राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि बहु अनुकंपा नियुक्ति की हकदार हैं।
जस्टिस रवि चिरानियां ने यह आदेश सुंदरी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
अदालत ने मामले में नाराजगी जताते हुए कहा कि जब 2023 में ही हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच यह तय कर चुकी है कि बहु, बेटी के समान ही अनुकम्पा नियुक्ति की हकदार है तो विभाग द्वारा उठाई गई आपत्तियां विधि सम्मत नहीं हैं।
बेटे की जगह बहु ने किया था आवेदन
अधिवक्ता आरसी गौत्तम ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता के ससुर सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में पोस्टेड थे। पद पर रहते हुए 19 नवम्बर 2016 को उनकी मृत्यु हो गई।
मृत्यु के बाद बहु ने अपने ससुर के स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया।
क्योंकि मृतक के बेटे का अपने पिता के जीवनकाल में ही एक्सीडेंट हो गया था और वह पूरी तरह से बेड पर था।
लेकिन विभाग ने उनकी अनुकम्पा नियुक्ति के आवेदन पर कोई विचार नहीं किया।
तीस दिन में नियुक्ति देने के आदेश
अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता के पति की मौत भी 25 मई 2020 को हो गई।
उसके बाद परिवार के सभी आश्रित याचिकाकर्ता पर ही निर्भर हैं।
अदालत ने कहा कि हमें यह देखकर आश्चर्य हुआ कि डिवीजन बेंच द्वारा निर्धारित कानून को जानते हुए भी विभाग ने वर्तमान मामले में अपने जवाब में वही आपत्ति उठाई है, जिन्हें पहले ही हाईकोर्ट खारिज कर चुका हैं।
कोर्ट ने कहा विभाग याचिकाकर्ता को 30 दिन में नियुक्ति दें।
बिना एक दिन की देरी के नियुक्ति दें
कोर्ट ने कहा कि यह उम्मीद की जाती है कि याचिकाकर्ता के मामले पर विचार करते समय प्रतिवादी कोई और तकनीकी आपत्ति नहीं उठाएंगे और बिना किसी देरी के, यहां तक कि एक दिन की भी देरी किए बिना, उन्हें अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करेंगे।
यदि प्रतिवादी विभाग द्वारा अनावश्यक विलंब किया जाता है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेते हुए अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी।
अदालत ने 45 दिन में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी दिए।


