‘तकलीफ के बारे में मत पूछिए। हमारा घर चला गया। इसके अलावा रोजी-रोटी भी चली गई। घर के सामने ही टेबल लगाकर अंडा रोल बेचते थे और परिवार का खर्च चलता था। अब तो रात में कहां सोएंगे और कहां रहेंगे यही नहीं समझ आ रहा है। बेटी ससुराल से बीमार आयी है। उसे ऑक्सीजन लगा है। कैसे उसकी देखभाल अब करेंगे। कुछ समझ नहीं आ रहा है। एक-एक पैसा जोड़कर यह मकान बनवाया था अब कैसे बनवा पाएंगे।’ ये कहना बौलिया तिराहे पर रहने वाली सरोज देवी का; सरोज की एक बेटी ऑक्सीजन पर और एक बेटी अपाहिज है। पति एक बिल्डिंग में गार्ड की नौकरी करते हैं। बौलिया तिराहे पर गुरुवार को चले अतिक्रमण अभियान में उनके भी मकान पर बुलडोजर चलाया गया। जिसमें उनके मकान का आधा हिस्सा धराशायी हो गया है। सरोज देवी के अलावा कुल 40 मकानों को आज PWD की टीम ने तोड़ा है। बता दे की जून 2025 में बौलिया तिराहे और लहरतारा मार्ग पर 100 मकानों को पीडब्ल्यूडी ने जंगल की भूमि पर कब्जा कर भवन बनाने की बात कहते हुए खाली करने की नोटिस जारी की थी। लेकिन लोगों ने इसे खाली नहीं किया था। ऐसे में गुरुवार को बड़ी कार्रवाई की गई। इस कार्रवाई से लोग सहमे हुए हैं। क्योंकि उनका कहना है कि उनसे कहा गया था कि दुकान मत लगाना नाला साफ करने की मशीन आने वाली है सुबह; और फिर मकान तोड़ दिए गए। गुरुवार की शाम जब दैनिक भास्कर की टीम बौलिया तिराह पर पहुंची तो लोग अपने घर के आगे के मलबे को सही कर रहे थे। टूटे मकानों में महिलाएं बैठीं थीं और वो ध्वस्तीकरण को गलत बता रही थीं। तो कुछ विकास को कोस रही थीं। ऐसे में दैनिक भास्कर ने यहां के लोगों से बातचीत की और उनका दर्द जाना। पढ़िए रिपोर्ट… सबसे पहले देखिये ध्वस्तीकरण की पांच तस्वीरें… जानिए उन लोगों की तकलीफ और दर्द, जिन्होंने एक-एक ईंट रखकर बनाया था मकान, आज तोड़ा गया… दसवें और तेरही की भी मोहलत नहीं दी
बौलिया के रहने वाले नंदलाल ने बताया – बीती रात हमारे घर के पास अधिकारी आये थे। बोले की कल दुकान नहीं लगाना कल नाले की सफाई होगी। हम लोग चाट का ठेला लगाते हैं। आज नहीं लगाया लेकिन सुबह 7 बजे ही मशीने आयीं और तोड़फोड़ शुरू कर दी है। हाल ही मेरे भाई की मौत हो गयी है। हम अधिकारियों में पैरों में गिर गए की साहब अभी दसवां और तेरहीं भी नहीं हुआ है समय दे दीजिये पर हमारी एक नहीं सुनी और न ही कोई मोहलत दी। जाना था दो मीटर, तोड़ दिया चार मीटर
नंदलाल ने कहा – हमारा दो मीटर नापा गया था। लेकिन हमारा मशीन लगाकर चार मीटर तोड़ दिया गया। हमें कोई मुआवजा भी नहीं दिया गया है। जबकि हम लोग यहां 150 साल से यहां रह रहे हैं। सही कहा गया है कि जिसकी लाठी उसकी भैंस। वही हो रहा है। जहां चाह रहे हैं। वहां तोड़फोड़ मचा रहे हैं। झूठ बोलकर की गयी कार्रवाई
बीए में पढ़ रही परी गुप्ता ने बताया – पीडब्ल्यूडी ने तीन दिन पहले हमें नोटिस नाला और सीवर सफाई कही थी। और सामान हटाने को कहा था पर आज झूठ बोलकर जेसीबी और मशीने लाकर घर तोड़ना शुरू कर दिया। कई लोग बाहर थे। बच्चे स्कूल गए थे। अचानक से यह सब हुआ। इसी घर में हम लोग खेले-कूदे और आज से अचानक से यह टूट गया। बहुत दर्द और तकलीफ है। घर से बेघर हो गए, बच्चे भूखे हैं
स्थानीय निवासी सुनीता देवी का भी मकान और दूकान तोड़ा गया है। उन्होंने बताया – परेशानी यही है की घर से बेघर हो गए हैं। दुकान भी चली गयी। बच्चे भी सुबह से भूखे हैं। सरकार तोड़ रही तो उसे समय और सहारा देना चाहिए। अब मोदी की सरकार नहीं बनेगी कोई उन्हें वोट नहीं देगा। क्या किसी का घर उजाड़कर विकास होता है। छोटे-छोटे बच्चे भूखे हैं। क्या खाएंगे और कहां सोने जाएंगे सरकार को मुआवजा हमारी मिल्कियत का पैसा तो देना चाहिए जो हमने बनवाया था। ठीक है उनकी जमीन है। हम ऐसी सरकार को क्यों वोट देंगे। दर्द बयान नहीं कर सकता हूं
