रामपुर में भारत और मध्य-पूर्व के सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शनिवार को रामपुर रज़ा पुस्तकालय एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संवाद का केंद्र बना। लेबनान के राजदूत हादी जाबेर ने अपने परिवार के साथ पुस्तकालय का भ्रमण किया और यहां संरक्षित दुर्लभ पांडुलिपियों, ऐतिहासिक कलाकृतियों तथा सांस्कृतिक धरोहरों का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान राजदूत हादी जाबेर ने पुस्तकालय के निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र से मुलाकात की। दोनों के बीच मध्य-पूर्व की वर्तमान परिस्थितियों, वैश्विक घटनाक्रम, भारत-लेबनान संबंधों और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इस वार्ता में दोनों पक्षों ने भविष्य में शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को और मजबूत बनाने पर सहमति व्यक्त की। निदेशक डॉ. पुष्कर मिश्र ने राजदूत को पुस्तकालय के गौरवशाली इतिहास, यहां संरक्षित दुर्लभ अरबी एवं फारसी पांडुलिपियों, संरक्षण प्रयोगशाला की कार्यप्रणाली और डिजिटलीकरण परियोजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा पुनर्स्थापन के लिए किए जा रहे प्रयासों से भी अवगत कराया। इस अवसर पर डॉ. मिश्र ने राजदूत को पुस्तकालय द्वारा प्रकाशित अरबी पांडुलिपियों का कैटलॉग और विजन डॉक्यूमेंट भेंट किया।
राजदूत हादी जाबेर ने दरबार हॉल में आयोजित दुर्लभ कलाकृतियों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने प्रदर्शित संग्रहों को भारत और मध्य-पूर्व की साझा सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि रामपुर रज़ा पुस्तकालय केवल भारत ही नहीं, बल्कि विश्व की महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है, जो इतिहास और ज्ञान के संरक्षण में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने पुस्तकालय के समृद्ध संग्रह और संरक्षण कार्यों की सराहना की। राजदूत ने कहा कि ऐसे संस्थान देशों के बीच सांस्कृतिक रिश्तों को नई दिशा देते हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भारत और लेबनान के बीच सांस्कृतिक सहयोग और आदान-प्रदान के नए आयाम स्थापित होंगे।


