‘मेरे बैंक अकाउंट में सिर्फ 84 रुपये थे’, ‘धुरंधर’ की सफलता से पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे गौरव गेरा, अब किया खुलासा

‘मेरे बैंक अकाउंट में सिर्फ 84 रुपये थे’, ‘धुरंधर’ की सफलता से पहले आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे गौरव गेरा, अब किया खुलासा

Dhurandhar Fame Gaurav Gera Financial Struggle: अभिनेता और कॉमेडियन गौरव गेरा ने हाल ही में अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ‘धुरंधर’ के बाद गौरव ने शानदार वापसी की है। आज वो अपने लोकप्रिय किरदारों और शानदार अभिनय की वजह से दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे हैं, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब आर्थिक परेशानियां उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा सच थीं।

‘धुरंधर’ से गौरव ने की शानदार वापसी

हाल के दिनों में वो वेब सीरीज ‘धुरंधर’ और उसके दूसरे भाग में निभाए गए अपने दमदार किरदार की वजह से लगातार चर्चा में हैं। दर्शकों का भरपूर प्यार मिलने के बाद ‘बॉम्बे टाइम्स’ से बात करते हुए गौरव ने अपने शुरुआती संघर्षों को याद किया और बताया कि सफलता तक पहुंचने का रास्ता उनके लिए बिल्कुल आसान नहीं था।

दिल्ली में पले-बढ़े गौरव का झुकाव बचपन से ही कला और मंच की तरफ था। स्कूल में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेना उन्हें बेहद पसंद था। हालांकि उनके परिवार में पढ़ाई को हमेशा प्राथमिकता दी जाती थी। परिवार के अन्य सदस्य तकनीकी और प्रोफेशनल क्षेत्रों में आगे बढ़ रहे थे, लेकिन गौरव का मन रचनात्मक दुनिया में बसता था।

डिजाइनिंग और क्रिएटिव फील्ड में आजमाया हाथ

शुरुआत में डिजाइनिंग और क्रिएटिव फील्ड में हाथ आजमाया, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हो गया कि उनकी असली पहचान मंच और अभिनय में है। इसके बाद उन्होंने सुरक्षित करियर विकल्पों को छोड़कर थिएटर का रास्ता चुना। यही फैसला आगे चलकर उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

मुंबई पहुंचने के बाद संघर्ष का असली दौर शुरू हुआ। ऑडिशन, रिजेक्शन और आर्थिक तंगी उनके रोजमर्रा का हिस्सा बन गए। कई बार हालात इतने कठिन हो जाते थे कि खर्च चलाना भी मुश्किल हो जाता था। लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने सपनों पर भरोसा बनाए रखा। परिवार का सीमित सहयोग और खुद पर अटूट विश्वास उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा।

लगातार आगे बढ़ते रहे गौरव

गौरव बताते हैं कि उन दिनों उन्होंने कभी खुद को परिस्थितियों के सामने कमजोर नहीं पड़ने दिया। उनके भीतर आत्मसम्मान और मेहनत के दम पर आगे बढ़ने की जिद थी। यही वजह थी कि मुश्किल वक्त में भी उन्होंने हार मानने के बजाय खुद को और मजबूत बनाया।

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