सुपौल में 31.80 करोड़ की वाशिंग पिट परियोजना का शिलान्यास:सांसद बोले- रेलवे विकास से बदलेगी कोसी की तस्वीर, डेढ़ साल में पूरा होगा काम

सुपौल में 31.80 करोड़ की वाशिंग पिट परियोजना का शिलान्यास:सांसद बोले- रेलवे विकास से बदलेगी कोसी की तस्वीर, डेढ़ साल में पूरा होगा काम

सुपौल के कोसी क्षेत्र में रेलवे विकास को नई गति देने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सुपौल जिले के ललितग्राम में रेलवे की बहुप्रतीक्षित वाशिंग पिट परियोजना का शिलान्यास सांसद दिलेश्वर कामैत और विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू की मौजूदगी में किया गया। करीब 31 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इस आधुनिक परियोजना को कोसी क्षेत्र के रेलवे इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कार्यक्रम में रेलवे के सहायक डीआरएम संजय सिंह सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। शॉल और पाग देकर जनप्रतिनिधियों का किया गया सम्मान शिलान्यास कार्यक्रम से पहले रेलवे अधिकारियों द्वारा सांसद और विधायक का पारंपरिक तरीके से शॉल एवं पाग देकर सम्मान किया गया। मंच से रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में रेलवे विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में भी खास उत्साह देखने को मिला। वर्षों से खाली पड़ी थी 70 एकड़ रेलवे भूमि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि ललितग्राम में रेलवे की लगभग 70 एकड़ जमीन वर्षों से खाली पड़ी थी। स्थानीय लोगों की लंबे समय से मांग थी कि इस जमीन पर कोई बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पहले क्षेत्र के लोगों ने उनसे इस जमीन पर रेलवे से जुड़ा विकास कार्य शुरू कराने की मांग की थी, जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को संसद और रेल मंत्रालय तक पहुंचाया। सांसद ने कहा कि जब भी उन्होंने कोसी क्षेत्र के लिए नई ट्रेनों की मांग की, तब रेलवे मंत्रालय की ओर से वाशिंग पिट की कमी को बड़ी बाधा बताया जाता था। इसके बावजूद कई ट्रेनों का विस्तार सहारसा तक कराया गया। बाद में उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर ललितग्राम में वाशिंग पिट निर्माण की मांग रखी, जिस पर मंत्रालय ने सहमति जताते हुए परियोजना को मंजूरी दे दी। आधुनिक तकनीक से लैस होगा वाशिंग पिट सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल सुपौल, बल्कि पूरे कोसी और मिथिला क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। उन्होंने बताया कि यहां आधुनिक तकनीक से लैस वाशिंग पिट बनाया जाएगा, जहां ट्रेनों की धुलाई के साथ-साथ उनके रखरखाव की भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत सीट लाइन, स्टेबल लाइन और अन्य आधुनिक रेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वाशिंग पिट शुरू होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली ट्रेनों की यहां सफाई और तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी खुलेगा। कोसी क्षेत्र के रेल इतिहास का भी किया जिक्र अपने संबोधन में सांसद ने कोसी और मिथिला क्षेत्र के पुराने रेल इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप के बाद इस इलाके की रेल व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो गई थी। इसके बाद दशकों तक कोसी क्षेत्र रेल संपर्क की गंभीर समस्या से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के कई वर्षों बाद भी कोसी और मिथिला के बीच रेल संपर्क बहाल नहीं हो पाया था। बाद में पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से इस दिशा में काम शुरू हुआ। सांसद ने वर्ष 2008 की कोसी त्रासदी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस आपदा में रेलवे ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन अब केंद्र सरकार लगातार इस क्षेत्र में रेलवे विकास को नई गति देने का काम कर रही है। युवाओं को मिलेगा रोजगार, बढ़ेगी आर्थिक गतिविधि विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू ने कहा कि ललितग्राम में वाशिंग पिट निर्माण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की दूरदर्शिता के कारण वर्षों पहले यहां रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसका लाभ अब लोगों को मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाशिंग पिट बनने से दूर-दराज की ट्रेनों का परिचालन आसान होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विधायक ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वीरपुर तक रेलवे लाइन विस्तार की योजना पर भी काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में डिग्री कॉलेज और रेलवे की शेष भूमि पर उद्योग स्थापित करने की मांग भी उठाई। डेढ़ वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत कुल तीन ट्रैक बनाए जाएंगे। इनमें एक ट्रैक पर ट्रेनों की धुलाई की जाएगी, जबकि अन्य ट्रैकों पर ट्रेनों के रखरखाव और तकनीकी जांच का कार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य को लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से कोसी क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं का विस्तार होगा और आने वाले समय में क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी। सुपौल के कोसी क्षेत्र