्योंकि उन्हें डर रहता था कि अगर भविष्य में कभी दोबारा एलपीजी की जरूरत पड़ी, तो नया कनेक्शन मिलना बहुत मुश्किल और खर्चीला होगा।

अब चूंकि सरकार खुद ‘ट्रांसफर वाउचर’ की कानूनी गारंटी दे रही है, इसलिए लोग स्वेच्छा से अपने सिलेंडर को होल्ड (Hold) पर रखवा देंगे, जिससे बाजार में घरेलू गैस के अनधिकृत उपयोग में भारी कमी आएगी और असली हकदार उपभोक्ताओं को समय पर रिफिल मिल सकेगी।

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