Leopard Terror Residential Area : मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के उत्तर वनमंडल, बिरसा परिक्षेत्र स्थित बिरसा बस्ती में जंगल से निकलकर एक तेंदुआ पहुंच गया। इसकी जानकारी होते ही गांव में खलबली मच गई। बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठे हो गए।
उधर, सूचना मिलने के बाद परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शरणागत समेत पूरा अमला मौके पर पहुंच गया। करीब चार घंटे तक तेंदुआ बस्ती व आसपास के खेतों में मौजूद रहा। इस दौरान वह श्याम सिंह बैस के घर के पास स्थित खंडहर व दो ग्रामीणों के घर तथा मूंग के खेत में काफी देर तक रहा। ड्रोन से वन अमले ने तेंदुआ पर नजर बनाए रखी। पटाखे फोड़े और शोर मचाकर तेंदुआ को जंगल की ओर भगाया। परिक्षेत्र अधिकारी शरणागत ने बताया कि बोरखेड़ा से होकर तेंदुआ जंगल के अंदर चला गया है। दोनों घायलों के शरीर पर हल्की खरोंच आई है। स्वास्थ्य केन्द्र बिरसा में उनका उपचार कराया गया है।
जंगल से बाहर क्यों आया तेंदुआ, पानी या शिकार की तलाश
जिले की बिरसा नगर पालिका मालजखंड के बिरसा स्थित वार्ड नंबर 21 व 23 में मंगलवार की सुबह करीब 4 घंटे तक तेंदुआ चहल-कदमी करता रहा। इस दौरान तेंदुआ एक से दूसरे घर और खेत में पहुंचकर कुछ देर बैठता फिर इधर-उधर दहाड़ लगाते हुए छलांग लगा रहा था। उधर बिरसा बस्ती में तेंदुआ के आने की जानकारी लगते ही बड़ी संख्या में लोग इकट्ठे हो गए थे।
तेंदुए को लेकर अलग-अलग कयास
इन सबके बीच तेंदुआ बस्ती में कैसे पहुंचा इसको लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। कोई उसे पानी की तलाश में जंगल से बाहर आने की बात कर रहा है तो कोई शिकार की तलाश में। इन दोनों में जो भी वजह रही हो पर रहवासी इलाके में वन्यप्राणी तेंदुआ का आना दोनों के लिए ठीक नहीं है। अब उक्त क्षेत्र में वन अमले को नियमित गश्त बढ़ानी होगी। जंगल में पानी के पर्याप्त इंतजाम करने होंगे।
पास में कान्हा टाइगर रिजर्व का करीडोर
बताया जा रहा है कि इन दिनों जंगल में झिरिया व तालाब के सूखने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। यह क्षेत्र कान्हा टाइगर रिजर्व का करीडोर है। ऐसे में इधर लगातार वन्यप्राणियों का मूवमेंट बना रहता है। मूवमेंट करने वाले वन्यप्राणी भीषण गर्मी में पानी की तलाश में जंगल से बाहर आ रहे हैं।
केंदाटोला व मंडई में भी वन्यप्राणियों का मूवमेंट
बिरसा बस्ती से करीब 10 से 12 किमी के क्षेत्र में वन्यप्राणियों का मूवमेंट लगातार बना है। बीते दिवस ग्राम मड़ई और केंदाटोला में तेंदुआ के देखे जाने की बात बताई जा रही है। ग्रामीणों की माने तो रहवासी इलाके के आसपास बाघ का भी मूवमेंट रहता है। उधर परिक्षेत्र अधिकारी सौरभ शरणागत ने बताया कि जंगल में पानी के पर्याप्त इंतजाम है। जो झिरिया व तालाब सूख गए हैं, वहां टैंकर से पानी भरा जाता है। कई जगह गड्ढे में प्लास्टिक लगाकर पानी भरा जाता है ताकि वन्यप्राणियों को समस्या न हो।
क्या बोले बालाघाट DFO ?
मामले को लेकर उत्तर बालाघाट के डीएफओ रेशम सिंह धुर्वे ने बयान दिया कि, खेत से होकर तेंदुआ के बिरसा पहुंचने की जानकारी मिली है। जंगल में पानी के लिए टैंकर का इंतजाम किया गया है। ऐसे में कहीं से पानी की कमी की शिकायत सामने नहीं आ रही है। कहीं पानी की कमी न हो इसको लेकर अमला लगातार निगरानी करता है।


