जोधपुर की FIR से खुला अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क, 36 हजार भारतीय सिम कंबोडिया में सक्रिय, देशभर में ठगी

जोधपुर की FIR से खुला अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क, 36 हजार भारतीय सिम कंबोडिया में सक्रिय, देशभर में ठगी

जोधपुर। जोधपुर से शुरू हुई एक साइबर अपराध जांच ने अंतरराष्ट्रीय ठगी नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। तीन दिन पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी और जांच में सामने आया है कि भारत में फर्जी तरीके से सक्रिय किए गए करीब 36 हजार मोबाइल सिम कार्ड कंबोडिया में संचालित हो रहे थे। इनमें से 5300 से अधिक सिम कार्ड देशभर में साइबर ठगी के मामलों में इस्तेमाल हुए और इनके जरिए सैकड़ों करोड़ रुपए की धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।

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ईडी ने 5 जून को राजस्थान के जोधपुर, किशनगढ़, नागौर और पंजाब में सात ठिकानों पर छापेमारी कर इस नेटवर्क से जुड़े कई अहम सबूत जुटाए हैं। जांच की शुरुआत जोधपुर साइबर पुलिस थाने में दर्ज एक एफआईआर से हुई थी, जिसमें कुछ सिम विक्रेताओं पर मोबाइल कनेक्शनों के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।

सिम पोर्ट कराने व नए कनेक्शन के बहाने एक्टिव की सिमें

ईडी के अनुसार करीब 2.3 लाख मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया। जांच में पता चला कि एयरटेल, जियो और वीआई के अधिकृत प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) संचालकों ने लोगों को सिम पोर्ट कराने या नया कनेक्शन देने के बहाने उनकी जानकारी के बिना अतिरिक्त सिम कार्ड भी सक्रिय कर दिए। इन सिम कार्डों को प्रति सिम कमीशन लेकर विदेशी नेटवर्क तक पहुंचाया गया।

भारतीय नम्बर से कॉल इसलिए संदेह नहीं

इन सिम कार्डों को पहले मलेशियाई नागरिकों तक पहुंचाया गया और बाद में इनका संचालन कंबोडिया से किया गया। इन्हीं भारतीय नंबरों का उपयोग व्हाट्सएप कॉल, डिजिटल निवेश योजनाओं, ऑनलाइन ठगी और अन्य साइबर अपराधों में किया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि ठगी करने वाले विदेश में बैठे थे, लेकिन उनके पास भारतीय मोबाइल नंबर होने के कारण पीड़ितों को संदेह नहीं होता था।

ईडी ने जांच में राहुल कुमार झा, मोहम्मद शरीफ, संदीप भट्ट समेत कई सिम विक्रेताओं की भूमिका सामने आने का दावा किया है। इन सिम कार्डों के जरिए निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर लोगों को फंसाया गया और उनसे बड़ी रकम ऐंठी गई। तेलंगाना में एक पीड़ित से करीब 89 लाख रुपए की ठगी का मामला भी इसी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है।

30 संदिग्ध बैंक खाते मिले

जांच के दौरान करीब 30 बैंक खातों की पहचान की गई है। आरोपियों से जुड़ी चल-अचल संपत्तियों का भी पता लगाया गया है। ईडी अब धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलू की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि साइबर ठगी से अर्जित रकम किन माध्यमों से देश और विदेश में पहुंचाई गई।

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