Equal Pay For Equal Work : उपनल कर्मियों को नियमिति के समान वेतन देने के आदेश पूर्व में ही जारी हो चुके हैं। उत्तराखंड के कार्मिक-सचिव शैलेश बगौली के मुताबिक इस अनुबंध के मौजूदा प्रारूप की दोबारा समीक्षा की जा रही है। उनके अनुसार, जल्द ही संशोधित शर्तों के साथ नया प्रारूप जारी किया जाएगा। दरअसल, सरकार ने 10 साल की नियमित सेवा पूरी कर चुके उपनल कर्मचारियों को ‘समान काम-समान वेतन’ का निर्णय लिया है, जिसके आदेश तीन फरवरी को जारी हो चुके हैं। उत्तराखंड में नई व्यवस्था के तहत इन कर्मचारियों को उपनल से अलग होकर मूल विभाग से अनुबंध करना होगा। हालांकि, वर्तमान में तय की गई शर्तों से उपनल कर्मचारी सहमत नहीं हैं। उनका साफ कहना है कि ऐसे प्रावधान से उनका भविष्य और अधिक असुरक्षित हो सकता है। शैलेश बगौली के मुताबिक अनुबंध संशोधित करवाया जा रहा है, जिसमें उपनल कर्मचारियों की ओर से उठाई गई आपत्तियों को भी शामिल किया जाएगा। इधर, उपनल कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल के मुताबिक कर्मचारियों की आपत्ति वाले बिंदुओं से सरकार को अवगत कराया जा चुका है। उम्मीद है कि राज्य सरकार कर्मचारी हित में निर्णय लेगी।
11 हजार कर्मचारियों को दिया जाना है लाभ
उत्तराखंड में समान काम और समान वेतन का लाभ उपनल के जरिये विभिन्न विभागों में कार्यरत 11 हजार से अधिक कार्मिकों को मिलेगा। उपनल मुख्यालय के मुताबिक, 25 नवंबर 2025 तक 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वालों में ये शामिल हैं। इनमें 3,240 अकुशल, 2,561 अर्द्धकुशल, 4,775 कुशल, 475 उच्च कुशल और 45 अधिकारी वर्ग शामिल हैं।
इसलिए हो रहा है विरोध
सरकार ने उपनल के समान अकुशल, अर्द्धकुशल, कुशल, उच्च कुशल, अफसर श्रेणी बनाई है।
नियुक्ति अस्थायी होगी। तय राशि के अलावा नियमितीकरण का हक, सेवा लाभ नहीं मिलेगा।
मानदेय डीए सहित मिलेगा। यदि ग्रेच्युटी की देयता बनती है तो वो मानदेय में शामिल नहीं होगी।
अनुबंध तय अवधि तक रहेगा। कार्मिक की निरंतरता बढ़ाने का निर्णय अनुबंध अवधि के बाद।
अनुबंध पूर्णत: व्यक्तिगत है। कर्मचारी आचरण नियमावली भी पूरी तरह से लागू होगी।


