ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद देश में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। फरवरी के अंत में हुए हमले के बाद से ईरान और उसके विरोधियों के बीच संघर्ष और तेज हो गया है। इस बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि खामेनेई का अंतिम संस्कार अभी तक क्यों नहीं हो पाया है। न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार ईरानी अधिकारी डरे हुए है और इसी के चलते अली खामेनेई की मौत के कई हफ्तों बाद भी उनकी दफन प्रक्रिया को लेकर फैसला नहीं हो पाया हैं। इसका बड़ा कारण कारण सुरक्षा और राजनीतिक जोखिम बताया जा रहा है।
अमेरिका और इजरायल के हलमों का डर
ईरानी अधिकारियों को डर है कि अगर बड़े स्तर पर सार्वजनिक अंतिम संस्कार आयोजित किया गया तो यह हमला या अशांति का कारण बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों का खतरा अभी भी बना हुआ है, जिससे किसी भी बड़े जनसमूह को निशाना बनाया जा सकता है। फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के विश्लेषक बेनहम तालेब्लू ने कहा कि सीधे शब्दों में कहें तो सरकार इतनी डरी हुई और कमजोर है कि कोई जोखिम नहीं लेना चाहती है। यह बयान दर्शाता है कि वर्तमान हालात में ईरान की सत्ता व्यवस्था खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है।
रुहोल्लाह खोमेनेई के अंतिम संस्कार में उमड़ा था जन सैलाब
खामेनेई के अंतिम संस्कार में हो रही देरी की तुलना 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमेनेई के अंतिम संस्कार से की जा रही है। उस समय लाखों लोग तेहरान की सड़कों पर उमड़े थे और एक विशाल जनसमूह ने श्रद्धांजलि दी थी। हालांकि इस बार इस तरह का जनसमर्थन या भीड़ देखने की कोई उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हवाई हमलों और आंतरिक अस्थिरता के कारण जनता खुलकर सामने नहीं आ पा रही है। साथ ही सरकार को यह भी डर है कि अंतिम संस्कार के दौरान विरोध प्रदर्शन या असंतोष भी भड़क सकता है।
मशहद शहर में हो सकता है अंतिम संस्कार
खामेनेई के दफन के लिए मशहद शहर को संभावित स्थान के रूप में देखा जा रहा है। यह शहर उनका जन्मस्थान है और यहां स्थित इमाम रजा दरगाह धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों का मानना है कि इस स्थान पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू करना आसान होगा। योजना है कि दरगाह के पास ही उन्हें दफन किया जाए, जहां पहले से ही सुरक्षा तंत्र मजबूत है और भीड़ को नियंत्रित किया जा सकता है।
युद्धविराम की कमजोर स्थिति भी बनी वजह
खामेनेई की मौत के बाद ईरानी सरकार ने मार्च की शुरुआत में तीन दिन का राज्य स्तरीय अंतिम संस्कार आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन अमेरिका और इजरायल के बढ़ते हमलों के कारण इसे रद्द कर दिया गया। बाद में अधिकारियों ने कहा कि भारी भीड़ की संभावना के चलते भी फैसला टाला गया। इस बीच 8 अप्रैल को हुआ अस्थायी युद्धविराम भी कमजोर स्थिति में है और इसके समाप्त होने की आशंका बनी हुई है, जिससे अंतिम संस्कार की तारीख तय करना और मुश्किल हो गया है।


