इंटरव्यू-केवाईसी के बहाने आंखें स्कैन कर रहे साइबर ठग:राजस्थान में करोड़ों लोगों के आधार नंबर निशाने पर, जानिए-कैसे AI से बदल रहे डिटेल

इंटरव्यू-केवाईसी के बहाने आंखें स्कैन कर रहे साइबर ठग:राजस्थान में करोड़ों लोगों के आधार नंबर निशाने पर, जानिए-कैसे AI से बदल रहे डिटेल

साइबर ठगों की नई चाल सामने आई है, जो बेहद चौंकाने वाली है। नौकरी के इंटरव्यू और ई-केवाईसी के बहाने आंखों की पुतलियों को स्कैन कर लेते हैं। फिर AI का इस्तेमाल वीडियो तैयार करते हैं। इससे आधार कार्ड में मोबाइल नंबर बदल देते हैं। देखने में ये मामूली बात लगती है। लेकिन इससे लोगों के आधार कार्ड से छेड़छाड़ और साइबर ठगी का खतरा मंडरा रहा है। अगर एक बार साइबर ठग आधार का मोबाइल नंबर बदलने में कामयाब हुए तो उससे जुड़े सभी OTP अपराधियों को मिलने लगेंगे। उस आधार नंबर से जुड़े सभी बैंक खातों पर भी ठगों का कंट्रोल हो जाएगा। हाल ही कई शिकायतें सामने आने के बाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एडवाइजरी जारी की है। भास्कर टीम ने साइबर पुलिस के अफसरों, साइबर एक्सपर्ट से बात कर ठगी के इस नए तरीके को जाना कि आखिर कैसे आम नागरिकों के आधार नंबरों में सेंधमारी हो रही है? इससे बचना है तो क्या करना होगा? पढ़िए संडे बिग स्टोरी में… सबसे पहले इस मामले से समझिए कैसे हो रही है ठगी इंटरव्यू के बहाने चुराई जानकारी, फिर किया आधार पर कब्जा जयपुर की रहने वाली 28 साल की लड़की को एक निजी कंपनी में नौकरी के नाम पर ऑनलाइन इंटरव्यू का लिंक भेजा गया। इंटरव्यू वीडियो कॉल पर हुआ, जहां शुरुआत में सामान्य सवाल पूछे गए। इसके बाद इंटरव्यू लेने वाले व्यक्ति ने कहा कि कंपनी में चयन प्रक्रिया के लिए ‘फेस वेरिफिकेशन’ जरूरी है। युवती से कैमरे के सामने अलग-अलग एंगल में चेहरा घुमाने, आंखें झपकाने और कुछ सेकंड तक स्क्रीन की तरफ देखने को कहा गया। इंटरव्यू खत्म होने के बाद युवती को कोई जवाब नहीं मिला। कुछ दिनों बाद उसके मोबाइल पर e-KYC और डिजिटल वॉलेट एक्टिवेशन से जुड़े मैसेज आने लगे। युवती ने साइबर पुलिस से संपर्क किया। जांच की गई तो सामने आया कि उसके नाम से फर्जी डिजिटल अकाउंट खोलने की कोशिश की गई थी। साइबर एक्सपर्ट्स को आशंका है कि इंटरव्यू के दौरान रिकॉर्ड किए गए फेस डेटा और वीडियो का इस्तेमाल AI आधारित फेस क्लोनिंग या Deepfake मॉडल तैयार करने में किया गया। जिससे कि आधार कार्ड में छेड़छाड़ कर उसमें मनचाहे बदलाव किए जा सकें। आपके आधार कार्ड को कैसे निशाना बना सकते हैं साइबर अपराधी? अपराधी सबसे पहले व्यक्ति का आधार नंबर, फोटो, मोबाइल नंबर और दूसरी निजी जानकारियां जुटाते हैं। ये जानकारियां सोशल मीडिया, डेटा लीक करने वाली वेबसाइट, फर्जी KYC कॉल कर, फर्जी इंटरव्यू के जरिए हासिल कर लेते हैं। कई लोग खुद ही फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अपनी फोटो, वीडियो, मोबाइल नंबर और निजी जानकारी सार्वजनिक कर देते हैं। आधार नंबर और उस यूजर की असली फोटो मिलते ही साइबर ठगों का काम आसान हो जाता है। आधार में मोबाइल नंबर या फोटो अपडेट करवाने काम कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर ही संभव है। CSC (कॉमन सर्विस सेंटर) असल में सरकारी अधिकृत सिस्टम हैं, जिनका उपयोग आधार अपडेट जैसी वैध सेवाओं के लिए किया जाता है। लेकिन साइबर क्राइम ब्रांच की पड़ताल में सामने आया कि कई साइबर ठग और उनके सहयोगी कॉमन सर्विस सेंटर हासिल कर लेते हैं, जहां इस काम को अंजाम देते हैं। वहीं, कई जगह कॉमन सर्विस सेंटर संचालकों के से मिलीभगत कर आधार में नंबर बदलने का खेल चल रहा है। साइबर