US Iran conflict 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि ईरान स्टेट ऑफ कोलैप्स यानी गंभीर संकट की स्थिति में है और उसने अमेरिका से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अपील की है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करते हुए लिखा कि ईरान ने हमें बताया है कि वह संकट की स्थिति में है। वे चाहते हैं कि हम जल्द से जल्द होर्मुज जलडमरूमध्य खोलें, ताकि वे अपने नेतृत्व से जुड़े हालात को समझ सकें। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान इस समय नेतृत्व संकट से गुजर रहा है।
ईरान ने किया पलटवार
ईरान ने पलटवार करते हुए कहा कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दवाब नहीं सहेंगे। ईरानी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका अब उस स्थिति में नहीं रहा कि वह दूसरे देशों को बताए कि उन्हें क्या करना चाहिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव
बता दें कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच होर्मुज में तनाव लगातार बरकरार है। पाकिस्तान में पहले दौर की वार्ता विफल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज में नाकेबंदी कर दी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच और तनाव बढ़ गया।
दरअसल, यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है और इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हलचल देखी जा रही है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका इस बात के लिए तैयार नहीं हैं कि केवल होर्मुज के मुद्दे को अलग से सुलझाया जाए, जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी स्पष्ट समझौता न हो जाए।
कतर ने दी चेतावनी
कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि यदि स्थायी समाधान नहीं निकला तो यह संघर्ष फ्रोजन कॉन्फ्लिक्ट यानी जमे हुए संघर्ष में बदल सकता है, जो समय-समय पर फिर भड़क सकता है। कतर के प्रवक्ता ने कहा कि हम नहीं चाहते कि क्षेत्र में फिर से लड़ाई शुरू हो या यह संघर्ष राजनीतिक कारणों से बार-बार भड़कता रहे।
ईरान के प्रस्ताव पर किया जा रहा विचार
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता के अनुसार, ईरान के नए प्रस्ताव पर विचार किया जा रहा है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका तक पहुंचाया गया, जिसमें होर्मुज और परमाणु मुद्दे दोनों पर सहमत शामिल हैं।
हालांकि, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि प्रस्ताव पहले से बेहतर है, लेकिन इसके भरोसेमंद पर सवाल बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होगा कि ईरान परमाणु हथियार की ओर तेजी से न बढ़ सके।
वहीं पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बावजूद अमेरिका-ईरान वार्ता का अगला दौर अभी तय नहीं हो पाया है। वहीं ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी समझौते से पहले अमेरिका और इजरायल से भविष्य में हमले न होने की गारंटी चाहता है।


