गोपालगंज में मौसम के अचानक बदलाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। पिछले दो दिनों की रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद शनिवार को तेज धूप और उमस ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। इसके चलते सदर अस्पताल समेत जिले के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। तापमान में इस उतार-चढ़ाव के कारण उल्टी, पेट दर्द और डायरिया (लूज मोशन) के मामले सर्वाधिक सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, बारिश के बाद अचानक बढ़ी गर्मी और नमी से बैक्टीरिया और वायरस सक्रिय हो गए हैं। दूषित पानी और खान-पान में लापरवाही बरतने वाले लोग तेजी से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों की संख्या अस्पताल में हुई दोगुनी सदर अस्पताल के ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की तादाद सबसे अधिक है। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है। मई की शुरुआत में जहां लोग लू की आशंका जता रहे थे, वहीं दो दिनों की बेमौसम बारिश ने वातावरण में नमी बढ़ा दी। शनिवार को बादल छंटने और तेज धूप निकलने के बाद उमस का स्तर काफी बढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, जिससे लोग वायरल बुखार और पेट संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। संक्रमण से बचने के लिए पानी को उबालकर ठंडा करके पीना सुरक्षित बताया गया है। गर्मी और उमस में भोजन जल्दी खराब होता है, इसलिए बासी खाने से परहेज करें। दस्त या उल्टी की स्थिति में शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस (ORS) के घोल का लगातार सेवन करें। तेज धूप में निकलने से बचें और यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो सिर ढककर निकलें। अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अतिरिक्त मरीजों की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है। गोपालगंज में मौसम के अचानक बदलाव ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। पिछले दो दिनों की रुक-रुक कर हुई बारिश के बाद शनिवार को तेज धूप और उमस ने लोगों की सेहत बिगाड़ दी है। इसके चलते सदर अस्पताल समेत जिले के विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। तापमान में इस उतार-चढ़ाव के कारण उल्टी, पेट दर्द और डायरिया (लूज मोशन) के मामले सर्वाधिक सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, बारिश के बाद अचानक बढ़ी गर्मी और नमी से बैक्टीरिया और वायरस सक्रिय हो गए हैं। दूषित पानी और खान-पान में लापरवाही बरतने वाले लोग तेजी से संक्रमण की चपेट में आ रहे हैं। मरीजों की संख्या अस्पताल में हुई दोगुनी सदर अस्पताल के ओपीडी में सामान्य दिनों की तुलना में मरीजों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई है। इनमें बच्चों और बुजुर्गों की तादाद सबसे अधिक है। गंभीर मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया है। मई की शुरुआत में जहां लोग लू की आशंका जता रहे थे, वहीं दो दिनों की बेमौसम बारिश ने वातावरण में नमी बढ़ा दी। शनिवार को बादल छंटने और तेज धूप निकलने के बाद उमस का स्तर काफी बढ़ गया। विशेषज्ञों के अनुसार, यह स्थिति शरीर की प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है, जिससे लोग वायरल बुखार और पेट संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। लोगों को सावधानी बरतने की सलाह बदलते मौसम को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। संक्रमण से बचने के लिए पानी को उबालकर ठंडा करके पीना सुरक्षित बताया गया है। गर्मी और उमस में भोजन जल्दी खराब होता है, इसलिए बासी खाने से परहेज करें। दस्त या उल्टी की स्थिति में शरीर में पानी की कमी न होने दें और ओआरएस (ORS) के घोल का लगातार सेवन करें। तेज धूप में निकलने से बचें और यदि बाहर जाना आवश्यक हो, तो सिर ढककर निकलें। अस्पताल प्रशासन ने बताया है कि दवाओं का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। अतिरिक्त मरीजों की स्थिति को देखते हुए स्वास्थ्य कर्मियों को अलर्ट पर रखा गया है।


