दौसा में प्रभारी सचिव के लगाए पौधों को खा गई बकरियां, सरकारी पौधरोपण कार्यक्रम की खुली पोल

दौसा में प्रभारी सचिव के लगाए पौधों को खा गई बकरियां, सरकारी पौधरोपण कार्यक्रम की खुली पोल

Dausa Plantation Drive: दौसा जिले में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान का जिला स्तरीय कार्यक्रम महज दिखावा बन कर रह गया है। बीते 25 मई को शहर के निकट गेटोलाव में आयोजित कार्यक्रम में बड़े जोर शोर से पौधरोपण किया गया था। वहां जिले के प्रभारी सचिव पीसी किशन की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में पौधरोपण किया गया था। कार्यक्रम में तब बड़े-बड़े दावे किए गए थे। अब वहां 80% से अधिक पौधों को बकरियां व अन्य जानवर खा चुके।

कार्यक्रम स्थल पर अब कई जगह पौधों के नामो निशान नहीं हैं। अधिकतर जगह अब वहां प्लास्टिक के कप -बोतल व अन्य कचरा पड़ा हुआ है। आमजन का सवाल है कि जहां कार्यक्रम नजीर बनना था, वहां ही पौधों को नहीं बचाया जा सका तो, दूसरी जगह क्या होगा? वहां एक पौधा अतिथियों ने लगाया था, अन्य पौधे आमजन व अन्य लोगों ने लगाए थे।

यह कहा था प्रभारी सचिव ने

इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला प्रभारी सचिव पीसी किशन ने कहा था कि दौसा जल उपलब्धता के मामले में संवेदनशील जिला है । यहां जल संरक्षण एवं पौधारोपण को जन आंदोलन का स्वरूप देना जरूरी है। पौधरोपण और जल संचयन के माध्यम से ग्रीन कवर बढ़ाकर वनीकरण को प्रोत्साहित करना होगा, जिससे भविष्य में दूरगामी लाभ प्राप्त होंगे। इस बारे में जिला परिषद के एसीइओ राजेश मीणा ने बताया कि नगर परिषद से बात कर सुधार करवाया जाएगा।

कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

कार्यक्रम में जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा, पूर्व विधायक शंकरलाल शर्मा, भाजपा जिला अध्यक्ष लक्ष्मी रेला, जिला पुलिस अधीक्षक पीयूष दीक्षित, जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार मीणा, जिला परिषद सदस्य नीलम गुर्जर व अन्य मौजूद रहे थे।

औपचारिकता बन रहे कार्यक्रम

प्रदेश में वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान जैसे प्रमुख आयोजन सरकारी उदासीनता के चलते महज औपचारिकता बन रहे हैं। प्रशासननिक अनदेखी के चलते अभियान में आमजन का जुड़ाव सिर्फ कार्यक्रम आयोजन के दिन ही दिखाई दे रहा है। उसके बाद अभियान को गति देने के लिए प्रशासन के स्तर पर प्रयास धरातल पर कम ही नजर आते हैं जिसके कारण आमजन भी अभियान से दूरी बना रहे हैं। ऐसे में इस तरह के जनउपयोगी अभियान की सफलता पर भी प्रश्नचिन्ह लगना तय है।

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