मोनू गुप्ता ने बताया – मेरी गोलगप्पे की दूकान है। जो रोजाना सुबह खुलती है। सुबह 6 बजे सोकर उठे तो फोर्स आयी थी और बोली सीवर साफ करेंगे ठेला हटा लो। हमने हटा लिया क्योंकि उन्होंने नाले की बात कही थी । लेकिन वो लोग मशीन लेकर आये और मकानों पर तोड़फोड़ शुरू कर दी। हमारा मकान भी तोड़ दिया गया है। कितना दर्द है बता नहीं सकता हूं क्योंकि मेरा बचपन भी यहीं बीता है। न मुआवजा न मिला न मकान बचा अब कहां जाएंगे हम। सरकार ऐसी होनी चहिये जो रोजी-रोटी और घर दे न की छीने
मोनू गुप्ता ने कहा – रविंद्र जायसवाल ने कहा था कि जिसके पास कागज होगा उसे मुआवजा मिलेगा। पर वो आज आये ही नहीं। मोनू ने कहा सरकार वही होनी चाहिए जो हमें रोटी दे, घर दे। ऐसी सरकार का क्या फायदा जो हमारा घर भी ले ले और रोजी-रोटी छीन ले। हमारे पास कोई जमा पूंजी नहीं है की हम कहीं और चले जाएं। बस हमारी मांग है कि हमें मुआवजा दिया जाए ताकि हम कहीं बस सकें। एक-एक पैसा जोड़कर बनाया था मकान
बौलिया निवासी कन्हैया की पत्नी सरोज देवी ने भर्राई हुई आवाज में कहा – हम लोगों ने एक-एक पैसा जोड़कर यह घर बनाया था। एक झटके में सब टूट गया। अब तो पैसा ही नहीं है की नया मकान बनवा लें। उन्होंने कहा हम लोग रोड पर टेबल लगाकर रोल बेचकर परिवार चलाते थे। एक बच्ची है जिसे ऑक्सीजन लगी है। चिंता सता रही है की कहां जाएंगे। रात में बैठकर ही बिताना पड़ेगा समय। नगर निगम में देते हैं टैक्स फिर भी जंगल बताया
सरोजा देवी ने कहा – हमारे बैंक में एक रुपया भी नहीं है की कहीं जाकर कोई मकान खरीद लें। अचानक से पिछले साल नोटिस दी गयी की यह जमीन जंगल की जमीन है और आप इसपर अतिक्रमण करके रह रहे हैं। 150 साल से कोई नहीं आया यह कहने या बताने की आप गलत हैं। अचानक से इसे जंगल की जमीन बता दिया गया है। जबकि सभी लोग मकान का टैक्स और पानी का सीवर का टैक्स देते आ रहे हैं। कहां जाएंगे अब हम लोग। कुछ समझ में नहीं आ रहा है। अब जानिए पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह ने क्या बताया, और कितने मकानों को तोड़ा गया?… तीन बुलडोजर और एक पोकलेन मशीन को लेकर पहुंचे PWD के अधिकारियों ने सुबह 8 बजे से बौलिया तिराहे पर ध्वस्तीकरण का काम शुरू किया गया। सबसे पहले फुलवरिया फोर लें पर 15 मकानों को बारी-बारी से तोड़ा गया। इसके बाद लहरतारा चौराहे की तरफ जा रही सड़क पर बने मकानों को पोकलेन मशीन और बुलडोजर से तोड़ा गया। साल भर पहले दी गयी थी नोटिस
इस दौरान पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता केके सिंह मौके पर मौजूद रहे। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया – एक साल से हमारा यह काम रुका हुआ था। सभी को नोटिस दी जा चुकी है। इसमें कुल 100 मकानों को नोटिस दी गई है। सभी अवैध मकान हैं और अतिक्रमण है। उन्हें ही आज हटाया जा रहा है। दोनों लें मिलकर कुल 41 मकानों पर आज कार्रवाई की जा रही है। सभी मकान को आज चिह्नांकन के अनुसार ध्वस्त कर लिया जाएगा। आज एक ही दिन में सभी मकान तोड़ लिए गए हैं। सभी का मलबा जल्द ही उठवा लिया जाएगा ताकि सड़क निर्माण का कार्य तेजी से शुरू हो सके। अब जानिए नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ‘रावण’ ने क्यों लिखा था इस मामले में उत्तर प्रदेश के सीएम को लेटर… वाराणसी में बन रही 6 लेन सड़क में बौलिया तिराहे के कई मकान चिह्नित थे। जिन्हे आज तोड़ा गया है। इसमें 27 जुलाई 2025 को नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा था और कार्रवाई की जवाबदेही मांगी थी। चंद्रशेखर ने पत्र में लिखा है कि बौलिया त्रिमुहानी (लहरतारा) क्षेत्र के करीब 200 परिवार 1930-40 से वहां रह रहे हैं। इन सभी को नगर निगम द्वारा मकान नंबर आवंटित किए गए हैं और वे गृहकर, जलकर सहित तमाम नगर निगम के टैक्स सालों से नियमित रूप से जमा कर रहे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर वे वैध रूप से कर अदा कर रहे हैं, तो उनके मकानों को अतिक्रमण कैसे माना जा सकता है? बिना सूचना के तोड़फोड़ हो रही
