प्रसंगवश: लिफ्ट को लेकर सिर्फ दिशा-निर्देश, घटनाओं के बाद भी कार्रवाई नहीं

प्रसंगवश: लिफ्ट को लेकर सिर्फ दिशा-निर्देश, घटनाओं के बाद भी कार्रवाई नहीं

छत्तीसगढ़ में लिफ्ट और एस्केलेटर को लेकर पिछले साल अप्रैल 2025 में सरकार ने नियम लागू किया था, जिसके तहत लोगों की सुरक्षा के मद्देनजर सभी लिफ्ट और एस्केलेटर का पंजीकरण, नवीनीकरण और निरीक्षण अनिवार्य कर दिया गया है। लोगों की जान-माल की सुरक्षा के लिए सरकार ने बड़ा महत्वपूर्ण फैसला लिया, लेकिन इसके लागू होने से लेकर आज करीबन 12-13 माह बाद भी लिफ्ट में लोगों के फंसने की खबरें लगातार सुर्खियां बन रही हैं। लगातार घटनाएं होने के बावजूद कहीं भी किसी पर कोई कार्रवाई की गई हो, ऐसा नहीं हुआ है।

राजधानी रायपुर में पिछले 20-25 दिनों में लिफ्ट में लोगों के फंसने की चार घटनाएं हो चुकी हैं। महिला आईएएस अधिकारी और राजनेता सहित कुछ आम लोग नामी कमर्शियल कॉम्पलेक्स और नामी बिल्डर के रेसिडेंशियलमल्टीस्टोरी की लिफ्ट में फंस चुके हैं। हाल ही में रायपुर के सड्डू स्थित आवासीय बहुमंजिला इमारत की लिफ्ट में एक युवक करीबन 20-25 मिनट तक फंसा रहा।

इन घटनाओं के बाद रायपुर कलेक्टर ने नगर निगम, सीएसपीडीसीएल, पुलिस, टाउन एंड कंट्री प्लॉनिंग और होमगार्ड की संयुक्त टीम बना दी है; जो शॉपिंग मॉल, बड़े व्यावसायिक भवन, अस्पताल और मल्टीस्टोरी परिसरों में लगी लिफ्टों की औचक जांच करेगी। मेंटेनेंस रेकॉर्ड, इमरजेंसी नंबर, सुरक्षा इंतजाम और तकनीकी मानकों को भी परखा जाएगा। खामी मिलने पर सीधे भवन स्वामी को जिम्मेदार माना जाएगा।

अब सवाल यह उठता है कि लिफ्ट सुरक्षा संबंधी नियम लागू हुए एक साल से ज्यादा हो गए, कितने लोगों ने लिफ्ट का पंजीयन, नवीनीकरण और निरीक्षण करवाया है? संबंधित विभागों ने इस एक साल में कितनी जगहों पर लिफ्ट का निरीक्षण और खामी मिलने पर कार्रवाई की है? सिर्फ नियम-कानून बना देने और दिशा-निर्देश जारी करने से कुछ नहीं होता है, सरकार को चाहिए कि वह इसके दोषियों पर कार्रवाई भी करे। –अनुपम राजीव राजवैद्य anupam.rajiv@in.patrika.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *