Benjamin Netanyahu News: इजरायल की सियासत में चुनावी मुकाबला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता बचाने की कोशिशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी चुनावी वापसी का श्रेय अपने समर्थन को दिया है। हालांकि, मतगणना के शुरुआती आंकड़े किसी स्पष्ट जीत की गारंटी नहीं देते। एक तरफ नेतन्याहू मजबूत दक्षिणपंथी सरकार बनाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्षी खेमे की चुनौती ने सत्ता की राह मुश्किल बना दी है।
Israel Election 2026: मतगणना में कांटे की टक्कर, सत्ता का फैसला अभी बाकी
इजरायल के आम चुनाव में मतगणना जारी रहने के बीच सत्ता की तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है। सुबह 7:43 बजे स्थानीय समय तक 55.4 प्रतिशत मतों की गिनती के आधार पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाले गठबंधन को 55 सीटें मिलने का अनुमान था। वहीं, गादी आइज़ेनकोट के येशर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन के खाते में 49 सीटें जाती दिख रही थीं। संयुक्त अरब सूची को 12 और राम पार्टी को चार सीटें मिलने का अनुमान जताया गया।
ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं। सैनिकों समेत कुछ मतदाताओं के मत, जो दोहरे लिफाफों में डाले गए हैं, बाद में गिने जाते हैं। ऐसे में अंतिम नतीजों में बदलाव की संभावना बनी हुई है।
Donald Trump Endorsement: ट्रंप ने अपने समर्थन को बताया गेमचेंजर
चुनावी मुकाबला बेहद करीबी होने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के बेहतर प्रदर्शन का श्रेय अपने समर्थन को दिया। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर इरविंग सी. श्वार्ट्ज की टिप्पणी साझा की। इसमें दावा किया गया था कि ट्रंप के समर्थन के बाद नेतन्याहू की चुनावी स्थिति में सुधार आया और संभावित हार का मुकाबला अब बराबरी की टक्कर या जीत की संभावना में बदल गया।
इससे पहले टेक्सास में एक रैली के बाद पत्रकारों से बातचीत में भी ट्रंप ने कहा था कि शुरुआती चुनावी संकेतों के मुताबिक नेतन्याहू अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके अनुसार, समर्थन की सार्वजनिक घोषणा से प्रधानमंत्री को काफी फायदा मिला।
हालांकि, चुनावी नतीजों और किसी नेता के समर्थन के बीच सीधा संबंध साबित करना आसान नहीं होता। मतदाताओं के फैसले पर सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, नेतृत्व और सरकार के कामकाज जैसे कई मुद्दों का असर पड़ता है।
नेतन्याहू का जोर, अरब दलों के सहारे नहीं बनेगी सरकार
नेतन्याहू ने दावा किया कि यहूदी मतदाताओं और यहूदी राष्ट्र के समर्थकों के बीच दक्षिणपंथी खेमे को महत्वपूर्ण बढ़त हासिल है। उन्होंने एक मजबूत राष्ट्रीय दक्षिणपंथी सरकार बनाने की अपील की।
इजरायली मीडिया के अनुसार, नेतन्याहू ने ऐसी सरकार बनाने का विरोध किया जो अरब पार्टियों के समर्थन पर निर्भर हो। उन्होंने कुछ अरब दलों पर इजरायल की राष्ट्रीय विचारधारा के विरोध में खड़े होने के आरोप लगाए। हालांकि, ये नेतन्याहू के राजनीतिक आरोप हैं, जिन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।
7 अक्टूबर के हमले के बाद पहला आम चुनाव
यह चुनाव 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमले के बाद इजरायल का पहला आम चुनाव है। इसलिए इसका महत्व केवल सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। राष्ट्रीय सुरक्षा, हमले के लिए जवाबदेही, राजनीतिक नेतृत्व और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे भी मतदाताओं के सामने हैं।
करीब 19 वर्षों से इजरायल की सत्ता के केंद्र में रहे नेतन्याहू को इस बार पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट और उनकी येशर पार्टी से कड़ी चुनौती मिली। मतदान से पहले कई जनमत सर्वेक्षणों में विपक्षी खेमे की स्थिति मजबूत दिखाई गई थी।
अब सबकी निगाहें अंतिम नतीजों पर टिकी हैं। ट्रंप का समर्थन नेतन्याहू के लिए राजनीतिक बढ़त का दावा जरूर बन गया है, लेकिन सरकार बनाने की असली परीक्षा सीटों के अंतिम आंकड़े और गठबंधन के समीकरण तय करेंगे।

