Hands and Feet Tingling Causes: अक्सर ऑफिस में देर तक बैठने या गलत पोजिशन में सोने के बाद हमारे हाथ-पैर ‘सो’ जाते हैं, और उठने पर तेज झनझनाहट महसूस होती है। हम इसे ‘खून का दौरा रुकना’ कहकर टाल देते हैं। लेकिन मेडिकल साइंस के अनुसार, अगर यह झनझनाहट बिना किसी ठोस वजह के बार-बार हो रही है, तो यह साधारण थकान नहीं है। इसे Paresthesia (पैरेस्थेसिया) कहते हैं, जो असल में आपके शरीर के ‘इलेक्ट्रिक सिस्टम’ (नसों) में आने वाली बड़ी गड़बड़ी का पहला साइलेंट सिग्नल है। 90% लोग इसे पहचानने में गलती कर देते हैं और बीमारी को बढ़ने का मौका देते हैं।
क्या कहती है रिसर्च? नसों और झनझनाहट का कनेक्शन
साइंस डायरेक्ट के मुताबिक की रिपोर्ट्स के अनुसार, हाथ-पैरों में झनझनाहट तब होती है जब आपकी नसें (Nerves) दब जाती हैं, क्षतिग्रस्त हो जाती हैं या उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिलता। यह ‘चींटी चलने’ या ‘सुई चुभने’ जैसी अनुभूति नसों के द्वारा मस्तिष्क को गलत सिग्नल भेजने का परिणाम है।
इन 3 प्रमुख कारणों को कभी न करें नजरअंदाज
विटामिन B12 की भारी कमी: झींगा, झनझनाहट और सुन्नपन का सबसे आम और बड़ा कारण विटामिन B12 की कमी है। विटामिन B12 नसों की सुरक्षा परत (Myelin Sheath) को बनाए रखने के लिए जिम्मेदार होता है। इसकी कमी से यह परत पतली हो जाती है, जिससे नसें ‘शॉर्ट सर्किट’ होने लगती हैं। एक अध्ययन के मुताबिक, शाकाहारी लोगों में यह समस्या ज्यादा देखी जाती है।
डायबिटिक न्यूरोपैथी (Diabetic Neuropathy): हाथ-पैरों में झनझनाहट टाइप-2 डायबिटीज का एक शुरुआती लक्षण हो सकता है। बढ़ा हुआ ब्लड शुगर नसों को धीरे-धीरे ‘जला’ देता है। अगर झनझनाहट पैरों के पंजों से शुरू होकर ऊपर की ओर बढ़ रही है, तो यह ‘डायबिटिक न्यूरोपैथी’ का गंभीर संकेत है।
दबी हुई नसें (Nerve Compression): रीढ़ की हड्डी में स्लिप डिस्क या कलाई में ‘कार्पल टनल सिंड्रोम’ (Carpal Tunnel Syndrome) के कारण भी नसें दब जाती हैं, जिससे प्रभावित हाथ या पैर में झनझनाहट और सुन्नपन महसूस होता है।
कब झनझनाहट बन जाती है ‘खतरे की घंटी’?
अगर झनझनाहट के साथ ये लक्षण भी दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें:
- झनझनाहट लगातार कई दिनों तक बनी रहे।
- हाथ-पैरों में कमजोरी महसूस हो या कुछ पकड़ने में दिक्कत हो।
- झनझनाहट के साथ चक्कर आना या धुंधला दिखना।
नसों की मजबूती के लिए विटामिन B12 डाइट चार्ट

क्या है डॉक्टर की राय
वरिष्ठ फिजिशियन और आहार विशेषज्ञ डॉ. शिखा शर्मा ने बताया कि शाकाहारी आहार में विटामिन B12 के स्रोत सीमित होते हैं, जिसके कारण नसों की सुरक्षा परत (Myelin Sheath) कमजोर होने लगती है। झनझनाहट महसूस होना असल में नसों की ‘मदद की पुकार’ है। सही डाइट और समय पर सप्लीमेंट्स के जरिए नसों की कार्यक्षमता को दोबारा वापस पाया जा सकता है।
क्या करें?
झनझनाहट को हल्के में लेना नसों को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्त कर सकता है। अगर आपको यह समस्या बार-बार हो रही है, तो अपने डॉक्टर से सलाह लें। वे ब्लड टेस्ट के जरिए विटामिन B12 और शुगर लेवल की जांच कर सकते हैं। सही समय पर इलाज और विटामिन से भरपूर आहार नसों की कमजोरी को पूरी तरह ठीक कर सकता है।
डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।


