अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा ने 5 मई को शिमला से एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया, जिसमें उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के पारित होने के बावजूद महिला आरक्षण कानून को लागू करने में विफल रहने के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की। शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, लांबा ने केंद्र सरकार पर जानबूझकर कानून लागू करने में देरी करके देश को गुमराह करने का आरोप लगाया।
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अलका लांबा ने कहा कि महिला आरक्षण कानून पारित हो चुका है, इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है और अधिसूचना भी जारी हो चुकी है। फिर भी भाजपा सरकार इसे लागू नहीं कर रही है। प्रधानमंत्री देश को क्यों गुमराह कर रहे हैं? लांबा ने आरोप लगाया कि भाजपा ऐतिहासिक रूप से महिला आरक्षण का विरोध करती रही है और उन्होंने इस कानून को पारित कराने में कांग्रेस की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा की मंशा होती, तो महिलाओं को 2014 में ही उनके अधिकार मिल जाते। विपक्ष के दबाव में ही सरकार नारी शक्ति वंदन अधिनियम लेकर आई। हमने इसे पारित करवाना सुनिश्चित किया।
उन्होंने परिसीमन या जनगणना प्रक्रियाओं से जोड़े बिना कानून को तत्काल लागू करने की मांग की और जोर देते हुए कहा कि लोकसभा में 543 सीटें हैं। अगर यह कानून आज लागू होता है, तो लगभग 180 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होनी चाहिए। भाजपा महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व क्यों नहीं दे रही है? लांबा ने आरक्षण ढांचे में ओबीसी महिलाओं को शामिल किए जाने पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हमारी मांग स्पष्ट है: कानून को तुरंत लागू करें और ओबीसी महिलाओं के लिए भी आरक्षण सुनिश्चित करें। भाजपा न तो कानून लागू करने को तैयार है और न ही पिछड़े वर्ग की महिलाओं को शामिल करने को।
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इन मांगों को मनवाने के लिए लांबा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित एक विशाल पोस्टकार्ड अभियान की घोषणा की, जिसमें देशभर की दस लाख महिलाएं शामिल होंगी। उन्होंने कहा कि यह तो जन आंदोलन की शुरुआत मात्र है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने गांवों, विधानसभा क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों में हस्ताक्षर अभियान और जनसंपर्क कार्यक्रमों की योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हम हर पंचायत, हर वार्ड, हर जिले तक पहुंचेंगे। महिलाएं अपनी आवाज उठाएंगी और अपने संवैधानिक अधिकारों की मांग करेंगी।


