मुजफ्फरपुर प्रसाद अस्पताल आईसीयू अग्निकांड मामले में प्रशासन का एक्शन लगातार जारी है। सात मरीजों की जान लेने वाली इस घटना के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आईसीयू ड्यूटी के दौरान मरीजों को छोड़कर चले जाने के आरोपी डॉक्टर पंकज कुमार को निलंबित कर दिया है। वहीं दूसरी ओर जिले में चल रहे विशेष जांच अभियान के तहत अब तक 25 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों को सील किया जा चुका है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बंदरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि 4 जून को प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगने के समय वह ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन आग लगने के दौरान मरीजों को छोड़कर वहां से चले गए। इतना ही नहीं, सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पताल में काम करने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप भी उन पर लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और मरीजों के प्रति संवेदनहीनता मानते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, पटना निर्धारित करेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी कराई जाएगी। डीएम का सख्त संदेश- स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से पूर्ण जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। सरकारी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने एईएस और संभावित आपदाओं को देखते हुए जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह सजग रहें और आपात स्थिति में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करें। 25 अस्पतालों पर गिरी गाज, जांच अभियान जारी प्रसाद अस्पताल हादसे के बाद जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू किया है। सुरक्षा मानकों और सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन पाए जाने पर अब तक 25 स्वास्थ्य संस्थानों को सील किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि जांच अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल संचालक को मिली जमानत इधर प्रसाद अस्पताल अग्निकांड मामले में गिरफ्तार अस्पताल प्रबंधक डॉ. उपेंद्र प्रसाद को कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर जांच जारी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। अनुमति देने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरवर दयाल सिंह ने कहा है कि अग्निकांड के हर पहलू की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। आयुक्त ने यह भी कहा कि यह जांच केवल अस्पताल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल को संचालन की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और संबंधित अधिकारियों ने किस आधार पर स्वीकृति दी थी। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सात लोगों की जा चुकी है जान बता दें कि 4 जून की अहले सुबह प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से छह मरीजों की मौत हो गई थी। बाद में इलाज के दौरान एक और मरीज ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई। हादसे के बाद से प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहे हैं और पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर जारी है। मुजफ्फरपुर प्रसाद अस्पताल आईसीयू अग्निकांड मामले में प्रशासन का एक्शन लगातार जारी है। सात मरीजों की जान लेने वाली इस घटना के बाद अब स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आईसीयू ड्यूटी के दौरान मरीजों को छोड़कर चले जाने के आरोपी डॉक्टर पंकज कुमार को निलंबित कर दिया है। वहीं दूसरी ओर जिले में चल रहे विशेष जांच अभियान के तहत अब तक 25 निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों को सील किया जा चुका है। जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन की अनुशंसा पर स्वास्थ्य विभाग ने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बंदरा के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। आरोप है कि 4 जून को प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगने के समय वह ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन आग लगने के दौरान मरीजों को छोड़कर वहां से चले गए। इतना ही नहीं, सरकारी सेवा में रहते हुए निजी अस्पताल में काम करने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने के आरोप भी उन पर लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और मरीजों के प्रति संवेदनहीनता मानते हुए बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली 2005 के तहत कार्रवाई की है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय स्वास्थ्य विभाग, पटना निर्धारित करेगा और उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा। साथ ही पूरे मामले की विभागीय जांच भी कराई जाएगी। डीएम का सख्त संदेश- स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं जिलाधिकारी सुब्रत कुमार सेन ने स्पष्ट कहा है कि मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी स्तर की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि आपातकालीन परिस्थितियों में तैनात चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों से पूर्ण जवाबदेही की अपेक्षा की जाती है। सरकारी दायित्वों के निर्वहन में शिथिलता बरतने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने एईएस और संभावित आपदाओं को देखते हुए जिले के सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों, चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया है कि वे अपनी ड्यूटी के प्रति पूरी तरह सजग रहें और आपात स्थिति में निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित करें। 25 अस्पतालों पर गिरी गाज, जांच अभियान जारी प्रसाद अस्पताल हादसे के बाद जिला प्रशासन ने निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों के खिलाफ व्यापक जांच अभियान शुरू किया है। सुरक्षा मानकों और सरकारी प्रोटोकॉल का उल्लंघन पाए जाने पर अब तक 25 स्वास्थ्य संस्थानों को सील किया जा चुका है। प्रशासन का कहना है कि जांच अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। अस्पताल संचालक को मिली जमानत इधर प्रसाद अस्पताल अग्निकांड मामले में गिरफ्तार अस्पताल प्रबंधक डॉ. उपेंद्र प्रसाद को कोर्ट से जमानत मिल गई है। हालांकि प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर जांच जारी है और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है। अनुमति देने वाले अधिकारी भी जांच के घेरे में तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त गिरवर दयाल सिंह ने कहा है कि अग्निकांड के हर पहलू की गहन जांच कराई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। आयुक्त ने यह भी कहा कि यह जांच केवल अस्पताल प्रबंधन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि अस्पताल को संचालन की अनुमति किन परिस्थितियों में मिली और संबंधित अधिकारियों ने किस आधार पर स्वीकृति दी थी। यदि जांच में किसी अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सात लोगों की जा चुकी है जान बता दें कि 4 जून की अहले सुबह प्रसाद अस्पताल के आईसीयू में आग लगने से छह मरीजों की मौत हो गई थी। बाद में इलाज के दौरान एक और मरीज ने दम तोड़ दिया, जिसके बाद मृतकों की संख्या बढ़कर सात हो गई। हादसे के बाद से प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहे हैं और पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर जारी है।


