हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह ने केंद्र शासित प्रदेश (UT) के लोक अभियोजक की उस याचिका का विरोध किया है, जिसमें उनके खिलाफ दर्ज मामले में आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार का प्रयास) को धारा 511 के साथ जोड़कर आरोपों में संशोधन करने और मामले को सत्र न्यायालय में भेजने की मांग की गई है। केंद्र शासित प्रदेश के लोक अभियोजक ने पिछली सुनवाई के दौरान चंडीगढ़ की अदालत में यह आवेदन दायर किया था। अभियोजन पक्ष का कहना है कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री, जिसमें सीआरपीसी की धारा 164 के तहत पीड़िता का बयान और अदालत में दी गई उसकी मुख्य गवाही शामिल है, आरोपी के खिलाफ गंभीर और स्पष्ट आरोप दर्शाती है। इसलिए यह मामला सत्र न्यायालय द्वारा ही सुना जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने ये रखीं दलीलें वहीं, बचाव पक्ष ने इस याचिका का विरोध करते हुए इसे कार्यवाही में देरी करने की कोशिश बताया है। पूर्व मंत्री के वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को झूठा फंसाया गया है और इस मामले में आईपीसी की धारा 376 और 511 के तहत अपराध साबित होने का कोई ठोस सबूत नहीं है। बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने अपनी प्रारंभिक पुलिस शिकायत में ऐसे गंभीर आरोपों का उल्लेख नहीं किया था, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई थी। एक आवेदन हो चुका खारिज साथ ही, इसी तरह का एक आवेदन पूर्ववर्ती न्यायालय द्वारा 29 जुलाई 2024 के आदेश में पहले ही खारिज किया जा चुका है। उस आदेश को न तो शिकायतकर्ता और न ही राज्य ने उच्च अदालत में चुनौती दी, इसलिए वह आदेश अंतिम माना जाता है। उल्लेखनीय है कि चंडीगढ़ पुलिस ने पूर्व कोच की शिकायत पर 31 दिसंबर 2022 को पूर्व मंत्री के खिलाफ आईपीसी की धारा 354, 354-ए, 354-बी, 342, 506 और 509 के तहत मामला दर्ज किया था। कोच ने लगाए थे गंभीर आरोप शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि 1 जुलाई 2022 को मंत्री ने अपने आधिकारिक आवास पर उसके साथ छेड़छाड़ की और विरोध करने पर उसे धक्का देकर उसकी टी-शर्ट फाड़ दी, जिसके बाद वह किसी तरह वहां से निकलने में सफल रही।