एक्सपर्ट्स केशव के मुताबिक कई बार अपराधी असली CSC संचालक बनकर नहीं, बल्कि चोरी किए गए लॉगिन, फर्जी एजेंट नेटवर्क या अंदरूनी मिलीभगत के जरिए सिस्टम तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। इसलिए सरकार समय-समय पर CSC और आधार अपडेट सिस्टम की मॉनिटरिंग और ऑडिट भी करती रहती है। अब एक उदाहरण से समझते हैं ये पूरा खेल कैसे होता है? नॉर्मल प्रोसेस : आधार में मोबाइल नंबर अपडेट करने के लिए यूजर को आमतौर पर नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर जाना होता है। वहां उनसे आधार नंबर लिया जाता है। सेंटर का अधिकृत ऑपरेटर अपने सिस्टम में लॉगिन करता है। इसके लिए उसे किसी भी ओटीपी की जरूरत नहीं होती। अब ऑपरेटर आपका बायोमीट्रिक सत्यापन दो तरीके से करता है, आंखों या फिर फिंगर प्रिंट से। आइरिस स्कैन यानी आंखों को स्कैन के लिए ऑपरेटर पलक झपकाने को भी कहता है। इस दौरान सिस्टम में लगा कैमरा यूजर की लाइव मौजूदगी को उसकी आंखों की स्कैनिंग से तय करता है। ऑथेंटिफिकेशन पूरा होने के बाद नया मोबाइल नंबर एड हो जाता है। अब साइबर ठग क्या करते हैं नंबर बदलते ही शुरू होता है असली खेल एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी AI आधारित डीपफेक वीडियो तैयार कर रहे हैं, जिनमें आंखों की हरकत और चेहरे के भाव इतने असली लगते हैं कि कई फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम उन्हें असली व्यक्ति मान लेते हैं। यदि अपराधी किसी व्यक्ति के आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने में सफल हो जाएं तो वे उसके OTP, बैंकिंग सिस्टम, DigiLocker और e-KYC तक पर नियंत्रण हासिल कर सकते हैं। इसका सीधा सा मतलब ये है कि साइबर ठग उन आधर नंबरों से यूजर की मेल आईडी, बैंक अकाउंट, गूगल पे-फोन पे जैसी यूपीआई आईडी, डीजी लॉकर, ई-केवाईसी जैसी सारी डिजिटल सेवाओं का एक्सेस ले लेते हैं। फिर मनमाने तरीके से बैंक खातों में साइबर ठगी का पैसा इधर-उधर करते हैं। असली यूजर को इसका पता तक नहीं चल पाता। फर्जी आधार तैयार करने वाला रैकेट पकड़ा 17 अप्रैल 2026 को राजस्थान ATS और हनुमानगढ़ पुलिस ने भादरा कस्बे में एक अवैध आधार एनरोलमेंट सेंटर पर छापा मारकर फर्जी आधार रैकेट का खुलासा किया। मौके से मुख्य आरोपी कुलदीप शर्मा (28) को गिरफ्तार किया गया, जो कथित तौर पर दूसरे ऑपरेटरों की ID का इस्तेमाल कर फर्जी आधार कार्ड बना रहा था। जांच में सामने आया कि गिरोह आधार सिस्टम की बायोमीट्रिक सुरक्षा को बायपास करने के लिए एडिटेड फोटो, फर्जी बायोमीट्रिक और AI आधारित डिजिटल छेड़छाड़ जैसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा था। बाद में जांच के आधार पर DoIT विभाग के प्रोग्रामर दिनेश कुमार (32), असिस्टेंट प्रोग्रामर रामनिवास सोनी (35) और संविदा कर्मी रवि शीला (25) को भी गिरफ्तार किया गया। अब जानिए- क्या है आधार कार्ड को सेफ करने का तरीका एडीजी साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि- आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री नियमित रूप से चेक करने, अनजान फेस स्कैन और वीडियो KYC से बचने, सोशल मीडिया पर निजी जानकारी सीमित रखें। साइबर क्राइम डीआईजी शांतनु सिंह ने बताया आमजन को ज्यादा सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है। किसी तरह की गड़बड़ी महसूस हो, तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। चाहें तो साइबर क्राइम पोर्टल cybercrime.gov.in⁠ पर भी अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

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