झारखंड राज्य सभा चुनाव: दूसरी सीट पर फंसा पेंच, महागठबंधन-भाजपा ने झोंकी ताकत

झारखंड राज्य सभा चुनाव: दूसरी सीट पर फंसा पेंच, महागठबंधन-भाजपा ने झोंकी ताकत

झारखंड में राज्य सभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव की अधिसूचना सोमवार को जारी कर दी गई है। पहले दिन किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन पत्र नहीं खरीदा। आज नामांकन का दूसरा दिन है। इन दोनों सीटों के लिए 1 जून से 8 जून तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे। इसके बाद 18 जून को मतदान और मतगणना होगी। ये दोनों सीटें शिबू सोरेन के निधन और दीपक प्रकाश का कार्यकाल पूरा होने के बाद खाली हुई हैं। हालांकि, दोनों प्रमुख गठबंधनों की ओर से उम्मीदवारों के नाम को लेकर अभी भी सस्पेंस बना हुआ है। इस बीच सोमवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बीच फोन पर बातचीत होने की सूचना है। वहीं, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से इस मुद्दे पर मुलाकात की है।

प्रत्याशियों को लेकर सस्पेंस बरकरार

महागठबंधन की ओर से पहली सीट के लिए झामुमो आज अपने प्रत्याशी के नाम की घोषणा कर सकता है, जबकि दूसरी सीट के लिए नाम की घोषणा एक-दो दिन में किए जाने की संभावना है। झामुमो शिबू सोरेन के निधन से खाली हुई सीट पर अपना प्रत्याशी उतार सकता है, जबकि कांग्रेस बीजेपी कोटे से खाली हुई दीपक प्रकाश की सीट पर अपना उम्मीदवार उतार सकती है।

इधर, बीजेपी आवश्यक बहुमत होने के बावजूद अपनी सीट को सुरक्षित रखने की रणनीति में जुटी है। ऐसे में सभी की नजर दूसरी सीट पर टिकी है, जिस पर महागठबंधन की ओर से किसे उम्मीदवार बनाया जाता है। सूत्रों के अनुसार, इस पर स्थिति एक-दो दिन में स्पष्ट हो सकती है। कांग्रेस लगातार दूसरी सीट अपने खाते में लेने की कोशिश कर रही है।

झारखंड में सियासी हलचल तेज

कांग्रेस को उम्मीद है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पर जल्द ही अंतिम फैसला ले सकते हैं। प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू ने इस मुद्दे को लेकर हेमंत सोरेन से बातचीत की है। इसके बाद सोमवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की भी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से फोन पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने दूसरी सीट पर जीत की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया।

सूत्रों के अनुसार, यदि झामुमो सोरेन परिवार से किसी को राज्यसभा भेजने का निर्णय लेता है तो मुख्यमंत्री की बहन अंजनी सोरेन का नाम सबसे आगे माना जा रहा है। वहीं, यदि परिवार से बाहर किसी उम्मीदवार को मौका दिया जाता है तो महासचिव विनोद पांडेय मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं।

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