पत्र में उन्होंने पीडब्ल्यूडी की कार्रवाई को तानाशाही पूर्ण रवैया बताया है। उनका कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना, मुआवजा या ऑप्शनल पुनर्वास के मकान और दुकानें तोड़ दी गईं, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे मानसिक तनाव में हैं। चंद्रशेखर ने सवाल किया कि अगर ये लोग सही तरीके से शासन को कर दे रहे हैं, तो इन्हें किस आधार पर अवैध करार दिया गया? संविधान के अनुच्छेद 300A का उल्लंघन
चंद्रशेखर रावण ने यह भी कहा था कि यह कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300A (जिसमें कहा गया है कि किसी भी नागरिक को उसकी संपत्ति से विधिक प्रक्रिया के बिना वंचित नहीं किया जा सकता) का सीधा उल्लंघन है। चंद्रशेखर ने इस पत्र की प्रतिलिपि उन्होंने वाराणसी कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर, जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को भी भेजी है। इस पत्र में चंद्रशेखर ने 7 पॉइंट में बताया था कि उन्हें किन मामलों में शिकायत मिली है। 1. आज़ादी से पूर्व बने घरों को अतिक्रमण मानते हुए बिना मुआवज़ा और कानूनी प्रक्रिया के खाली कराया जा रहा है। 2. पीडब्ल्यूडी विभाग रोड सीमा से बाहर जाकर कार्य कर रहा है, जो अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन है। 3. इस प्रक्रिया में एक नागरिक की मौत तक हो चुकी है। हरिकेश मिश्रा का हृदयाघात से निधन हुआ। 4. सेवा लेन निर्माण के नाम पर सीवर की लाइनें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं और घरों का गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। 5. सड़क के बीच में बिजली का खंभा दुर्घटना का कारण बना हुआ है। 6. मंदिर और स्कूल के निकट शराब की दुकानें स्थित हैं, जिससे स्थानीय महिलाओं और छात्राओं को भारी असुविधा होती है। 7. शाम होते ही नशेड़ी तत्वों का जमावड़ा रहता है, जिससे सामाजिक सुरक्षा खतरे में है। प्रकरण पर निष्पक्ष जांच की उठाई थी मांग
सांसद चंद्रशेखर ने सीएम योगी से मांग करते हुए कहा कि क्षेत्र के सभी वैध और नियमित करदाताओं को तत्काल सर्वेक्षण के माध्यम से उचित मुआवज़ा और पुनर्वास उपलब्ध कराया जाए। जिन मकानों को नगर निगम ने मान्यता दी है, उन्हें किसी भी रूप में अतिक्रमण न माना जाए। सीवर की तत्काल मरम्मत, बिजली खंभे का तबादला, और क्षेत्र की साफ- सफाई की समुचित व्यवस्था की जाए। मंदिर और स्कूल के निकट स्थित शराब की दुकानों को हटाया जाए। साथ ही इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच बैठाई जाए। यह सुनिश्चित किया जाए कि आगे कोई भी कार्रवाई मानवीय और संवैधानिक मर्यादाओं के अंदर हो। अब जानिए इस रोड के प्रोजेक्ट को; कहाँ तक और कितने की लागत से बननी है ये सड़क?…
वाराणसी की सड़कों को चौड़ा किया जा रहा है। इसी फेहरिस्त में मोहनसराय बाईपास से मुगलसराय तक 31 Km लंबी 6 लेन की रोड भी शामिल है। मोहनसराय बाईपास से बौलिया तिराहा तक यह रोड बन भी चुकी है। इसके बाद ये रोड वाराणसी शहर के अंदर दाखिल हो रही है। यहां कैंट स्टेशन, राजघाट, पड़ाव चौराहा होते हुए सड़क मुगलसराय तक जानी है। इस सड़क को बनाने के लिए स्टेट गर्वमेंट ने 197.40 करोड़ दिए हैं। बौलिया तिराहा के आगे रोड का कंस्ट्रक्शन रुक गया है। यहां सड़क आबादी के बीच से गुजर रही है, इसलिए सर्वे करने के बाद PWD ने 100 घरों पर लाल निशान लगाकर खुद ही अपने घर के कंस्ट्रक्शन तोड़ने का नोटिस लगा दिए थे। यहां समय-समय पर अनाउंसमेंट भी कराए जा रहे थे।


