लखनऊ के राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बिरजू महाराज कथक संस्थान द्वारा ‘कथक संध्या’ श्रृंखला के तहत ‘युगल नृत्यांजलि’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस सुरमयी शाम में युवा कलाकारों की जोड़ीदार प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। मंच पर ताल, लय और भावों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिससे पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति गोविंद चौधरी और रोशनी प्रसाद ने दी। उन्होंने ‘नमामी शमीशाम’ स्तुति के माध्यम से भगवान शिव को समर्पित भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया। इसके बाद 15 मात्रा की पंचम सवारी ताल में अपने तकनीकी कौशल का प्रदर्शन कर दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। उनकी प्रस्तुति का समापन ‘श्री राधे रानी’ के साथ हुआ, जिसमें राधा-कृष्ण के प्रेम भाव को सुंदर ढंग से दर्शाया गया। दोनों कलाकारों ने शानदार नृत्य पेश किया अगली प्रस्तुति अंजुल बाजपेयी और पीयूष पांडेय ने दी। उन्होंने ‘डमरू हरकर बाजे’ रचना से शिव आराधना प्रस्तुत की। तीनताल पर आधारित शुद्ध कथक नृत्य में दोनों कलाकारों के तालमेल और लयकारी ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। ‘बादल गरज नवघोर’ रचना में उनकी भावाभिव्यक्ति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। ईशा रतन और मीशा रतन की युगल प्रस्तुति ने भी सभागार में भावपूर्ण माहौल निर्मित किया। रुद्राष्टकम से शुरुआत करते हुए दोनों कलाकारों ने पारंपरिक कथक की सुंदर छटा बिखेरी। ‘बादल रे अरज गरज’ बंदिश पर उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस दौरान तबले पर राजीव शुक्ला, सारंगी पर मनीष और हारमोनियम व गायन में आरिफ ने संगत दी। मंच पर सामंजस्य, संवाद और तालमेल का प्रस्तुत किया इस कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि सभी प्रस्तुतियां लखनऊ के युवा और उभरते कलाकारों द्वारा दी गईं। युगल नृत्य की अवधारणा ने मंच पर सामंजस्य, संवाद और तालमेल का ऐसा अनूठा दृश्य प्रस्तुत किया, कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य संजय सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। संस्थान की अध्यक्ष डॉ. कुमकुम धर, उपाध्यक्ष डॉ. मिथिलेश तिवारी और सदस्य सुरभि सिंह ने हिस्सा लिया।


