सस्ती जमीन के लालच में शहर से जुड़े ग्रामीण क्षेत्र में 10 हजार से अधिक परिवारों ने जिन प्लॉटों पर जिंदगी भर की कमाई लगाई, वे आज कानूनी रूप से अधर में हैं। शहर के आसपास के ग्रामीण इलाकों में बिना लेआउट मंजूरी, बिना डायवर्सन और मास्टर प्लान के खिलाफ 203 अवैध कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं। इसमें से 51 कॉलोनी की सुनवाई पूरी कर कलेक्टर रुचिका चौहान ने इनके कॉलोनाइजर के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश दिए थे। इनमें से लगभग 30 कॉलोनाइजर के खिलाफ प्रकरण दर्ज कराए जा चुके हैं। शेष की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। इस मामले को लेकर जब दैनिक भास्कर ने शहर के विधि विशेषज्ञ और रिटायर्ड निगम अधिकारियों से बात की तो उनका सवाल यही था कि अवैध कॉलोनी काटने का काम जब चल रहा था, तब मैदानी अमला कहां था। और यदि मैदानी अमले ने कार्रवाई नहीं की तो उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? उनका कहना था कि थ्योरी ऑफ अकाउंटेबिलिटी के आधार पर सबसे पहले जिम्मेदारों की जवाबदेही तय होना चाहिए। भास्कर के एक्सपर्ट पैनल में एड. संजय शर्मा, एड. ललित गुप्ता, एड. हिमांशु चतुर्वेदी, रिटा. आईएएस विनोद शर्मा शामिल हैं, जिन्होंने अवैध कॉलोनी जुड़े कई सवालों के सीधे जवाब दिए। अवैध कॉलोनी पर सख्त कानून, फिर भी जारी खेल: अफसर भी दायरे में
अवैध कॉलोनियों पर सख्त कानून होने के बावजूद कार्रवाई ढीली है। मप्र नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 292-घ (292D) के तहत अवैध कॉलोनी काटना, प्लॉटिंग करना और निर्माण कराना संज्ञेय अपराध है, जिसमें 3 से 7 साल तक की सजा और जुर्माना का प्रावधान है। खास बात यह है कि कानून में संबंधित क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों को भी दोषी माना गया है—यदि वे अवैध डायवर्सन या कॉलोनी की रिपोर्ट छुपाते हैं या कार्रवाई नहीं करते। इसके बावजूद शहर में कॉलोनाइजर सक्रिय हैं, जिससे सिस्टम की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं। अवैध कॉलोनी: खरीदारों के सवाल और कानून की सच्चाई 1. क्या मैं प्लॉट पर घर बना सकता हूं?
कानूनी स्थिति: म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम 1973 की धारा 30, 31 के तहत बिना स्वीकृत लेआउट/कॉलोनी में निर्माण अवैध है। मास्टर प्लान में भूमि उपयोग तय होता है। अगर जमीन कृषि है या लेआउट पास नहीं है तो घर बनाना नियम विरुद्ध है। नगर निगम नक्शा पास नहीं करेगा। 2. क्या बना हुआ घर टूट सकता है?
नगर निगम अधिनियम 1956 की धारा 292, 307 में अवैध निर्माण पर नोटिस देकर उसके ध्वस्तीकरण का अधिकार है। 3. बिजली-पानी मिलेंगे या नहीं?
बिना वैध कॉलोनी के स्थायी कनेक्शन देना नियम विरुद्ध, विद्युत अधिनियम में वैध स्वामित्व जरूरी। अस्थायी/राजनीतिक दबाव में कनेक्शन मिल जाते हैं, लेकिन कानूनी सुरक्षा नहीं होती। 4. क्या सरकार सड़क/नाली बनाएगी?
कानूनी स्थिति: म.प्र. भूमि विकास नियम 2012, कॉलोनी डेवलपर की जिम्मेदारी: सड़क, ड्रेनेज, ओपन स्पेस (10-15%) न छोड़ने पर कॉलोनी वैध नहीं। क्यों कि अवैध कॉलोनी में सरकारी फंड खर्च नहीं हो सकता। 5. मेरा प्लॉट वैध है या अवैध?
कानून: अगर पूरी कॉलोनी का लेआउट पास नहीं → धारा 30 (TCP Act) के तहत पूरी कॉलोनी अवैध। “रजिस्ट्री होना वैध होना नहीं” माना जाता। 6. पैसा डूबने का खतरा कितना?
