पंखे के गर्म हवा में हीट स्ट्रोक के पेशेंट:मरीज बोले, एसी खराब कूलर का इंतजाम नहीं, औरंगाबाद में 42 डिग्री तक पारा

पंखे के गर्म हवा में हीट स्ट्रोक के पेशेंट:मरीज बोले, एसी खराब कूलर का इंतजाम नहीं, औरंगाबाद में 42 डिग्री तक पारा

औरंगाबाद जिले में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लू और डिहाइड्रेशन के कारण बीमार पड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है। सदर अस्पताल मरीजों से भरता जा रहा है। गर्मी और हीट वेव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने नशा मुक्ति वार्ड को अस्थायी रूप से लू वार्ड में तब्दील किया है। प्रबंधन का दावा है कि हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों के लिए 14 बेड सुरक्षित रखे गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आई। जब दैनिक भास्कर की टीम अस्पताल पहुंची, तो लू वार्ड में एक भी बेड खाली नहीं मिला। सभी बेड पर सिजेरियन ऑपरेशन के मरीज भर्ती थे। वार्ड में जगह की कमी के कारण कई मरीज जमीन पर लेटे हुए नजर आए। स्थिति यह है कि लू से पीड़ित मरीजों को अन्य सामान्य वार्डों में रखा जा रहा है, जहां पहले से ही भीड़ अधिक है। ऐसे में मरीजों को न तो उचित इलाज मिल पा रहा है और न ही राहत। लू से पीड़ित मरीजों का कहना है कि हमारे लिए अच्छी व्यवस्था नहीं की गई है। न एसी काम कर रहा है और न ही कूलर का इंतजाम है। पंखे का हवा गर्म है। गर्मी में ही रहना पड़ रहा है। वाटर कूलर है, पर वो कई दिनों से खराब है। ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। अस्पताल से कुछ तस्वीरें… डॉक्टर राउंड पर नहीं आते हैं नवीनगर प्रखंड के गोगो गांव निवासी संदीप तिवारी ने बताया कि मेरी मां की तबीयत गर्मी के कारण बिगड़ गई थी। उन्हें उल्टी और दस्त होने के बाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन जिस जनरल वार्ड में उन्हें रखा गया है, वहां बेहतर व्यवस्था नहीं। पंखे के गर्म हवा से मां की तबीयत सुधरने की जगह और बिगड़ रही। अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की नियमित निगरानी नहीं हो रही है। न तो डॉक्टर राउंड पर आते हैं और न ही कोई स्टाफ हमारी बात सुनता है। मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 20 बेड एक्स्ट्रा रखे गए हैं सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला का कहना है कि हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए 14 बेड की व्यवस्था की गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 20 अतिरिक्त बेड तैयार रखे गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी वार्डों में एसी और कूलर की व्यवस्था है और पुराने उपकरणों को भी चालू कराया गया है। यहां आने वाले मरीज को उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।
दोपहर में बहुत जरूरी पड़ने पर ही घर से निकलने की सलाह चिकित्सक डॉ. जमुना पांडेय ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12:00 बजे से 3:00 तक बहुत जरूरी पढ़ने पर ही घर से बाहर निकले। बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें और हल्के रंग का ढीला डाला कपड़ा पहनें। अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें। लू से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना और हल्का भोजन करना बेहद जरूरी है। नींबू पानी, ओआरएस, छाछ, लस्सी, नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लेते रहे। हल्का भोजन करें। अधिक मसालेदार भोजन खाने से बचे। तेज बुखार, चक्कर, उल्टी, कमजोरी, सिर दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। मरीज को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें। औरंगाबाद जिले में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। लू और डिहाइड्रेशन के कारण बीमार पड़ने वालों की संख्या बढ़ रही है। सदर अस्पताल मरीजों से भरता जा रहा है। गर्मी और हीट वेव को देखते हुए अस्पताल प्रबंधन ने नशा मुक्ति वार्ड को अस्थायी रूप से लू वार्ड में तब्दील किया है। प्रबंधन का दावा है कि हीट स्ट्रोक से पीड़ित मरीजों के लिए 14 बेड सुरक्षित रखे गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग नजर आई। जब दैनिक भास्कर की टीम अस्पताल पहुंची, तो लू वार्ड में एक भी बेड खाली नहीं मिला। सभी बेड पर सिजेरियन ऑपरेशन के मरीज भर्ती थे। वार्ड में जगह की कमी के कारण कई मरीज जमीन पर लेटे हुए नजर आए। स्थिति यह है कि लू से पीड़ित मरीजों को अन्य सामान्य वार्डों में रखा जा रहा है, जहां पहले से ही भीड़ अधिक है। ऐसे में मरीजों को न तो उचित इलाज मिल पा रहा है और न ही राहत। लू से पीड़ित मरीजों का कहना है कि हमारे लिए अच्छी व्यवस्था नहीं की गई है। न एसी काम कर रहा है और न ही कूलर का इंतजाम है। पंखे का हवा गर्म है। गर्मी में ही रहना पड़ रहा है। वाटर कूलर है, पर वो कई दिनों से खराब है। ठंडा पानी नहीं मिल रहा है। अस्पताल से कुछ तस्वीरें… डॉक्टर राउंड पर नहीं आते हैं नवीनगर प्रखंड के गोगो गांव निवासी संदीप तिवारी ने बताया कि मेरी मां की तबीयत गर्मी के कारण बिगड़ गई थी। उन्हें उल्टी और दस्त होने के बाद सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। लेकिन जिस जनरल वार्ड में उन्हें रखा गया है, वहां बेहतर व्यवस्था नहीं। पंखे के गर्म हवा से मां की तबीयत सुधरने की जगह और बिगड़ रही। अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की नियमित निगरानी नहीं हो रही है। न तो डॉक्टर राउंड पर आते हैं और न ही कोई स्टाफ हमारी बात सुनता है। मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। 20 बेड एक्स्ट्रा रखे गए हैं सदर अस्पताल के प्रबंधक प्रफुल्ल कांत निराला का कहना है कि हीट स्ट्रोक मरीजों के लिए 14 बेड की व्यवस्था की गई है। मरीजों की संख्या बढ़ने पर एनआरसी (पोषण पुनर्वास केंद्र) में 20 अतिरिक्त बेड तैयार रखे गए हैं। उन्होंने दावा किया कि सभी वार्डों में एसी और कूलर की व्यवस्था है और पुराने उपकरणों को भी चालू कराया गया है। यहां आने वाले मरीज को उपलब्ध संसाधनों में बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।
दोपहर में बहुत जरूरी पड़ने पर ही घर से निकलने की सलाह चिकित्सक डॉ. जमुना पांडेय ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दोपहर 12:00 बजे से 3:00 तक बहुत जरूरी पढ़ने पर ही घर से बाहर निकले। बाहर निकलते समय सिर को ढककर रखें और हल्के रंग का ढीला डाला कपड़ा पहनें। अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करें। लू से बचाव के लिए पर्याप्त पानी पीना और हल्का भोजन करना बेहद जरूरी है। नींबू पानी, ओआरएस, छाछ, लस्सी, नारियल पानी जैसे तरल पदार्थ लेते रहे। हल्का भोजन करें। अधिक मसालेदार भोजन खाने से बचे। तेज बुखार, चक्कर, उल्टी, कमजोरी, सिर दर्द और बेहोशी जैसे लक्षण हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। मरीज को तुरंत ठंडी जगह पर ले जाएं और नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।  

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