India-Pakistan Conflict | ‘नरसंहार का इतिहास रखने वाला देश हमें न सिखाए’, UN में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह लताड़ा

India-Pakistan Conflict | ‘नरसंहार का इतिहास रखने वाला देश हमें न सिखाए’, UN में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह लताड़ा
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान के पाखंड को दुनिया के सामने बेनकाब किया है। ‘सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा’ पर आयोजित सुरक्षा परिषद की वार्षिक खुली बहस के दौरान जब पाकिस्तानी प्रतिनिधि ने हमेशा की तरह जम्मू-कश्मीर का राग अलापा, तो भारत ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए उसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर जमकर फटकार लगाई।

“अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए फैलाता है हिंसा”

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश परवथनेनी ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा कि नरसंहार के कृत्यों का उसका “लंबे समय से दागदार” रिकॉर्ड एक ऐसा पैटर्न दिखाता है, जिसमें वह अपनी सीमाओं के अंदर और बाहर हिंसा फैलाकर अपनी अंदरूनी नाकामियों से दुनिया का ध्यान भटकाने की कोशिश करता है। हरीश परवथनेनी, UN में भारत के स्थायी प्रतिनिधि ने कहा “यह बेहद हास्यास्पद और विडंबनापूर्ण है कि पाकिस्तान जैसा देश, जिसका खुद का इतिहास नरसंहार के काले कारनामों से दागदार रहा है, वह उन मुद्दों पर लेक्चर दे रहा है जो पूरी तरह से भारत के आंतरिक मामले हैं।”
 

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इस साल की शुरुआत में अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हमलों का ज़िक्र करते हुए परवथनेनी ने कहा, “दुनिया यह नहीं भूली है कि इसी साल मार्च में रमज़ान के पवित्र महीने के दौरान—जो शांति, चिंतन और दया का समय होता है—पाकिस्तान ने काबुल में ‘उम्मीद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर एक बर्बर हवाई हमला किया था।”
अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, “हिंसा के इस कायरतापूर्ण और अमानवीय कृत्य में 269 नागरिकों की जान चली गई और 122 अन्य घायल हो गए। यह हमला एक ऐसी जगह पर किया गया, जिसे किसी भी तरह से ‘सैन्य लक्ष्य’ के तौर पर सही नहीं ठहराया जा सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान का यह रवैया “पाखंडपूर्ण” है कि वह एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय कानून के ऊंचे सिद्धांतों की बात करता है, और दूसरी तरफ “अंधेरे की आड़ में बेकसूर नागरिकों को निशाना बनाता है।”
UNAMA के मुताबिक, ये हवाई हमले शाम की तरावीह की नमाज़ खत्म होने के ठीक बाद हुए थे, जब कई मरीज़ मस्जिद से बाहर निकल रहे थे। परवथनेनी ने UNAMA के उस आकलन का भी ज़िक्र किया, जिसमें बताया गया था कि अफगान नागरिकों के खिलाफ सीमा पार से की गई सशस्त्र हिंसा के कारण 94,000 से ज़्यादा लोग विस्थापित हुए थे।
 

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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसे देश की तरफ से इस तरह की आक्रामक हरकतें कोई हैरानी की बात नहीं हैं—यह ऐसा देश है जो “अपने ही लोगों पर बम बरसाता है और सुनियोजित तरीके से नरसंहार करता है।” पर्वतनेनी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान ने 1971 में ‘ऑपरेशन सर्चलाइट’ के दौरान अपनी ही सेना द्वारा 4,00,000 महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार का एक सुनियोजित अभियान चलाया था। इस बहस में भारत का हस्तक्षेप इन्हीं आरोपों पर केंद्रित रहा, क्योंकि उसने पाकिस्तान के उस प्रयास को खारिज कर दिया जिसमें वह इस मामले को ‘आंतरिक मामला’ बताकर उठाना चाह रहा था।
 
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