कानूनी जोखिम: अवैध प्लॉट पर कोई गारंटी नहीं। बैंक, कोर्ट, सरकार—तीनों सीमित मदद देते हैं
रियलिटी: रीसेल मुश्किल। कीमत 20–50% तक गिरती है 7. रजिस्ट्री vs एग्रीमेंट क्या फर्क?
रजिस्ट्री: Registration Act 1908 के तहत कानूनी दस्तावेज है।
एग्रीमेंट/पावर ऑफ अटॉर्नी: कमजोर अधिकार। कोर्ट में चुनौती योग्य 8. बैंक लोन क्यों नहीं मिलता?
कारण: बैंक “Clear Title” मांगते हैं। RBI गाइडलाइन + बैंकिंग नियम
अवैध कॉलोनी = लोन रिजेक्ट 9. कॉलोनी वैध कैसे होती है?
प्रक्रिया: मप्र भूमि विकास नियम 2012 के तहत रेगुलराइजेशन पॉलिसी लागू होती हैं।
शर्तें: डेवलपर/ निवासी शुल्क जमा करें। रोड, पार्क आदि की सुविधाएं दें। इसमें 2–10 साल तक लग सकते हैं 10. कॉलोनाइजर पर क्या कार्रवाई?
कानून: निगम विधान 1956 की धारा 52 में अवैध कॉलोनी पर दंड और बीएनएस की धोखाधड़ी की धारा के तहत कार्रवाई हो सकती है। 11. जमीन का असली मालिक कैसे पता करें?
राजस्व नियम: खसरा, बी-1, नक्शा मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत तहसील से रिकॉर्ड निकालें। 12. डायवर्सन क्या है और क्यों जरूरी?
मप्र भू राजस्व संहिता की धारा 172 के तहत कृषि जमीन को आवासीय बनाने के लिए अनुमति लेना अनिवार्य है। बिना डायवर्सन के पूरा प्रोजेक्ट अवैध माना जाएगा। लेआउट पास होना क्यों जरूरी?
नगर एवं ग्राम निवेश की धारा 29-30 के तहत कॉलोनी बनाने से पहले लेआउट पास कराना होता है। बिना अनुमति प्लॉटिंग अपराध है। क्योंकि किसी भी कॉलोनी में रोड चौड़ाई तय होती है और पार्क और ओपन स्पेस जरूरी माना गया है। अफसरों की जिम्मेदारी?
कानून कहता है कि नगर निगम, टीएनसीपी, राजस्व विभाग निगरानी करेंगे। लेकिन ऐसा होता नहीं है। मिलीभगत के चलते समय पर कार्रवाई नहीं की जाती और अवैध कॉलोनी बस जाती है। बाद में खरीदार फंसता है
खरीदार क्या कर सकता है?
अवैध कॉलोनी में झूठ बोलकर प्लॉट बेचने वाले कॉलोनाइजर के खिलाफ उपभोक्ता फोरम या सिविल सूट दायर कर सकता है। पुलिस थाने जाकर रिपोर्ट भी दर्ज करा सकता है। लेकिन ये एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है।
स्कूल, अस्पताल, सीवर क्यों नहीं बनते?
मास्टर प्लान में प्रत्येक क्षेत्र की जमीन का एक लैंडयूज होता है। ऐसे में कॉलोनी सिर्फ रिहायशी लैंडयूज की जमीन पर काटी जा सकती है। इसके खिलाफ बसाहट पर सरकारी बजट खर्च नहीं हो सकता।
क्या यहां रहना सुरक्षित है?
कानूनी रूप से सुरक्षित नहीं। प्लॉट खरीदने व मकान बनाने में लाखों रुपए खर्च करने के बाद भी हमेशा नोटिस का खतरा बना रहता है। बुनियादी सुविधाओं की कमी रहती है। प्लॉट खरीदने से पहले ये सावधानियां जरूरी
डायवर्सन (धारा 172) चेक करें { लेआउट स्वीकृति देखें (TCP Act) {मास्टर प्लान का Land Use देखें
यदि अवैध कॉलोनी में प्लॉट खरीद चुके हैं तो
सामूहिक रूप से रेगुलराइजेशन की मांग करें
दस्तावेज सुरक्षित रखें
कॉलोनाइजर के खिलाफ कार्रवाई करें


