पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत की दिशा में कानपुर मेट्रो ने बड़ा कदम उठाया है। कानपुर सेंट्रल से नौबस्ता के बीच बन रहे नए मेट्रो स्टेशनों को इस तरह डिजाइन किया गया है कि दिन के समय प्लेटफॉर्म और कॉन्कोर्स एरिया में बिजली की जरूरत बेहद कम पड़ेगी। प्राकृतिक रोशनी और वेंटिलेशन पर आधारित यह मॉडल बिजली की खपत घटाने के साथ कार्बन उत्सर्जन कम करने में भी मदद करेगा। बिना पिलर की छत से पहुंचेगी प्राकृतिक रोशनी बारादेवी से नौबस्ता के बीच बनाए जा रहे पांच नए एलिवेटेड स्टेशनों में प्री-इंजीनियर्ड बिल्डिंग (पीईबी) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक की मदद से प्लेटफॉर्म की छत बिना किसी बीच के खंभे के बड़े हिस्से को कवर कर रही है। छत में विशेष ट्रांसलूसेंट शीट लगाई गई हैं, जिनसे सूरज की रोशनी सीधे प्लेटफॉर्म तक पहुंचेगी। इससे दिन के समय कृत्रिम रोशनी की आवश्यकता काफी कम हो जाएगी और बिजली की बचत होगी। हवादार डिजाइन से घटेगा कार्बन उत्सर्जन मेट्रो अधिकारियों के अनुसार स्टेशनों के कॉन्कोर्स एरिया को भी खुला और हवादार बनाया गया है। खिड़कियों और जालीदार संरचनाओं का अधिक उपयोग कर प्राकृतिक हवा और प्रकाश को प्राथमिकता दी गई है। इससे एयर कंडीशनिंग और अन्य ऊर्जा संसाधनों पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा। मेट्रो कॉरिडोर के नीचे विकसित हुई ग्रीन बेल्ट हरियाली बढ़ाने के उद्देश्य से बारादेवी से नौबस्ता सेक्शन के नीचे करीब 1200 वर्ग मीटर क्षेत्र में ग्रीन बेल्ट विकसित की गई है। इसके अलावा मेट्रो डिपो और कॉरिडोर के आसपास अब तक लगभग 35 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में हरित आवरण तैयार किया जा चुका है। इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि धूल और प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी। बारिश का पानी सीधे पहुंचेगा पौधों तक कानपुर मेट्रो ने जल संरक्षण के लिए भी विशेष व्यवस्था की है। मेट्रो ट्रैक के पुल पर गिरने वाले वर्षा जल को पाइपलाइन के माध्यम से नीचे सड़क के बीच बने हरित क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा। इससे पौधों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी की आवश्यकता कम होगी और वर्षा जल का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। ब्रेक से बनेगी बिजली, सेंसर से चलेगा एसी मेट्रो प्रणाली में कई आधुनिक ऊर्जा संरक्षण तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। ट्रेनों और लिफ्टों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे ब्रेक लगाने के दौरान उत्पन्न ऊर्जा दोबारा बिजली में परिवर्तित हो जाती है। वहीं कोचों में कार्बन डाइऑक्साइड सेंसर आधारित एसी सिस्टम लगाया गया है, जो यात्रियों की संख्या के अनुसार कूलिंग नियंत्रित करता है। इससे 12 से 16 प्रतिशत तक बिजली की बचत होती है। सोलर ऊर्जा और जीरो डिस्चार्ज सिस्टम गुरुदेव चौराहा स्थित मेट्रो डिपो में एक मेगावाट क्षमता का सोलर प्लांट स्थापित किया गया है। साथ ही डिपो में उपयोग होने वाले पानी को पूरी तरह रीसायकल कर दोबारा इस्तेमाल किया जाता है। इस व्यवस्था के तहत बाहर कोई अपशिष्ट जल नहीं छोड़ा जाता, जिससे यह जीरो डिस्चार्ज मॉडल पर संचालित हो रहा है। ‘प्लेटिनम रेटिंग’ से सम्मानित हुई मेट्रो कानपुर मेट्रो के पर्यावरण अनुकूल प्रयासों को देखते हुए इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल ने सभी संचालित स्टेशनों को सर्वोच्च ‘प्लेटिनम रेटिंग’ प्रदान की है। यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक ने बताया कि मेट्रो पहले से ही शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली सार्वजनिक परिवहन प्रणाली है। नए स्टेशन ऊर्जा संरक्षण, आधुनिक डिजाइन और पर्यावरणीय संतुलन के लिहाज से शहर के लिए एक नई मिसाल बनेंगे।


