गोरखपुर में नौकरी बहाल कराने के नाम पर देवरिया के BSA शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की प्रताड़ना से तंग आकर 21 फरवरी को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सुसाइड कर लिया था। मामले में आरोपी लिपिक की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी दी गई थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने साफ तौर कहा कि 16 लाख रुपए की रिश्वत मांगना और प्रताड़ना देना गंभीर अपराध है। जानिए पूरा मामला…
जानकारी के मुताबिक सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि गुड़िया सिंह के पति कृष्ण मोहन सिंह की नियुक्ति एक जुलाई 2016 को कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, देवरिया में सहायक अध्यापक के पद पर हुई थी। साल 2023 में गलत तरीके से उनकी और दो अन्य लोगों की नियुक्ति निरस्त कर दी गई। इसके खिलाफ कृष्ण मोहन ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 13 फरवरी 2025 को हाईकोर्ट ने निरस्तीकरण के आदेश को निरस्त करते हुए नया आदेश पारित करने का निर्देश दिया। 16-16 लाख रुपए की रिश्वत मांगी
जिसकी प्रति बीएसए देवरिया को भेज दी गई, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपी लिपिक संजीव कुमार सिंह ने कृष्ण मोहन सिंह और दो अन्य शिक्षकों से नियुक्ति बहाली के नाम पर 16-16 लाख रुपये की रिश्वत मांगी। किश्तों में की थी भुगतान
पीड़ितों ने उन्हें अलग-अलग किश्तों में सात लाख, नौ लाख और 16 लाख रुपए का भुगतान किया। इसके बाद भी आरोपित ने और रुपये की डिमांड करना शुरू कर दिया। जब शिक्षकों ने असमर्थता जताई तो आरोपित ने उन पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। बीएसए ऑफिस बुलाकर जलील किया
20 फरवरी 2025 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया और वहां उन्हें काफी जलील और प्रताड़ित किया गया। इसी बात से तंग आकर उन्होंने 21 फरवरी की सुबह अपने घर के नीचे वाले कमरे में जाकर पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। आरोपी लिपिक अभी भी फरार
पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर गुलरिहा थाने में तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, आरोपी लिपिक और उसके सहयोगियों पर मुकदमा दर्ज किया गया था।
देवरिया जिले के रामनाथ देवरिया कालोनी में रहने वाला संजीव कुमार सिंह मुकदमा दर्ज होने के बाद से ही फरार है।