में रेलवे विकास को नई गति देने की दिशा में बुधवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया। सुपौल जिले के ललितग्राम में रेलवे की बहुप्रतीक्षित वाशिंग पिट परियोजना का शिलान्यास सांसद दिलेश्वर कामैत और विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू की मौजूदगी में किया गया। करीब 31 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बनने वाली इस आधुनिक परियोजना को कोसी क्षेत्र के रेलवे इतिहास में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। कार्यक्रम में रेलवे के सहायक डीआरएम संजय सिंह सहित कई अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। शॉल और पाग देकर जनप्रतिनिधियों का किया गया सम्मान शिलान्यास कार्यक्रम से पहले रेलवे अधिकारियों द्वारा सांसद और विधायक का पारंपरिक तरीके से शॉल एवं पाग देकर सम्मान किया गया। मंच से रेलवे अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने क्षेत्र में रेलवे विस्तार और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम को लेकर स्थानीय लोगों में भी खास उत्साह देखने को मिला। वर्षों से खाली पड़ी थी 70 एकड़ रेलवे भूमि कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद दिलेश्वर कामैत ने कहा कि ललितग्राम में रेलवे की लगभग 70 एकड़ जमीन वर्षों से खाली पड़ी थी। स्थानीय लोगों की लंबे समय से मांग थी कि इस जमीन पर कोई बड़ा रेलवे प्रोजेक्ट शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि एक वर्ष पहले क्षेत्र के लोगों ने उनसे इस जमीन पर रेलवे से जुड़ा विकास कार्य शुरू कराने की मांग की थी, जिसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को संसद और रेल मंत्रालय तक पहुंचाया। सांसद ने कहा कि जब भी उन्होंने कोसी क्षेत्र के लिए नई ट्रेनों की मांग की, तब रेलवे मंत्रालय की ओर से वाशिंग पिट की कमी को बड़ी बाधा बताया जाता था। इसके बावजूद कई ट्रेनों का विस्तार सहारसा तक कराया गया। बाद में उन्होंने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर ललितग्राम में वाशिंग पिट निर्माण की मांग रखी, जिस पर मंत्रालय ने सहमति जताते हुए परियोजना को मंजूरी दे दी। आधुनिक तकनीक से लैस होगा वाशिंग पिट सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह परियोजना न केवल सुपौल, बल्कि पूरे कोसी और मिथिला क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक साबित होगी। उन्होंने बताया कि यहां आधुनिक तकनीक से लैस वाशिंग पिट बनाया जाएगा, जहां ट्रेनों की धुलाई के साथ-साथ उनके रखरखाव की भी सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि परियोजना के तहत सीट लाइन, स्टेबल लाइन और अन्य आधुनिक रेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी। वाशिंग पिट शुरू होने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाली ट्रेनों की यहां सफाई और तकनीकी जांच की जाएगी, जिससे नई ट्रेनों के परिचालन का रास्ता भी खुलेगा। कोसी क्षेत्र के रेल इतिहास का भी किया जिक्र अपने संबोधन में सांसद ने कोसी और मिथिला क्षेत्र के पुराने रेल इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1934 के विनाशकारी भूकंप के बाद इस इलाके की रेल व्यवस्था लगभग ध्वस्त हो गई थी। इसके बाद दशकों तक कोसी क्षेत्र रेल संपर्क की गंभीर समस्या से जूझता रहा। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के कई वर्षों बाद भी कोसी और मिथिला के बीच रेल संपर्क बहाल नहीं हो पाया था। बाद में पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रयासों से इस दिशा में काम शुरू हुआ। सांसद ने वर्ष 2008 की कोसी त्रासदी का भी जिक्र करते हुए कहा कि उस आपदा में रेलवे ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन अब केंद्र सरकार लगातार इस क्षेत्र में रेलवे विकास को नई गति देने का काम कर रही है। युवाओं को मिलेगा रोजगार, बढ़ेगी आर्थिक गतिविधि विधायक नीरज कुमार सिंह बबलू ने कहा कि ललितग्राम में वाशिंग पिट निर्माण क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि पूर्व रेल मंत्री ललित नारायण मिश्र की दूरदर्शिता के कारण वर्षों पहले यहां रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहित की गई थी, जिसका लाभ अब लोगों को मिलने जा रहा है। उन्होंने कहा कि वाशिंग पिट बनने से दूर-दराज की ट्रेनों का परिचालन आसान होगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। विधायक ने यह भी कहा कि आने वाले दिनों में वीरपुर तक रेलवे लाइन विस्तार की योजना पर भी काम किया जाएगा। साथ ही उन्होंने क्षेत्र में डिग्री कॉलेज और रेलवे की शेष भूमि पर उद्योग स्थापित करने की मांग भी उठाई। डेढ़ वर्ष में पूरा होगा निर्माण कार्य रेलवे अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत कुल तीन ट्रैक बनाए जाएंगे। इनमें एक ट्रैक पर ट्रेनों की धुलाई की जाएगी, जबकि अन्य ट्रैकों पर ट्रेनों के रखरखाव और तकनीकी जांच का कार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार निर्माण कार्य को लगभग डेढ़ वर्ष के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इस परियोजना के शुरू होने से कोसी क्षेत्र में रेलवे सुविधाओं का विस्तार होगा और आने वाले समय में क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलेगी।  

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